- मप्र की 3 सीटों के लिए दावेदारों ने बढ़ाई सक्रियता

गौरव चौहान
मप्र में राज्यसभा की 3 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में उम्मीदवारों को लेकर दावेदारों ने सक्रियता बढ़ा दी है, जिससे सूबे का सियासी गणित रोचक हो गया है। इनमें भाजपा के खाते की दो सीटें और कांग्रेस की एक सीट है। ऐसे में राज्यसभा में जाने के लिए नेताओं ने चौसर बिछानी शुरू कर दी है। इस कारण मप्र में आने वाले तीन महीने राजनीतिक तौर पर सरगर्मी भरे होंगे।सूत्रों की मानें तो राज्यसभा के लिए इस बार नाम तय कर पाना सत्ताधारी भाजपा व कांग्रेस के लिए मुश्किल भरा हो सकता है, क्योंकि इन तीनों के लिए कई अनजाने चेहरों ने भी राज्यसभा जाने के लिए अपनी दावेदारी जतानी शुरू कर दी है। गौरतलब है कि मप्र में राज्यसभा की 11 सीटें हैं। इसमें मौजूदा समय में 9 पर भाजपा का कई वर्षों से कब्जा है, जबकि 3 सीटों पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हैं।
मप्र में राज्यसभा की तीन सीटें जून में खाली हो रहीं हैं। दो सीटों पर भाजपा के डॉ.सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन सांसद हैं। कांग्रेस की सीट से दिग्विजय सिंह सांसद हैं। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह राज्यसभा जाने को लेकर इनकार कर चुके हैं। हालांकि इन सीटों पर जून माह में चुनाव होने हैं पर दावेदारों ने अपने राजनीतिक गणित अभी से फिट करने शुरू कर दिए हैं। भाजपा के कई सीनियर नेता उच्च सदन में जाने के लिए अभी से प्रयास कर रहे हैं तो कांग्रेस में भी आधा दर्जन नेताओं के नाम सियासी गलियारों में तैर रहे हैं। राज्यसभा सदस्य जी कुरियन, सुमेर सिंह सोलंकी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कार्यकाल 22 जून को समाप्त हो रहा है। इनमें दिग्विजय सिंह और सुमेर सिंह सोलंकी 2020 में तो कुरियन ज्योतिरादित्य सिंधिया के लोकसभा में चुने जाने के बाद राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिए जाने के बाद हुए उपचुनाव में प्रदेश से उच्च सदन गए थे।
भाजपा में कई दावेदार
गौरतलब है कि राज्यसभा एक स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता लेकिन इसके एक तिहाई सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत्त होते हैं। प्रदेश से राज्यसभा के लिए कुल 11 सांसद निर्वाचित होते हैं। अप्रत्यक्ष प्रणाली से होने वाले इन चुनावों में विधायक मतदान करते हैं। इससे पहले 3 अप्रैल 2024 में प्रदेश की पांच सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव हुए थे। इसमें भाजपा से केंद्रीय राज्यमंत्री एल मुरूगन, उमेशनाथ, माया नारोलिया और बंशीलाल गुर्जर राज्यसभा गए थे वहीं कांग्रेस से अशोक सिंह को उच्च सदन जाने का मौका मिला था। इस मामले में भाजपा ने फिलहाल मौन साध रखा है। पार्टी के एक सीनियर लीडर ने कहा कि आने वाले समय में इस संबंध में उचित निर्णय पार्टी का नेतृत्व लेगा। वहीं सूत्रों की माने तो जी कुरियन को पार्टी फिर से मौका दे सकती है। वे इस समय केन्द्र सरकार में मंत्री है। एल मुरूगन को भी मंत्री होने के कारण प्रदेश के कोटे से राज्यसभा भेजा गया था। जहां तक सुमेर सिंह सोलंकी का सवाल है वे प्रदेश भाजपा के महामंत्री हैं। कुछ समय पूर्व ही उन्हें हेमंत खंडेलवाल ने अपनी नई टीम में शामिल किया है। वे पार्टी के आदिवासी चेहरे हैं। ऐसे में उन्हें रिपीट भी किया जा सकता है। इसके अलावा पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, जयभान सिंह पवैया, लाल सिंह आर्य जैसे नेताओं के नाम भी दीनदयाल परिसर में लिए जा रहे हैं।
कांग्रेस में घमासान
वही कांग्रेस में नया चेहरा आना तय माना जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह हाल में कह चुके हैं कि वे राज्यसभा में फिर से जाने के इच्छुक नहीं है। कांग्रेस में राज्यसभा के लिए नेताओं में अभी से घमासान नजर आ रहा है। कई नेता घोषित तौर पर दावेदारी कर चुके हैं। गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह पिछले दो बार से लगातार उच्च सदन जा रहे है। दिग्विजय सिंह अगर राज्यसभा में नहीं जाते हैं तो कांग्रेस में आधा दर्जन दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का है। पार्टी उन्हें राज्यसभा में लाकर दिल्ली में सक्रिय कर सकती है। इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरूण यादव, पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन के नाम भी चल रहे हैं। पार्टी अगर किसी अनुसूचित जाति के नेता को टिकट देती है तो पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा और प्रदीप अहिरवार को भी मौका मिल सकता है।
