पोषण आहार घोटाले में दोषियों पर क्या की गई कार्रवाई?

  • लोकलेखा समिति का कड़ा रूख…महिला एवं बाल विकास विभाग से मांगा विवरण
  • गौरव चौहान
पोषण आहार घोटाले

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट के बाद सुर्खियों में आए पोषण आहार घोटाले पर अब विधानसभा ने कड़ा रूख अपनाया है। मप्र विधानसभा की लोकलेखा समिति (पीएजी) ने महिला बाल विकास विभाग में हुए पूरक पोषण आहार घोटाले में लिप्त अधिकारियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का विवरण मांगा है। गौरतलब है कि बच्चों के पोषण आहार में हुए घोटाले का खुलासा होने के बाद प्रदेश में हडक़ंप मच गया था। तब सरकार ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही थी।
गौरतलब है कि सीएजी की आडिट रिपोर्ट (2018-2021) में पूरक पोषण आहार के उत्पादन और परिवहन में कई गड़बडिय़ों का खुलासा हुआ था। परिवहन के लिए उपयोग किए गए वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर की जांच में पाया गया कि कई नंबर ट्रकों के बजाय मोटरसाइकिल, कार और आटो-रिक्शा के थे। पोषण आहार बनाने वाले प्लांटों ने भी अपनी स्वीकृत क्षमता से कहीं अधिक राशन उत्पादन और पैकेजिंग का रिकार्ड दिखाया। रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने स्कूल न जाने वाली हजारों किशोरियों को राशन बांटने का दावा किया, जबकि जमीनी हकीकत में उनकी संख्या बहुत कम पाई गई थी। अब लोक लेखा समिति ने पूछा है कि जिन अधिकारियों ने गड़बड़ी की, उनसे अब तक कितनी वसूली की गई है। दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। समिति ने कहा कि पहले कई बार इस बारे में पूछा गया भी लेकिन जवाब नहीं मिला है।
428 करोड़ का घोटाला
कैग की रिपोर्ट के अनुसार 428 करोड़ रुपये का पूरक पोषण आहार घोटाला सामने आया था। अब इस मामले में मप्र विधानसभा की लोकलेखा समिति ने महिला बाल विकास विभाग में हुए पूरक पोषण आहार घोटाले में लिप्त अधिकारियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का विवरण मांगा है। मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय की लोक लेखा समिति ने महिला एवं बाल विकास विभाग को पत्र लिखा है कि विभाग के साथ लगातार पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन अभी तक वांछित जानकारी अप्राप्त है। जानकारी न मिलने के कारण विधानसभा समिति की आगामी कार्रवाई में अत्यधिक विलंब हो रहा है, इसे सचिवालय ने गंभीरता से लिया है। सीएजी की रिपोर्ट में कई आपत्तियां उठाई गई हैं। 2018 से 2021 के बीच टेक होम राशन योजना में अनियमितता की भरमार रही है। छह उत्पादन संयंत्रों (बाडी, धार, मंडला, रीवा, सागर और शिवपुरी) ने 26.94 करोड़ रुपये का राशन परिवहन दिखाया, लेकिन जांच में वाहन नंबर मोटरसाइकिल और आटो के निकले। 62.53 करोड़ रुपये का राशन कागजों पर तो निकला, लेकिन आंगनवाड़ी केंद्रों तक कभी पहुंचा ही नहीं। विभाग ने दावा किया कि उन्होंने 29,000 ऐसी किशोरियों को राशन बांटा, जो स्कूल नहीं जाती जबकि भौतिक सत्यापन में 49 केंद्रों पर ऐसी सिर्फ तीन लड़कियां ही मिली। करीब 237 करोड़ रुपये मूल्य के राशन के नमूने पोषण मानकों पर खरे नहीं उतरे।
बिंदुवार जानकारी 15 दिन के भीतर मांगी
विधानसभा की लोकलेखा समिति ने महिला एवं बाल विकास विभाग से कई जानकारियां मांगी है। उनमें 21 परियोजना कार्यालयों में 395 अपात्र बालिकाओं को पंचायत स्तरीय प्रशिक्षण दिए जाने का मामला सामने आया है। सचिवालय ने पूछा है कि इस अनियमितता में शामिल तत्कालीन अमले के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई है। योजना के प्रारंभ से ही सर्वेक्षण डाटा रजिस्टर संधारित न करने के लिए दोषियों का उत्तरदायित्व निर्धारण करने की स्थिति स्पष्ट करने को कहा। पूरक पोषण आहार के परिवहन में हुए अनियमित भुगतान के दोषियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है। जिलों से वसूली जाने वाली राशि और उसे शासकीय खजाने में जमा कराने के दस्तावेजी प्रमाण मांगे गए हैं। प्रदेश में 161 निर्माणाधीन और 10 अप्रारंभआंगनबाड़ी केंद्रों की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं। शेष लंबित शौचालयों के निर्माण की अद्यतन स्थिति और पोषण आहार की आपूर्ति न करने वाले स्व-सहायता समूहों पर हुई कार्रवाई का ब्योरा भी मांगा गया है। विधानसभा सचिवालय ने विभाग को अंतिम चेतावनी देते हुए निर्देशित किया है कि इन सभी बिदुओं पर बिंदुवार जानकारी 15 दिन के भीतर अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए।
भारी मात्रा में मिला था पोषण आहार का अवैध भंडार
मार्च 2026 में जबलपुर और धार जैसे जिलों में छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में पोषण आहार का अवैध भंडार मिला था। जबलपुर में एक निजी परिसर से 138 बोरी आहार जब्त किया गया, जिसे आंगनबाडिय़ों तक पहुंचने के बजाय कालाबाजारी के लिए जमा किया गया था। जबलपुर धार के हालिया मामलों में विभाग ने पुलिस के साथ मिलकर गोदामों पर छापेमारी की, अवैध सामग्री जब्त की और दोषियों के खिलाफ मामले दर्ज कराए हैं। लोकलेखा समिति के अध्यक्ष भंवर सिंह शेखावत का कहना है कि दो तीन प्रतिवेदन ऐसे हैं जिनकी आडिट रिपोर्ट की जानकारी बार – बार मांगने के बाद भी विभाग दें नहीं रहे हैं। इसमें बड़ा घोटाला हुआ है, जो अधिकारी इसमें शामिल है उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जानी चाहिए। विभाग अगर जानकारी नहीं देते हैं तो हम विधानसभा को लिख रहे हैं कि विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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