सरकार के भरोसे कमजोर एक दर्जन सफेद हाथी

  • प्रदेश के 16 नगर निगमों को ए, बी और सी कैटागिरी में बांटा गया, इसी आधार पर सरकार से मिलता है अनुदान

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
विकसित मध्यप्रदेश की ओर दौड़ लगा रहे राज्य की नगर सरकारें आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं। एक दर्जन से ज्यादा ऐसे नगर निगम हैं, जिनके पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने के भी लाले पड़ते रहते हैं। सरकार ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कुछ टिप्स भी दिए, लेकिन स्थानीय स्तर पर वोट कटने के डर से निकाय जनप्रतिनिधि उस पर काम नहीं कर पा रहे हैं। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में 16 नगर निगम हैं, जिन्हें ए, बी और सी कैटागिरी में बांटा गया है। सरकार इसी आधार और इन निकायों को अनुदान भी उपलब्ध कराती है। इनमें प्रदेश के महानगरों को छोड़ दे, तो एक दर्जन से ज्यादा नगर निगमों की माली हालत खस्ता है। इनमें से कुछ निकायों में पदस्थ अधिकारी कर्मचारियों को तभी वेतन मिल पाता है, जब राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली अनुदान राशि उनके खातों में जाती है। इतना ही नहीं इन निकायों को अपने दैनिक कार्यों और विकास कार्यों के लिए भी सरकार के अनुदान पर निर्भर रहना पड़ता है। कई निकायों की स्थिति तो ऐसी है कि उन्हें अपनी बिजली का बिल जमा करने के लिए सरकार की तरफ देखना पड़ता है। निकायों की आय का सबसे बड़ा जरिया नगर में संपत्ति कर होता है, लेकिन कटनी, रतलाम व कुछ दूसरे निगमों को छोड़ दें, तो सभी अपनी राजस्व (आय) से परिचलन व्यय निकालने में असमर्थ है। ऐसे में निकाय अवैध कालोनियों को वैध करने के एवज में विकास कार्यों के लिए विशेष अनुदान सरकार से मांगत्ती रहते है।
हर साल मिलता है अनुदान
राज्य सरकार प्रदेश के नगर निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ अधोसंरचना विकास और मूलभूत सुविधाओं के लिए हर साल अनुदान देती है। पिछले दो वित्तीय वर्षों के आंकड़ों के अनुसार अनुदान की राशि राज्य वित्त आयोग और केंद्र सरकार की अनुशंसा पर निर्भर रहती है।
इसलिए बिगड़ी वित्तीय हालत
संपत्ति कर में कमी: ग्वालियर नगर निगम सहित दूसरी निकायों में संपत्ति कर वसूली में निरंतरा का अभाव, ग्वालियर में 300 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति कर की राशि लंबे समय से नहीं वसूली की गई। इसी तरह कई निगमों से संपत्तियों का सही सर्वे न होने के कारण टैक्स का दायरा बहुत छोटा है, जिससे संभावित आय प्राप्त नहीं हो पाती। नगर निगमों का 70 प्रतिशत से अधिक राजस्व कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और कचरा कलेक्शन गाडिय़ों जैसे नियमित खचों में चला जाता है। इससे विकास कार्यों के लिए बहुत कम पैसा बचता है। कई निकाय बिजली का बिल तक भरने में असमर्थ है। जिससे वे लगातार कर्ज में डूब रहे है। रीवा नगर निगम को चुंगी क्षतिपूर्ति के तौर पर 2 करोड़ 75 लाख रुपए दिए गए, इसमें से सरकार ने 1 करोड़ 95 लाख बकाया बिजली बिल के हिस्से का काट लिया। रीवा सहित दूसरे निकायों को हुडको द्वारा लिए गए ऋण का ब्याज भी चुकाना पड़ रहा है।
निकायों के आय के स्रोत:  संपत्ति कर (राजस्व), जल शुल्क, निगम की दुकानों का किराया, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रभार, स्मार्ट सिटी विकास बजट, अमृत योजना की राशि
प्रोत्साहन राशि: यह राशि निकायों को अपने राजस्व में वृद्धि करने पर पुरस्कार के तौर पर दी जाती है। बीते वित्तीय वर्ष में इसके लिए राज्य सरकार ने विभाग के बजट में 29 करोड़ 4 लाख रुपए का प्रावधान किया था।
इतना बजट दे रही राज्य सरकार
मध्यप्रदेश सरकार ने अपने वित्तीय बजट में शहरी निकायों के लिए बड़ा फंड आवंटित किया है। सरकार ने शहरी विकास के लिए लगभग 21.562 करोड़ का प्रावधान है। यह राशि मेट्रो, ई-बसें, स्मार्ट सिटी में खर्च की जाएगी। इसी तरह आधारभूत संरचना के लिए भी राज्य सरकार ने राशि तय की है। नई श्रद्धा नगर योजना के तहत वार्ड-स्तरीय विकास के लिए अगले 3 वर्षों में निकायों में करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा राज्य सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान 157 करोड़ की एक मुश्त अनुदान दिया था, जिसमें इस साल वृद्धि होने की संभावना है।
निकायों का इस साल का बजट
ड्डबुरहानपुर नगर निगम की माली हालत बेहद खराब है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में नगर निगम का बजट 350 करोड़ प्रस्तावित किया गया है।
ड्डसिंगरौली नगर निगम के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 305.60 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया गया है। इस बजट में 238.05 करोड़ की आय की बात भी कही गई है।
ड्डछिंदवाड़ा नगर निगम ने मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए 305.95 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया है।
ड्डसतना नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4 अरब 66 करोड़ 66 लाख का बजट प्रस्तावित किया है। इसमें 19.66 करोड़ का घाटा दिखाया गया है। सरकार द्वारा आमदनी बढ़ाने की सलाह के बाद भी सतना नगर निगम ने संपत्ति कर में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव वापस ले लिया।

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