
उज्जैन-जावरा हाईवे प्रभावित 62 गांवों के किसान सीएम हाउस पहुंचे
उज्जैन-जावरा न्यू फोरलेन हाईवे से प्रभावित 62 गांवों के 400 किसान शनिवार रात भोपाल पहुंचे और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलकर जमीन का बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा तय करने की मांग की। किसानों ने उज्जैन-इंदौर मार्ग के प्रभावितों को मिले मुआवजे का फार्मूला लागू करने की बात रखी। किसान प्रतिनिधि दिनेश पटेल ने कहा कि मौजूदा गाइडलाइन में जमीन की कीमत 2 से 4 लाख रुपए बीघा तय हो रही है, जो बाजार दर से करीब 10 गुना कम है। मुख्यमंत्री ने किसानों को उचित मुआवजा दिलाने का भरोसा दिया। किसान मुकेश धानक, देवीलाल पाटीदार, संजय शर्मा, संजय धाकड़, बद्रीलाल पाटीदार, कान्हा धाकड़ और दीपक ने कहा कि अफसर उज्जैन-जावरा रोड प्रभावितों के साथ अलग रवैया अपना रहे हैं। उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड प्रभावितों जैसा मुआवजा उन्हें नहीं मिल रहा। किसानों ने सही मुआवजा नहीं मिलने पर फिर आंदोलन की चेतावनी दी।
आबकारी लक्ष्य 5 साल में दोगुना हुआ, अब 16 दिन में पूरा करना होगा टारगेट
बीते 5 सालों में आबकारी विभाग का लक्ष्य बढ़ता हुआ दोगुना हो चुका है। साल 2021-22 में जहां आबकारी लक्ष्य 10 हजार 840 करोड़ था, 2026-27 के लिए ये बढक़र 19 हजार 952 करोड़ यानि लगभग दोगुना हो गया है। हालांकि इस बार शराब दुकानों की नीलामी करके लक्ष्य को हासिल करने के लिए अब 16 दिन का ही समय बचा है। अब तक 435 समूहों की नीलामी से 8 हजार 919 करोड़ का राजस्व ही तय हो सका है। बीते कई सालों की तरह इस साल भी आबकारी नीति में कोई नई शराब दुकान खोलने का प्रावधान नहीं रहा है। साल 2024 -25 में कंपोजिट (देसी-विदेशी) दुकानों की संख्या 3600 रही थी, साल 2025-26 में ये घटकर 3523 रह गई है, मुख्य वजह है कि 1 अप्रैल 2025 से उज्जैन, ओंकारेश्वर और महेश्वर सहित 19 पवित्र नगरों में शराब बंद है। बीते साल आबकारी विभाग ने 3553 दुकानों की नीलामी से 16 हजार 648 करोड़ का लक्ष्य हासिल किया था।
ब्राह्मण संसद में चेतावनी- यूजीसी नियम वापस लो, नहीं तो मोदी रोल बैक
यूजीसी विनियम-2026 के विरोध में रविवार को राजधानी में ब्राह्मण संसद एवं सर्व समाज सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में वक्ताओं ने यूजीसी नियमों को पक्षपातपूर्ण बताते हुए सरकार से इन्हें वापस लेने की मांग की। मुख्य अतिथि आनंद स्वरूप महाराज ने कहा कि या तो यूजीसी रोल बैक होगा या नरेंद्र मोदी रोल बैक होगा। उन्होंने आरक्षण व्यवस्था और एट्रोसिटी एक्ट पर भी पुनर्विचार की मांग करते हुए आंदोलन जारी रखने की बात कही। सपाक्स के राष्ट्रीय संयोजक डॉ हीरालाल त्रिवेदी ने कहा कि 2018 में भी इसी मैदान से पदोन्नति में आरक्षण खत्म करने का संकल्प लिया गया था, और यूजीसी विनियम-2026 ने फिर समाज को आंदोलन के लिए मजबूर किया है।
मप्र में 49 खस्ताहाल पुलों के गर्डर उठाकर बदले जाएंगे बियरिंग
मप्र में पुअर और वेरी पुअर कंडीशन के 49 ब्रिजों को नया स्वरूप देने की कवायद शुरू हो गई है। लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत आने वाले इन पुलों को पहली बार 70 टन के गर्डर को उठाकर नीचे बियरिंग बदले जाएंगे। दावा किया जा रहा है कि इससे ब्रिज की लाइफ करीब 25 साल बढ़ जाएगी। हालांकि पहले भी एक बार विदिशा में इस तरह का प्रयास हुआ था, लेकिन तब हादसा होने के कारण इसे रोक दिया गया। अब एक फिर सरकार ने इस तरीके को मंजूरी दी है। इस बार इस काम को करने वाली कंपनियों के लिए एक शर्त जोड़ दी गई है कि जिस कंपनी ने पूर्व में ऐसा काम किया हो और 15 मीटर के कम से कम 4 स्पॉन लिफ्ट किए हो, उनको ही काम दिया जाएगा। टेंडर हो चुके हैं और मार्च अंत तक ओपन करके काम शुरू कर दिया जाएगा। कई पुल 50-60 साल पुराने हो चुके हैं, जो तकनीकी रूप से अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं।
