व्यवस्थित तरीके से होगा ईरान में सत्ता परिवर्तन: रजा पहलवी

वॉशिंगटन। ईरान के निर्वासित राजकुमार रजा पहलवी ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान के मौजूदा शासन को पूरी तरह से खत्म करना होगा। उनके अनुसार, सत्ता का यह बदलाव बहुत ही व्यवस्थित तरीके से होगा। पहलवी ने यह बात अमेरिका के टेक्सास में आयोजित ‘कंजर्वेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस’ के दौरान कही है। पहलवी ने ईरान के शासन को कमजोर करने के लिए अमेरिकी सैन्य अभियानों की जमकर तारीफ की। उन्होंने ‘मिडनाइट हैमर’ और ‘एपिक फ्यूरी’ जैसे अभियानों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इन हमलों की वजह से ईरान की सत्ता पर काबिज लोग बहुत कमजोर हो गए हैं। पहलवी के मुताबिक, इन सैन्य कार्रवाइयों में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और उनके कई करीबी साथी मारे गए हैं। इसके अलावा, ईरान की 80 प्रतिशत से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलों का भंडार और परमाणु ठिकाने भी नष्ट हो गए हैं।

उन्होंने इन कार्रवाइयों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी सेना का आभार जताया। पहलवी ने कहा कि ट्रंप के मजबूत इरादों और अमेरिकी सैनिकों की बहादुरी ने लाखों ईरानियों को एक मौका दिया है। अब वे दशकों से चले आ रहे दमन और अस्थिरता को खत्म करने के लिए लड़ सकते हैं। पहलवी ने चेतावनी दी कि अगर मौजूदा शासन का थोड़ा भी हिस्सा बचा रह गया, तो खतरा कभी खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जो लोग 47 साल से अराजकता फैला रहे हैं, उन पर शांति या सुधार के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, आतंकवादी कभी शांति नहीं ला सकते। अगर उन्हें सत्ता में रहने दिया गया, तो वे केवल और ज्यादा तबाही और अस्थिरता ही लाएंगे।

भविष्य की योजना के बारे में बताते हुए पहलवी ने कहा कि वह देश के भीतर और बाहर रहने वाले ईरानियों की मांग पर लोकतांत्रिक बदलाव का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। उनकी टीम ने ‘ईरान प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट’ (IPP) नाम से एक विस्तृत योजना तैयार की है। यह योजना शासन गिरने के बाद के पहले 100 दिनों और देश के लंबे समय तक पुनर्निर्माण के लिए एक रोडमैप की तरह काम करेगी। उन्होंने अमेरिका से अपील की कि वह अपना समर्थन जारी रखे। उन्होंने वाशिंगटन से कहा कि वे इस गिरते हुए शासन को कोई जीवनदान न दें। अमेरिका को चाहिए कि वह ईरानी लोगों के लिए रास्ता साफ करे ताकि वे अपना काम पूरा कर सकें। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव बहुत ज्यादा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बना हुआ है।

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