राइस मिलर और अधिकारियों पर प्रकरण दर्ज

राइस मिलर और अधिकारियों
  • धान घोटाला में  ईओडब्ल्यू जबलपुर की कार्रवाई

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। धान घोटाले के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) जबलपुर ने बालाघाट के एक राइस मिल के प्रोपराइटर व संचालक सहित विपणन संघ और मध्य प्रदेश राज्य आपूर्ति निगम के आधा दर्जन अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। कस्टम मिलिंग के नाम पर भ्रष्टाचार कर शासन को 2 करोड़ 79 लाख रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने का आरोप है।
    ईओडब्ल्यू जबलपुर के पुलिस अधीक्षक अनिल विश्वकर्मा के अनुसार शिकायत मिली थी कि बालाघाट जिले में विपणन संघ और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों ने कस्टम मिलिंग के नाम पर धोखाधड़ी की है। जांच में पाया गया कि 2 अप्रैल 2024 को सचदेवा राइस मिल, कोसमी (बालाघाट) से अवैध रूप से दो ट्रक धान महाराष्ट्र ले जाते समय अंतरराज्यीय इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट रजेगांव पर रोके गए थे। ओवरलोडिंग पाए जाने पर 12 हजार रुपये का जुर्माना किया गया। सूचना पर मार्कफेड के उप प्रबंधक अभिषेक निषाद मौके पर पहुंचे। परसवाड़ा कैप से धान लोड कर राइस मिल ले जाने का गेट पास प्रस्तुत किया गया था, लेकिन निर्धारित मार्ग का पालन नहीं करने पर दोनों ट्रकों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
    2.79 करोड़ रुपये का नुकसान
    मामला दिसंबर 2023 से सितंबर 2024 के बीच का है। राइस मिल के प्रोपराइटर प्रकाश सचदेवा तथा संचालक समीर सचदेवा ने मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ से कस्टम मिलिंग का अनुबंध किया था। अनुबंध में मिल की क्षमता 6 मीट्रिक टन प्रति घंटा दर्शाई गई थी, जबकि बिजली बिल कस्टम मिलिंग में उपयोग होने वाली ऊर्जा की तुलना में आधा पाया गया। मार्कफेड से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार उक्त ट्रकों में परसवाड़ा कैप से धान लोड किया जाना सत्यापित नहीं हुआ। आरोप है कि वर्ष 2023-24 में मिल संचालकों ने नान व मार्कफेड अधिकारियों से मिलीभगत कर शासन को 2.79 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। मिलिंद ठाकरे नामक व्यक्ति ने ईओडब्ल्यू में शिकायत कर विपणन संघ और नागरिक आपूर्ति निगम बालाघाट के संबंधित अधिकारियों पर शासकीय धान की मिलिंग में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। जांच में सामने आया कि अधिकारी कर्मचारियों ने सचदेव राइस मिल के संचालकों से षड्यंत्र कर शासन को दो करोड़ 79 लाख रुपये की क्षति पहुंचाई है। जांच में पाया गया कि दो अप्रैल 2024 को सचदेव राइस मिल कोसमी बालाघाट से अवैध रूप से शासकीय धान महाराष्ट्र ले जाते हुए दो ट्रक, परिवहन चेक पोस्ट रजेगांव ओवरलोडिंग के चलते पकड़े गए जिन पर 12 हजार का चालान किया। मार्कफेड बालाघाट के उप प्रबंधक (वित्त) अभिषेक निषाद ने जांच की, पता चला ट्रक सचदेव राइस मिल कोसमी के थे।
     पांच अधिकारियों सहित आठ पर एफआईआर
    शासकीय धान की हेराफेरी, अवैध परिवहन और दस्तावेज छुपाने के आरोप में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने आठ लोगों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज की है। आरोपितों में मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मार्कफेड के बालाघाट जिले के चार और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम का एक अधिकारी और मिलर भी शामिल हैं। इनमें अभिषेक निषाद, तत्कालीन उप प्रबंधक (वित्त), हिरेंद्र सिंह रघुवंशी, उप तत्कालीन जिला विपणन अधिकारी, विवेक तिवारी वर्तमान जिला विपणन अधिकारी, हरीश कोरी प्रबंधक (वित्त), पीयूष माली, तत्कालीन जिला प्रबंधक, दुर्गेश बैस लेखापाल मप्र स्टेट सिविल सप्लाई कारपोरेशन, सचदेव, प्रोप्राइटर और समीर सचदेव, संचालक सचदेव राइस मिल। राइस मिल के अधिकारियों से मार्कफेड बालाघाट के जिला विपणन अधिकारी हिरेन्द्र सिंह रघुवंशी ने मिलिंग के लिए अनुबंध किया था। अनुबंधकर्ताओं ने चार टन प्रति/घंटा क्षमता होते हुए छह दन दिखाई गई। हिरेंद्र सिंह द्वारा अनुबंध के समय न मिल क्षमता का सत्यापन किया, न ही निरीक्षण किया। मिल की स्थापित क्षमता के विरुद्ध अधिक लाट प्रदाय करने की संभावना को बढ़ाने की मंशा से अनुबंध किया गया। जुलाई 2024 से पदस्थ जिला विपणन अधिकारी विवेक तिवारी द्वारा उपरोक्त प्रकार के षड्यंत्र एवं अनियमितता करते हुए मिल की क्षमता चार की जगह छह टन प्रति घंटे दर्शाकर 36 लाट धान का अनुबंध इसी मिल मालिक से किया। उक्त भुगतान को जिला विपणन अधिकारी हिरेन्द्र सिंह, विवेक तिवारी व उप प्रबंधक वित्त हरीश कोरी ने देयको में निर्धारित कटौती, अन्य प्रचलित कर, पेनाल्टी और दस्तावेजों के सत्यापन के बिना ही राइस मिल संचालक को भुगतान की अनुशंसा कर दी। मिलिंग नीति के विरूद्ध जाकर पद का दुरूपयोग करते हुए मिल संचालक को भुगतान किया गया।

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