
ईरान हमले में घायल अमेरिकी सैनिक की मौत, ट्रंप और यूएई राष्ट्रपति के बीच चर्चा
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-प्रतिदिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इजरायल के भीषण हमलों से दहक रहा ईरान भी जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब दसवें दिन में प्रवेश कर चुका है। पूरा क्षेत्र तनाव की चपेट में है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का युद्ध को लेकर सख्त रवैया और खाड़ी देशों में बढ़ता संघर्ष, वैश्विक राजनीति के लिया बड़ा संकट साबित होता दिख रहा है। भारत ने कहा है कि तेजी से बदलती परिस्थितियों पर सरकार की पैनी नजर है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि पश्चिम एशिया में ईरान के शुरुआती हमलों में घायल एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई है। यह सैनिक एक मार्च को सऊदी अरब में अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमले में गंभीर रूप से घायल हुआ था। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या अब सात हो गई है। बहरीन में कथित ईरानी ड्रोन हमले के बाद हालात चिंताजनक बताए जा रहे हैं। देश के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस हमले में कुल 32 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से चार की स्थिति बेहद गंभीर है। बहरीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी ने स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से बताया कि गंभीर रूप से घायल लोगों में बच्चे भी शामिल हैं।
मोजतबा खामेनेई चुने गए ईरान के नए सुप्रीम लीडर, ईरानी सरकार ने किया ऐलान
ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को उनका उत्तराधिकारी घोषित किया गया है। ईरानी सरकारी टीवी ने सोमवार तडक़े इसकी घोषणा की। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद शुरू हुआ युद्ध अब एक नाटकीय मोड़ पर पहुंच गया है। मोजतबा खामेनेई को लंबे समय से इस पद का संभावित दावेदार माना जा रहा था। उल्लेखनीय है कि मोजतबा ने इससे पहले कभी भी किसी सरकारी पद के लिए चुनाव नहीं लड़ा और न ही उन्हें किसी पद पर नियुक्त किया गया था। ईरान की 88 सदस्यीय धार्मिक विशेषज्ञ सभा ने मोजतबा को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना। ईरान की धार्मिक विद्वान सभा, धार्मिक विद्वानों का समूह है, जो सर्वोच्च नेता का चयन करता है। सरकारी टीवी ने एक बयान पढक़र सुनाया जिसमें कहा गया कि उन्हें मजबूत समर्थन के आधार पर चुना गया है और देशवासियों से उनके पीछे एकजुट होने की अपील की गई। साथ ही तेहरान के सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के जश्न मनाने के दृश्य भी दिखाए गए। मोजतबा खामेनेई को अमेरिका के विरोध का सामना करना पड़ेगा।
गर्मी के तेवर हुए तीखे, पहाड़ो पर छाई धूप, उत्तर में 35 डिग्री के पार पहुंचा पारा
देश के कई हिस्सों में मार्च की शुरुआत के साथ ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। उत्तर भारत के कई शहरों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। मैदानी इलाकों में राजस्थान के झुंझुनूं जिले के पिलानी में सबसे अधिक 40.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार राजस्थान, दक्षिण हरियाणा, दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य भारत और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। वहीं देश के अधिकतर अन्य हिस्सों में अधिकतम तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से काफी अधिक चल रहा है। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में भी गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ इलाकों में तापमान सामान्य से 5 से 8 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया।
भारत ने बदली आयात रणनीति, अफ्रीका समेत इन देशों से बढ़ाई कच्चे तेल की खरीद
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर बढ़ते खतरे के बीच भारत ने अपनी तेल आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने अब अमेरिका, लैटिन अमेरिका, रूस और पश्चिम अफ्रीका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। इसका उद्देश्य देश में ईंधन की आपूर्ति को स्थिर रखना और किसी संभावित संकट से बचाव करना है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के अनुसार भारतीय रिफाइनरियों ने अपनी खरीद रणनीति में बदलाव किया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचपीसीएल और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड जैसी कंपनियों ने पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और लैटिन अमेरिका के साथ-साथ रूस से भी अतिरिक्त कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया है। अमेरिका की ओर से रूसी तेल के लिए दी गई 30 दिन की अस्थायी छूट ने भी भारत के लिए तेल आयात का एक नया रास्ता खोल दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार भारत अब ऐसे क्षेत्रों से अधिक तेल खरीद रहा है जो मौजूदा संघर्ष के दायरे से बाहर हैं। इसका असर यह हुआ कि गैर-होर्मुज स्रोतों से आने वाले तेल की हिस्सेदारी बढक़र करीब 70 प्रतिशत हो गई है।
