अब भाजपा का पूरा फोकस अपनी दो सीटों पर

फोकस
  • मप्र में अब चार नहीं तीन सीटों पर ही होंगे राज्यसभा चुनाव

गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद मप्र भाजपा का फोकस अब राज्यसभा चुनाव पर हो गया है। विधानसभा चुनाव में दो केंद्रीय मंत्रियों की हार के बाद यह तय हो गया है कि मप्र में अब चार नहीं तीन राज्यसभा सीटों पर ही चुनाव होंगे। वहीं भाजपा ने भी अपनी रणनीति में बदलाव किया है और अपने कब्जे वाली दो सीटों पर ही चुनाव लडऩे की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। हालांकि कांग्रेस के कब्जे वाली सीट को लेकर भाजपा ने कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। गौरतलब है कि अपने गृह प्रदेशों से विधानसभा चुनाव लड़े दो राज्यसभा सांसदों की चुनावी हार ने मप्र भाजपा का गणित गड़बड़ा दिया है। ऐसे में अगले माह प्रस्तावित राज्यसभा चुनाव के लिए प्रदेश भाजपा को नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। माना जा रहा है कि भाजपा फिलहाल दो ही सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने पर विचार कर रही है। गौरतलब है कि केन्द्रीय अल्पसंख्यक व मत्स्यपालन राज्यमंत्री जार्ज कुरियन और केन्द्रीय संसदीय कार्यराज्यमंत्री एल, मुरुगन मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद है, जिन्हें भाजपा ने उनके गृह प्रदेशों से विधानसभा चुनाव लड़वाया था। केरल की कांजीरापल्ली सीट से कुरियन ने विधानसभा चुनाव लड़ा था, जबकि मुरुगन तमिलनाडु की अवनाशी विधानसभा सीट से पार्टी प्रत्याशी रहे। लेकिन दोनों केन्द्रीय मंत्री विधानसभा चुनाव नहीं जीत सके है।
तीसरी सीट के लिए अभी कोई संकेत नहीं
राजनीति के जानकार आने वाले राज्यसभा चुनावों में मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर होने की बात कर रहे है। उनका मानना है कि भाजपा राज्यसभा में कांग्रेस की एक सीट छीनने के लिए मध्यप्रदेश की तीसरी सीट पर भी अपना प्रत्याशी को उतार सकती है। ऐसे में भाजपा पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा या किसी दूसरे मजबूत नेता को तीसरी सीट से प्रत्याशी बना सकती है। यदि केन्द्र कुरियन को किसी दूसरे राज्य से राज्यसभा भेजती है, तो फिर भाजपा को दो सीटों पर स्थानीय नेताओं को टिकट देने में सहुलियत मिलेगी। ऐसे में एक सीट पर किसी महिला नेत्री को भी भाजपा टिकट दे सकती है। इधर भाजपा के एक नेता ने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि राज्यसभा चुनाव के लिए पार्टी के संपर्क में 4 सदस्य नहीं बल्कि 15 विधायक हैं, जो क्रास वोटिंग कर तीसरी सीट में पार्टी को विजय दिला सकते हैं। इधर कांग्रेस के सामने अब तक यह चुनौती बनी हुई है कि वह अपनी इकलौती सीट पर किसे राज्यसभा भेजे। पार्टी की नजर उसके खाते वाली तीसरी सीट को लेकर भाजपा की रणनीति पर भी है। हालांकि मौजूदा स्थिति में कांग्रेस के पास 65 में से 62 विधायक है, जो एक सीट के लिए आवश्यक 58 सदस्यों के मुकाबले 4 ज्यादा है। कांग्रेस का दावा है कि वह आसानी से अपनी एक सीट बचा लेगी। लेकिन पार्टी से छनकर जो खबर बाहर आ रही है, उसमें एक सीट के लिए कांग्रेस के बड़े नेताओं के बीच जमकर जंग मची होने की बात कही जा रही है। कहा जा रहा है कि पार्टी पहले किसी नए युवा चेहरे को राज्यसभा भेजकर ये संदेश देना चाहती थी कि कांग्रेस भी युवाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। लेकिन अब इस बात पर चर्चा होने लगी है कि ऐसा कौन नेता है, तो भाजपा द्वारा तीसरी सीट पर प्रत्याशी उतारने के बाद भी भाजपा की रणनीति को विफल कर चुनाव जीत सकता है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का कहना है कि उन्हें अपने विधायकों पर पूरा भरोसा है, ऐसे में पार्टी राज्यसभा की एक सीट के चुनाव को किसी भी तरह की चिता में नहीं है। पार्टी किसे प्रत्याशी बनाती है, यह समय आने पर सामने आ जाएगा, लेकिन हम भोपाल से लेकर दिल्ली तक इस बात से आश्वस्त है कि जून माह में खाली हो रही राज्यसभा की एक सीद कांग्रेस के पास बनी रहेगी।
…तो चार सीटों पर होता चुनाव
 कुरियन का कार्यकाल जून में समाप्त हो रहा है, जबकि एल. मुरुगन का कार्यकाल अप्रैल 2030 में समाप्त होगा। प्रदेश भाजपा की नजर इन दोनों सांसदों के विधानसभा चुनाव के परिणामों पर थी, क्योंकि यदि ये दोनों चुनाव जीत जाते और उन्हें राज्यसभा की सीट से इस्तीफा देना पड़ता, जिससे मप्र में अगले माह तीन की जगह 4 सीटों पर राज्यसभा के लिए चुनाव कराए जाते और पार्टी को अपने 3 नेताओं को राज्यसभा भेजने का मौका मिलता। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इससे अब पार्टी नेतृत्व के सामने इस बात की दुविधा उत्पन्न हो सकती है कि यदि केन्द्रीय नेतृत्व एक बार फिर से कुरियन को मप्र के खाते से राज्यसभा भेजती है, तो उनके स्थान पर किसी एक स्थानीय नेता को मौका नहीं मिल पाएगा। अगर राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव पर मौजूदा स्थिति का आकलन किया जाए, तो कांग्रेस का एक सांसद चुना जाना लगभग तय है, जबकि भाजपा की खाली हो रही दोनों सीटें उसे मिलेगी। ये तीन सीटें कांग्रेस के दिग्विजय सिंह और भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी व जार्ज कुरियन का कार्यकाल पूरा होने की वजह से खाली हो रही है। कुरियन केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के लोकसभा जाने के बाद रिक्त सीट से राज्यसभा भेजे गए थे।
कांग्रेस से पूर्व सीएम कमलनाथ का राज्यसभा जाना लगभग तय
मप्र में राज्यसभा की रिक्त हो रही 3 सीटों पर जून में संभावित चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। विधानसभा में मौजुदा संख्या बल के आधार पर दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाती नजर आ रही है, लेकिन बदले राजनीतिक समीकरणों के चलते तीसरी सीट को लेकर मुकाबला रोचक होता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस ने उम्मीदवार चयन में सावधानी नहीं बरती, तो यह सीट भी उसके हाथ से निकल सकती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है। पार्टी के भीतर उन्हें सर्वमान्य नेता के रूप में देखा जाता है और माना जा रहा है कि उनके नाम पर संगठन और विधायक दल में एकजुटता बनी रह सकती है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का भी यही मत है कि यदि कमलनाथ को उम्मीदवार बनाया जाता है, तो क्रॉस वोटिंग की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी। दरअसल, राज्यसभा चुनाव के लिए आवश्यक बोटों का गणित कांग्रेस के पक्ष में बेहद सीमित अंतर से खड़ा है। एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद मप्र में कांग्रेस के विधायकों की वर्तमान संख्या 64 रह गई है। विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर न्यायालय ने रोक लगा दी है और बीना विधायक निर्मला सप्रे का झुकाव पूरी तरह से भाजपा की ओर है, जिससे कांग्रेस की चिता और बढ़ गई है। ऐसे हालात में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने विधायकों को एकजुट रखने की है। पार्टी के अंदर गुटबाजी और असंतोष की खबरें पहले से ही सामने आती रही हैं।

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