वोट बैंक मजबूत करने… ‘बाहरियों’ पर दांव

  • राजनीति नियुक्तियों में मिशन 2028 की झलक
  • गौरव चौहान
बाहरियों पर दांव

मप्र में इस समय राजनीतिक नियुक्तियों का दौर चल रहा है। अब तक हुई नियुक्तियों को देखकर साफ लग रहा है कि सत्ता और संगठन का पूरा फोकस मिशन 2028 पर है। पार्टी आगामी विधानसभा में 2023 से भी बेहतर प्रदर्शन करना चाहती है। इसलिए ‘बाहरियों’ यानी कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को भी राजनीतिक नियुक्यिों का लाभ दिया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेता अपनी पार्टी छोडक़र भाजपा में शामिल हुए थे। उस समय इसका पार्टी को बहुत फायदा हुआ था। ऐसे में आगमी चुनावों यानी 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव और 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए नेताओं की जमावट की जा रही है।
गौरतलब है कि मप्र में भाजपा नेताओं को करीब दो साल से राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार था। अब लंबे समय बाद आरंभ हुईं राजनीतिक नियुक्तियों में कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को भी आयोग और निगम मंडल में स्थान दिया गया है। कई बड़े नेता जरूर अभी भी कतार में हैं। लोकसभा चुनाव से पहले तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और न्यू ज्वाइनिंग सेल के अध्यक्ष डा. नरोत्तम मिश्रा द्वारा बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं को भाजपा में शामिल कराया गया था। इनमें केशव सिंह बघेल को कुक्कुट एवं पशुधन विकास निगम का अध्यक्ष और रामलाल मालवीय को एससी आयोग में सदस्य बनाया गया है। कांग्रेस छोडक़र भाजपा में आने वालों में छिंदवाड़ा से कमलनाथ के करीबी रहे पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, आदिवासी नेता गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी (धार), संजय शुक्ला (इंदौर), विशाल पटेल (देपालपुर), अर्जुन पलिया (पिपरिया) जैसे नेता भी शामिल थे। दीपक सक्सेना ने छिंदवाड़ा में भाजपा की पकड़ मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई, जिसके चलते उन्हें किसी महत्वपूर्ण निगम का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। फिलहाल सभी को अगली सूची का इंतजार है।
गुटबाजी फिलहाल बैकफुट पर
भाजपा में एक दौर था जब गुटबाजी हावी थी। पावरफुल नेता अपने गुट को बढ़ाने में सफल रहे। गुटबाजी में जमीनी नेता हासिए पर चले गए। ऐसा ही एक नाम जयभान सिंह पवैया का है। लंबे समय सक्रिय राजनीति से वनवास के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की जोड़ी ने वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाकर वापसी कराई है। मप्र भाजपा में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी फिलहाल बैकफुट पर नजर आ रही है। सीएम डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की जोड़ी ने संगठन और सत्ता के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसी रणनीति अपनाई है, जिसके चलते बड़े गुटों का प्रभाव यह भी साफ है कि गुट पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं और वे अपने-अपने स्तर पर सक्रिय बने हुए हैं। राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा जयभान सिंह पवैया की वापसी को लेकर है। एक समय गुटबाजी के कारण हाशिए पर गए पर्वैया को वित्त आयोग से मुख्यधारा में लाया गया है। इसे संगठन का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि पुराने और अनुभवी नेताओं को दरकिनार करने की बजाय उन्हें पुन: अवसर दिया जाएगा।
अभी कईयों को पुनर्वास की आस
कांग्रेस से भाजपा में आए कई नेताओं को पुनर्वास की आस है। गौरतलब है कि वर्ष 2024 में मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से भाजपा के पास 28 सीट थीं। केवल छिंदवाड़ा ऐसी थी, जहां से पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के बेटे नकुल नाथ सांसद थे। यहां कांग्रेस कभी आम चुनाव में पराजित नहीं हुई थी। कमल नाथ के बेहद खास पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना समेत कई नेताओं को भाजपा अपने खेमे में ले आइर्ट तो छिंदवाड़ा सीट पर लोकसभा चुनाव में नया इतिहास भी बन गया। आदिवासी नेताओं में प्रेमनारायण ठाकुर और उनके बेटे उत्तम ठाकुर भाजपा के साथ थे। बाद में कांग्रेस के तत्कालीन विधायक कमलेश शाह भी इस्तीफा देकर भाजपा में में शामिल हो गए। दीपक सक्सेना इसेना और शाह दोनों से ही तब यह डील की गई थी कि समय आने पर उन्हें भी सत्ता में भागीदार बनाया जाएगा। हालांकि पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी किसी संभावना के चलते भाजपा में आए, उनका भी पुनर्वास अब तक नहीं हो पाया है। घार से तीन बार कांग्रेस के के सांसद रहे राजूखेड़ी ने भी चुनाव से ठीक पहले भाजपा की सदस्यता ली। धार सहित आसपास के जिलों में भाजपा के पास आदिवासी चेहरों की क्रमी है, ऐसे में राजूखेड़ी के पुनर्वास की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। शिवपुरी के पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता हरिवल्लभ भी कई समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हुए। इंदौर लोकसभा सीट से कांग्रेस के घोषित प्रत्याशी अक्षय कांति बम ने नामांकन वापस लेने के आखिरी दिन अपना पर्चा वापस लिया और भाजपा में शामिल हो गए, जिससे इंदौर में कांग्रेस बिना प्रत्याशी के रह गई थी।
सबको साधने की कोशिश
राजनीतिक नियुक्तियों के माध्यम से सरकार और संगठन की कोशिश है कि सभी को साधा जाए। इसलिए काफी विचार-विमर्श के बार नियुक्तियों की जा रही है। राज्य मानवाधिकार आयोग एपी सिंह, वित्त आयोग जयभान सिंह पवैया, अनुसूचित जाति आयोग डॉ. कैलाश जाटव व अनुसूचित जनजाति आयोग रामलाल रौतेल शामिल हैं। राज्य पशुधन एवं दावा कुक्कुट विकास निगम केशव सिंह बघेल और ग्वालियर मेला प्राधिकरण में भी अध्यक्ष अशोक जादौन नियुक्त किए जा चुके हैं। इनमें नियुक्ति को लेकर अब तक भाजपा के किसी भी गुट ने अपने प्रभाव से नियुक्ति करने का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष नहीं ठोका। राजनीतिक मामलों के जानकारों की माने तो सत्ता व संगठन ने हर पहलुओं को देखते हुए ये नाम तय किए। हालांकि इनमें से राज्य मानव अधिकार आयोग में एपी सिंह की नियुक्ति के लिए तो संवैधानिक चयन प्रक्रिया अपनाई गई। वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराने वाले गुना के पूर्व सांसद केपी यादव को मप्र स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन का अध्यक्ष बनाया गया है। केपी पिछले दो सालों से राजनीतिक पुनर्वास की आस लगाए बैठे थे। कांग्रेस स ेभाजपा में आए रामनिवास रावत वन विकास निगम के अध्यक्ष बनाए गए हैं। वहीं, भिंड भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष संजीव कांकर नागरिक आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष बना गए हैं। केपी यादव और संजीव कांकर का कार्यकाल दो साल होगा। पन्ना के बीजेपी नेता संजय नगाइच को मप्र वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन का अध्यक्ष बनाया गया है। नगाइच वर्तमान में प्रदेश भाजपा कार्यालय में सहयोग सेल का काम संभाल रहे हैं। उनका संजय नगाइच का कार्यकाल तीन साल होगा। बीजेपी के पूर्व संभागीय संगठन मंत्री केशव भदौरिया को महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है। केशव भदौरिया बीजेपी के प्रदेश मंत्री भी रह चुके हैं।

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