
- विधेयक के मानसून सत्र में पेश होने की संभावना
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में गुजरात की तरह ही समान नागरिक संहिता (यूसीसी) में आदिवासी वर्ग को छूट देने की तैयारी है। आदिवासियों को इसमें शामिल नहीं करने की वजह यह है कि उनकी मूल सांस्कृतिक पहचान बनी रहे। यूसीसी से बाहर होने पर विवाह, विवाह- विच्छेद, विरासत और संपत्ति से जुड़े पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाज पर यूसीसी के प्रावधान लागू नहीं होंगे।
समिति करेगी जनसुनवाई, तैयार होगा ड्राफ्ट
बता दें, प्रदेश में यूसीसी लागू करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रसाद देसाई की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति इसी सप्ताह बनाई है। समिति अब जनसुनवाई कर यूसीसी के बारे में लोगों की राय लेगी। बता दें कि गुजरात में भी समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार करने में देसाई की बड़ी भूमिका रही है।
गुजरात व उत्तराखंड मॉडल का अध्ययन
हालांकि, यूसीसी लागू करने के पहले सरकार गुजरात और उत्तराखंड मॉडल का अध्ययन भी कराने जा रही है। पुलिस मुख्यालय को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। मुख्यालय द्वारा दोनों राज्यों में लागू प्रविधानों का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
मध्य प्रदेश बन सकता है तीसरा राज्य: यदि यह कानून लागू होता है, तो मध्य प्रदेश यूसीसी लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बन सकता है। सरकार इस मसले पर कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का गहन अध्ययन कर रही है।
जुलाई में आ सकता है विधेयक
सरकार इस मामले में हर प्रावधान का विधिक पहलू भी देख रही है। यही कारण है कि समिति में विधि के जानकार, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मिलित किया गया है। जुलाई में विधानसभा के मॉनसून सत्र में सरकार यह विधेयक ला सकती है। इसी कारण समिति को 60 दिन के भीतर अपना प्रतिवेदन देने के लिए कहा गया है।
