भोजशाला विवाद: मंदिर ढहाने से नहीं बदलता उसका स्वरूप, हाईकोर्ट में हिंदू पक्ष की दलील

  • मुस्लिम पक्ष ने अपना दावा पेश किया…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद को लेकर उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने एक महत्वपूर्ण तर्क रखा है। उनका कहना है कि किसी मंदिर को ध्वस्त कर देने से उसका धार्मिक और कानूनी स्वरूप समाप्त नहीं होता। ऐसे में उस स्थान पर श्रद्धालुओं को पूजा का अधिकार बना रहता है। धार की भोजशाला को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। हिंदू समुदाय इसे वाग्देवी यानी देवी सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे 11वीं सदी की कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह पूरा परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षण में है और इसके धार्मिक स्वरूप को लेकर अलग अलग दावे किए जाते रहे हैं।
हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ इस मामले में दाखिल चार याचिकाओं और एक रिट अपील पर नियमित सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ के सामने विस्तृत दलीलें पेश कीं।
राजा भोज और खिलजी काल का हवाला
दलील में कहा गया कि इस मंदिर का निर्माण परमार वंश के राजा भोज ने वर्ष 1034 में कराया था। बाद में 1305 में अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में इसे ध्वस्त कर दिया गया। हिंदू पक्ष का कहना है कि ऐतिहासिक घटनाओं के बावजूद मंदिर का मूल स्वरूप और उसकी पवित्रता समाप्त नहीं होती। वकील ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है। उन्होंने तर्क दिया कि आक्रमणों के दौरान हिंदू देवी देवताओं और उनके भक्तों के अधिकार प्रभावित हुए थे, लेकिन 1950 में संविधान लागू होने के बाद ये अधिकार फिर से बहाल हो गए।
 ‘मंदिर पहले से मौजूद था – हिंदू पक्ष: हिंदू पक्ष ने अदालत में दावा किया कि ऐतिहासिक रिकॉर्ड और वैज्ञानिक साक्ष्यों के अनुसार भोजशाला स्थल पर पहले सरस्वती मंदिर मौजूद था। उनका कहना है कि इस आधार पर वहां केवल हिंदुओं को ही पूजा अर्चना का अधिकार मिलना चाहिए। हिंदू पक्ष ने यह भी कहा कि पूजा के लिए हमेशा मूर्ति का होना आवश्यक नहीं है। उन्होंने गंगा, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों और चित्रकूट के कामदगिरि पर्वत की पूजा का उदाहरण देते हुए बताया कि आस्था स्थान से जुड़ी होती है, न कि केवल मूर्ति से।

Related Articles