
- विजय शाह पर सुप्रीम फटकार ने बढ़ाई चिंता
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। सार्वजनिक माफी मांगने के बाद लंबी चुप्पी ओढक़र बैठे मंत्री विजय शाह के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक बार फिर दिखाई गई सख्ती ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। शीर्ष अदालत के निशाने से खुद को तो बचाना ही है, सरकार अपने आदिवासी चेहरे पर भी दाग नहीं रहने देना चाहती। इसी के चलते अदालत द्वारा दी गई टाइम लिमिट में सरकार एक बार फिर कानूनी राय लेकर नया रास्ता अपना सकती है, ताकि सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी से भी बचा जा सके। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी पर प्रदेश के आदिमजाति कल्याण मंत्री विजय शाह की विवादित टिप्पणी के मामले में सुनवाई की गई थी। इसमें राज्य सरकार द्वारा मंत्री शाह पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने में आनाकानी पर अदालत ने खासी नाराजगी जताई। अदालत ने 19 जनवरी को दिए आदेश में मंजूरी के लिए शासन को दो सप्ताह का समय दिया था। मगर सरकार ने शीर्ष अदालत के आदेश को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया था। साथ ही मंत्री शाह को भी सरकार सेफ मानने लगी थी।
बजट सत्र के अलावा विशेष सत्र में भी मंत्री शाह पुराने अंदाज में नजर आ रहे थे। शाह पूर्व में अपने बयान कई बार माफी भी मांग चुके हैं। इससे सरकार को भी मानकर चल रही थी कि उसकी युक्ति काम आ गई है और कानूनी टीम अब शाह को कठघरे से बाहर निकाल लेगी। मगर शुक्रवार को अदालत ने न केवल शाह की आदत पर खुलकर टिप्पणी की, बल्कि सरकार के रवैये को भी उचित नहीं मानते हुए पानी सिर से ऊपर बता दिया। इससे सरकार की चिंता तो बढ़ गई है। शनिवार को भी अदालत के आदेश की प्रति न मिलने से राज्य शासन ने राहत की सांस ले ली, लेकिन अब राज्य शासन हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकती। हालांकि सारे विकल्पों पर चिंतन के दौर शुक्रवार से ही शुरू हो गए हैं। महाधिवक्ता की टीम के अलावा पार्टी से जुड़े वरिष्ठ विधि विशेषज्ञों और अधिवक्ताओं से नए आदेश के मायने समझे जा रहे हैं और अब ऐसी स्थिति में उठाए जाने वाले कदमों पर भी राय ली जा सकती है। अभियोजन की मंजूरी से बचने के लिए नए सिरे से सरकार का पक्ष रखा जा सकता है। वैसे भी शाह को लेकर पहले ही दिन से रक्षात्मक रवैया सरकार अपनाकर चल रही है। शाह को उनके हाल पर छोडक़र सरकार आदिवासियों की नाराजगी नहीं उठाना चाहेगी।
