
- आरक्षक से लेकर निरीक्षक तक 95 पद भरने की तैयारी…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी और नशे के अवैध कारोबार को जड़ से मिटाने के लिए डीजीपी ने प्रदेशभर में अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद पुलिस की नारकोटिक्स विंग को फिर से मजबूत बनाने की कवायद तेज हो गई है। पीएचक्यू से नशा मुक्ति अभियान चलाने और तस्करों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश मिलने के बाद, नारको विंग में खाली 95 पदों को भरने प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ब्रांच के एडीजी डी. श्रीनिवास वर्मा ने इस संबंध में सभी जिलों के एसपी और भोपाल-इंदौर के पुलिस कमिश्नर को पत्र भी लिखा है। इसमें कहा गया है कि इस संबंध में थानों में रोल कॉल और लाइन में हाजिरी के दौरान इसकी जानकारी सभी स्टाफ को दी जाए। इसके बाद इन जिलों से जो भी स्टाफ नारकोटिक्स विंग में आना चाहता है, उसके आवेदन लेकर एक सप्ताह के भीतर सीधे ब्रांच को भेजे जाएं।
जनरल ड्यूटी के साथ मोटर ट्रांसपोर्ट स्टाफ को भी मौका
नारकोटिक्स विंग में फिलहाल कॉन्स्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर तक के 95 पद खाली हैं। इनमें जनरल ड्यूटी (जीडी) के अलावा वाहन चलाने और संभालने वाले स्टाफ (एमटी) के पद भी शामिल हैं। नारकोटिक्स विंग में इंस्पेक्टर के 4 पद, उप निरीक्षक के 20 पद, एएसआई के 5 पद, प्रधान आरक्षक के 12 पद और आरक्षक के 54 पदों पर प्रतिनियुक्ति दी जाएगी। इनमें आरक्षक के 17, हेड कॉन्स्टेबल के 7, एएसआई के 3 और सब इंस्पेक्टर का । पद एमटी स्टाफ से भरा जाएगा, बाकी पद जीडी स्टाफ के लिए हैं। इन पदों पर शुरुआती तौर पर 3 वर्ष की अवधि के लिए प्रतिनियुक्ति दी जाएगी, जिसे 1 साल आगे बढ़ाया जा सकेगा। विंग ने साफ कर दिया है कि प्रतिनियुक्ति के लिए केवल वही पुलिसकर्मी पात्र है, जिनकी न्यूनतम सेवा लगभग 5 वर्ष की हो चुकी है और उनके खिलाफ विभागीय जांच या आपराधिक प्रकरण लचित नहीं है इसके अलावा, कर्मचारी का पिछला आचरण और कार्यक्षमता भी चयन का मुख्य आधार होगी।
केंद्रीय एजेंसियों से तालमेल की कमी
एमपी पुलिस की नारको विंग की स्थापना लगभग चार दशक पहले की गई थी। मादक पदार्थों के खिलाफ स्ट्राइक फोर्स के तौर पर इसे इस मकसद के साथ बनाया गया था कि यह सेंट्रल एजेंसियों के साथ मिलकर नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। फिलहाल विंग इंदौर, रतलाम, मंदसौर और नीमच में एक्टिव है, लेकिन स्टाफ की कमी से जूझ रही है। अवैध एमडी फैक्ट्री, नशे की बड़ी खेप और तस्करों को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) जैसी सेंट्रल एजेंसियां पकड़ रही हैं और स्थानीय विंग को भनक तक नहीं लगती। इसकी बड़ी वजह इन एजेंसियों के साथ विंग का तालमेल न होना है। हालांकि साल में एक-दो बार नारकोटिक्स ब्रांच अपने एक्शन या अन्य वजहों से चर्चा में जरूर आ जाती है।
