जितनी राशि इकठ्ठा हुई… उतनी जमा करवाओ

भाजपा
  • भाजपा का आजीवन सहयोग निधि अभियान समाप्त, पार्टी ने जारी किया आदेश
  • गौरव चौहान

भाजपा पहली बार अपने आजीवन सहयोग निधि अभियान को जल्द खत्म करने जा रही है। सभी 62 संगठनात्मक जिलों में बनाए गए आजीवन पदाधिकारियों को प्रदेश कार्यालय से जारी फरमान में कहा गया है कि जितनी राशि इक_ी हो गई है, उतनी राशि भोपाल स्थित कार्यालय में जमा करवाओ और अभियान बंद करो। साथ ही प्रदेश भाजपा ने उन सभी लोगों की सूची जिलाध्यक्षों से मांगी है, जिन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 में पार्टी को आजीवन सहयोग निधि के नाम पर 20 हजार से अधिक का चंदा दिया है। जिलों से कहा गया है कि चंदा देने वाले का नाम-पता, बैंक का नाम, राशि, चेक नंबर, तारीख और 20 हजार रुपए से ऊपर देने वाले व्यक्ति का पैन नंबर सहित जानकारी उपलब्ध कराएं। बताया जा रहा है कि सहयोग निधि लेने के बाद भी कई जिलों ने पूरा हिसाब प्रदेश यूनिट को नहीं दिया है। पार्टी ने कहा है कि जितने रसीद कट्टे बांटे जा चुके हैं उनका हिसाब दें और खाली कट्टे पार्टी कार्यालय में जल्द से जल्द  जमा करवा देवें। इसके बाद दूसरे आयोजन भी आने वाले हंै, उस पर ध्यान दिया जाएं। इस बार अभियान उतने जोर-शोर से नहीं चल पाया, जैसा हर बार चलता है। अभियान को लेकर पार्षदों का रवैया उदासीन बना रहा। पार्षदों को एक लाख रुपए प्रत्येक वार्ड से देना थे, लेकिन उसमें कई पार्षदों ने रूचि नहीं दिखाई तो नीचे के कार्यकर्ताओं ने भी रूचि नहीं ली।
भाजपा द्वारा हर साल चलाए जाने वाले आजीवन सहयोग निधि अभियान को लेकर इस बार मप्र में ज्यादा प्रयास किए गए। हालांकि कुछ प्रदेशों में यह अभियान तो इस साल चलाया भी नहीं गया। इस अभियान की आखरी तारीख पहले 28 फरवरी तय की थी, लेकिन बाद में इसे 15 मार्च कर दिया गया। इंदौर जैसा शहर जहां आजीवन सहयोग निधि में बढ़-चढकऱ भाग लिया जाता है, इस बार उसका असर भी कम दिखाई दिया। हालांकि भाजपा के प्रदेश संगठन ने कल ही सभी 62 जिलों के प्रभारियों से कहा है कि वे 15 मार्च को इस अभियान को बंद कर दें, यानि 15 मार्च के पहले के जो चेक जमा हो चुके हैं, उसे ही प्रदेश कार्यालय में जमा करवा देवें। इसके बाद अब आजीवन सहयोग निधि का काम समेटा जाने लगा है और स्थानीय नेता भी राहत की सांस ले रहे हैं। अभियान से जुड़े स्थानीय नेताओं का कहना है कि इसके बाद सभी मंडल और विधानसभा प्रभारियों से कहा जा रहा है कि वे अपने-अपने क्षेत्र से मिली राशि की सूची बनाकर पार्टी कार्यालय को सांैप देवें। इस बार पार्टी ने नकद राशि इक_ा न कर चेक के माध्यम से राशि ली थी। कई विधानसभाओं ने अपने द्वारा घोषित राशि के चेक जमा कर दिए हैं तो कुछ के बाकी हैं। फरमान के बाद अब स्थानीय संगठन द्वारा अभियान को बंद करने की तैयारी की जा रही है।
20 हजार से ज्यादा चंदा देने वालों की सूची मांगी
प्रदेश भाजपा ने उन सभी लोगों की सूची जिलाध्यक्षों से मांगी है, जिन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 में पार्टी को आजीवन सहयोग निधि के नाम पर 20 हजार से अधिक का चंदा दिया है। जिलों से कहा गया है कि चंदा देने वाले का नाम-पता, बैंक का नाम, राशि, चेक नंबर, तारीख और 20 हजार रुपए से ऊपर देने वाले व्यक्ति का पैन नंबर सहित जानकारी उपलब्ध कराएं। बताया जा रहा है कि सहयोग निधि लेने के बाद भी कई जिलों ने पूरा हिसाब प्रदेश यूनिट को नहीं दिया है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि जो मई तक पूरा हिसाब नहीं देंगे, उन जिलों को उनके हिस्से का 25 प्रतिशत पैसा नहीं मिलेगा। पार्टी में व्यवस्था है कि कुल निधि का आधा केंद्रीय संगठन को जाता है। शेष आधे में से आधा जिलों को भेजा जाता है। बाकी प्रदेश संगठन रखता है। पार्टी के प्रदेश कोषाध्यक्ष अखिलेश जैन ने इसके लिए बाकायदा पत्र लिखा है। नौ जिले ऐसे भी मिले हैं, जिनका 2025 का आजीवन सहयोग निधि का हिसाब जमा ही नहीं हुआ है। इनके जिलाध्यक्षों को कहा गया है कि वे तुरंत पैसा जमा कराएं, वरना कार्रवाई होगी। ऑडिट रिपोर्ट और बैंक स्टेटमेंट समेत तमाम जानकारी 15 मई तक मांगी गई है। बिना सीए के हस्ताक्षर के बही खाता मांगा: वित्तीय वर्ष 2025-26 की ऑडिट रिपोर्ट बिना सीए के हस्ताक्षर के मांगी गई है। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के फिगर डालकर 2026 की ऑडिट रिपोर्ट के लिए फॉर्मेट बनाया गया है। उसी अनुसार फॉर्मेट भरा जाए।
कई चैक बाउंस, लेकिन सार्वजनिक नहीं किए
सूत्रों के अनुसार कई कार्यकर्ताओं ने ऐसे चेक लाकर दे दिए जो बाउंस हो गए हैं। इसकी इंट्री अलग से की जा रही है, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे चेक दोबारा मंगाए जा रहे हैं ताकि राशि इक_ा की जा सके। हर दिन 3 से 4 चेक बाउंस हो रहे हैं, ऐसे में भी राशि इक_ा नहीं हो पाना एक अनुशासन वाली पार्टी के कार्यकर्ताओं पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। अभियान को आगे नहीं बढ़ाने का कारण मार्च एडिंग भी रहा है। जो चेक से चंदा दे रहे हैं, उसकी इंट्री भी खातों में बताना पड़ती है। यानि यह पैसा एक नंबर में ही जमा करना पड़ रहा है। पहले नकद राशि ली जाती थी और उसकी रसीद दे दी जाती थी, लेकिन अब ऑडिट के चक्कर में चेक की इंट्री भी संभलकर की जाती है। कई ऐसे बड़े व्यापारी और उद्योगपति भी चेक नहीं दे पाए जो मार्च क्लोजिंग में लगे हुए हैं।
जिलों में स्थित संपत्तियों की रिपोर्ट तलब: प्रदेश संगठन ने जिलों में स्थित पार्टी की संपत्तियों की वास्तविक स्थिति की जानकारी भी मांगी है। जिन जिलों में भवन किराए पर दिए गए हैं, उसकी पहले से जमा सिक्युरिटी लौटाकर भवन को खाली कराया जाए। आने वाले 2 माह के अंदर सभी दुकान किरायेदारों से हट जाएंगी। वहीं 2025-26 में खरीदी गई चल/अचल संपत्ति की खरीद की जानकारी बिल समेत मांगी गई है। सभी बैंक खातों का स्टेटमेंट भी लिया जाएगा। कहा गया है कि जिलों में पार्टी का कोई भी बचत खाता नहीं होना चाहिए। जिन जिलों में पार्टी की खुद की संपत्ति हो गई है, वहां जमीन/भवन रजिस्ट्री के मूल दस्तावेज (रजिस्ट्री की कॉपी) चाही गई है। फोटोकॉपी जिलों में रहेगी। यानि जिलों में पूरी संपत्ति पर प्रदेश स्तर से निगरानी रहेगी। भवन का अभी तक का नगर निगम कर एवं लीज रेंट भी जमा कराना होगा।

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