बिच्छू राउंडअप/संघ प्रमुख बोले- युद्ध स्वार्थ का नतीजा, दुनिया को संघर्ष नहीं चाहिए सद्भाव

संघ प्रमुख बोले- युद्ध स्वार्थ का नतीजा, दुनिया को संघर्ष नहीं चाहिए सद्भाव
आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने दुनिया में बढ़ते तनाव को लेकर नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि आखिर क्यों दुनिया में शांति नहीं हो पा रही है। भागवत ने स्वार्थ और दूसरों पर काबू पाने की इच्छा को इन विवादों की जड़ बताया। उन्होंने कहा कि जब तक लोग अपनी सोच नहीं बदलेंगे, तब तक शांति संभव नहीं है। भारत के प्राचीन ज्ञान को उन्होंने दुनिया की समस्याओं का समाधान बताया। उनका कहना है कि पूरी दुनिया को एक परिवार की तरह देखना ही सुख का रास्ता है। संघ प्रमुख शुक्रवार को नागपुर में विश्व हिंदू परिषद के नए दफ्तर के भूमि पूजन समारोह में बोल रहे थे। भागवत ने कहा कि पिछले दो हजार वर्षों से दुनिया में शांति के लिए कई प्रयोग किए गए। लेकिन इनमें से कोई भी पूरी तरह सफल नहीं हुआ। आज भी धार्मिक कट्टरता और जबरन धर्म परिवर्तन जैसी समस्याएं मौजूद हैं। लोग खुद को दूसरों से बड़ा और दूसरों को छोटा समझते हैं। यही वजह है कि दुनिया में लगातार संघर्ष और विवाद बने हुए हैं।  संघ प्रमुख ने कहा कि शांति केवल बातों से नहीं आएगी। इसके लिए एकता, अनुशासन और धर्म के रास्ते पर चलना होगा। धर्म केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे लोगों के व्यवहार और आचरण में दिखना चाहिए। अनुशासन और नैतिक मूल्यों का पालन करने के लिए मेहनत और त्याग की जरूरत होती है। जब तक समाज में अनुशासन नहीं होगा, तब तक हम एक बेहतर दुनिया की कल्पना नहीं कर सकते।
मांग: महाराष्ट्र में भी यूसीसी कानून लागू करेगी सरकार
उत्तराखंड के बाद गुजरात में हाल ही यूसीसी कानून के विधेयक पेश हुआ। गोवा में भी कुछ इस तरह का कानून पहले से ही है। इस कड़ी में अब महाराष्ट्र का नाम भी जुड़ गया है। अब महाराष्ट्र में भी यूसीसी जैसे कानून की मांग उठ रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि वह समान नागरिक संहिता के संबंध में हितधारकों के साथ परामर्श कर रही है। यह कदम भाजपा के एक एमएलसी की और से राज्य विधानसभा में उत्तराखंड के समान एक कानून की मांग के बाद उठाया गया है। यह कानून सभी धर्मों के नागरिकों के लिए समान कानूनों को बढ़ावा देता है। भाजपा के परिणय फुके ने विधान परिषद में यह मुद्दा उठाया। संयोग से उसी दिन गुजरात में भाजपा सरकार ने भी राज्य में यूसीसी लाने के लिए एक विधेयक पेश किया। हालांकि, परिषद को सूचित किया गया कि सरकार को फुके के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देने के लिए अधिक समय की जरूरत होगी, क्योंकि वह विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श कर रही है।
सरकार की पैनी नजर: छह भारतीयों की मौत, तीन लाख की वतन वापसी
पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने अहम जानकारी साझा की है। मंत्रालय के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में चल रहे तनाव में अब तक छह भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है, जबकि एक भारतीय अभी भी लापता है। सरकार लापता नागरिक की तलाश और मृतकों के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास कर रही है। विदेश मंत्रालय ने अब तक 3 लाख लोगों की वतन वापसी कराई है। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव असीम आर महाजन ने बताया कि सऊदी अरब, ओमान, इराक और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित भारतीय मिशन स्थानीय अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में हैं। सरकार का पूरा जोर इस वक्त उन परिवारों को राहत पहुंचाने पर है। लापता भारतीय की सुरक्षित बरामदगी के लिए भी स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ सर्च ऑपरेशन तेज कर दिए गए हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के पांच प्रभावशाली देशों के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर बात कर भारत का रुख स्पष्ट किया है।
एनआईए कोर्ट ने तहव्वुर राणा पर पूरक आरोपपत्र मांगा
पटियाला हाउस स्थित विशेष एनआईए अदालत ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े बड़े साजिश मामले में एनआईए को आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल करने की प्रक्रिया तेज करने को कहा है। कोर्ट ने एनआईए को मई 2026 तक हर हाल में आरोपपत्र दाखिल करने के प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। केस की अगली सुनवाई 24 अप्रैल को तय की गई है। सुनवाई के दौरान एनआईए ने दलील दी कि राणा के आवाज के नमूने ले लिए गए हैं, जो जांच में जुटाए गए सबूतों की पुष्टि करने में अहम भूमिका निभाएंगे। एजेंसी के मुताबिक, ये साक्ष्य 26/11 हमले की साजिश की कडिय़ों को जोडऩे में मदद कर सकते हैं।

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