
प्रधानमंत्री की नीतियों से नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल और डीजल के दाम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने खाड़ी युद्ध के बीच उपभोक्ताओं के हितों का ध्यान रखते हुए एक बड़ा निर्णय लिया है। पेट्रोल-डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कटौती स्वागत योग्य कदम है। मुख्यमंत्री ने मीडिया के लिए जारी संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ेंगे। भारतीय बाजार में तेल की उपलब्धता पर्याप्त रहेगी, उपभोक्ताओं पर भी तेल कीमतों का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और देश की तेल रिफायनरियां अपना काम सरलता से करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी के बीच रामनवमी के दिन इस जनहितैषी निर्णय के लिए प्रधानमंत्री बधाई के पात्र हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। भारत की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और कच्चे तेल का भंडार भी पर्याप्त है। जिससे सप्लाई में कोई रुकावट नहीं है। प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अन्तर्गत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए निरंतर कार्रवाई की जा रही है। किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और आवश्यकता अनुसार ही पेट्रोल, डीजल क्रय करें। किसी प्रकार का संग्रह न करें।
आईएएस रवि कुमार सिहाग का कैडर बदला
मप्र के जिला सिवनी स्थित लखनादौन में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के पद पर पदस्थ वर्ष 2022 के आईएएस अधिकारी रवि कुमार सिहाग का कैडर बदल गया है। उन्होंने एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम एवं सभी यूनियन टेरेटेरी राज्य) कैडर की 2022 बैच की आईएएस अधिकारी इशिता राठी से विवाह किया है। इसी आधार पर अब सिहाग का कैडर मप्र के स्थान पर एजीएमयूटी कैडर कर दिया गया है, जिससे दोनों एक ही स्थान पर पदस्थ रहें। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर दिया है।
कर्मचारियों को 20 लाख रुपए तक मिलेगा कैशलेस इलाज
मप्र में कर्मचारियों-पेंशनरों की स्वास्थ्य बीमा योजना की मांग जल्द सरकार पूरी करने जा रही है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कैशलेस स्वास्थ्य बीमा का जो प्रस्ताव तैयार किया है, उसे कुछ संशोधन के निर्देश के साथ मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता वाली वरिष्ठ सचिव समिति की स्वीकृति मिल गई है। अब इसे अंतिम निर्णय के लिए कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। इसमें 20 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा रहेगा। पहले यह 35 लाख रुपए प्रस्तावित था। बीमा के लिए कर्मचारियों से मूल वेतन का एक प्रतिशत और पेंशनरों से चार प्रतिशत अंशदान (प्रीमियम) प्रतिमाह लिया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार योजना के दायरे में प्रदेश के 11 लाख से अधिक कर्मचारी और पेंशनर आएंगे। राजस्थान और हरियाणा की तर्ज पर मप्र सरकार यह स्वास्थ्य बीमा योजना ला रही है। इसमें हितग्राही का फोटोयुक्त यूनिक आईडी डिजिटल कार्ड बनाया जाएगा।
सरकार ने 2500 करोड़ का साल का अंतिम कर्ज लिया
मप्र सरकार ने रामनवमी के अवसर पर 2500 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है। यह कर्ज दो हिस्सों में लिया गया है, जिसमें पहला कर्ज 1500 करोड़ रुपए का है, जिसे 14 साल बाद चुकाया जाएगा, जबकि दूसरा कर्ज एक हजार करोड़ रुपए का है, जो 24 साल बाद अदा किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह सरकार का आखिरी कर्ज था। चालू वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब सिर्फ चार दिन बचे हैं। राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक बाजार से करीब 87 हजार 600 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है। इस कर्ज के साथ ही मप्र सरकार पर कुल कर्ज की राशि करीब 5.10 लाख करोड़ से ज्यादा हो गई है। मप्र सरकार ने विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4.38 लाख करोड़ का बजट पेश किया था। चालू वित्तीय वर्ष में मप्र सरकार ने सबसे पहले मई, 2025 में ढाई-ढाई हजार करोड़ रुपए के दो अलग-अलग कर्ज लिए थे।
