
- निराश्रित गायों को लेकर सरकार ने विधानसभा में दी जानकारी
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र में ऑस्ट्रेलिया और दुबई की कंपनियां स्वावलम्बी गौशालाएं बनाएंगी। यह जानकारी विधानसभा में सरकार ने दी है। दरअसल, कांग्रेस विधायक अजय सिंह राहुल ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए सरकार का ध्यान आकर्षित किया कि प्रदेश में निराश्रित गोवंश के कारण किसानों की फसलें नष्ट हो रही हैं, नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित हो रहा है और जान-माल की हानि हो रही है। उन्होंने कहा कि रात के समय सड़कों पर गोवंश घूमता है, जिससे किसान टॉर्च लेकर खेतों में पहरा देते रहते हैं। विधायक ने बंद पड़ी गौशालाओं का आंकड़ा बताने और ठोस कदम उठाने की मांग की। इसके जवाब में पशुपालन मंत्री लखन सिंह पटेल ने सदन को बताया कि सरकार निराश्रित पशुओं की समस्या से निपटने के लिए गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नगरीय प्रशासन द्वारा सड़कों पर घूमने वाले घुमंतू पशुओं के मालिकों पर 25 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है।
मंत्री ने बताया कि प्रदेश की गौशालाओं में वर्तमान में 4 लाख से अधिक मवेशी आश्रित हैं। नेशनल हाईवे और प्रमुख सड़कों पर दुर्घटनाओं को कम करने के लिए लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है। हाईवे और स्टेट हाईवे पर पशु एकत्र होने वाली जगहों पर स्वावलंबी गौशालाएं चयनित की गई हैं। ऑस्ट्रेलिया और दुबई की कंपनियों ने भी इन गौशालाओं के लिए टेंडर डाले हैं, जिससे गौशालाएं हाईटेक और आत्मनिर्भर बनेंगी। अगले 2 वर्षों में 10 लाख निराश्रित पशु गौशालाओं में रखे जा सकेंगे। निराश्रित गोवंश को सम्मान के साथ गौशालाओं में रखा जा रहा है और पशुओं से जुड़ी घटनाओं में कमी लाने पर काम जारी है। मंत्री ने जोर दिया कि स्वावलंबी गौशाला योजना देश की पहली ऐसी योजना है, जो गौवंश संरक्षण के साथ-साथ गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है। विधायक अजय सिंह राहुल ने विभागीय मंत्री से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने और किसानों की फसलों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की। इस बहस से प्रदेश में स्ट्रे कैटल समस्या पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है, जहां किसान और आमजन दोनों प्रभावित हैं।
25 जिलों के 29 स्थानों पर भूमि आवंटित
प्रदेश में स्वावलंबी गौशालाओं (कामधेनु निवास) की स्थापना की नीति-2025 लागू की गई है। नीति में न्यूनतम 5000 गौवंश की क्षमता वाली स्वावलंबी गौशाला स्थापना के लिए न्यूनतम 130 एकड़ राजस्व भूमि का प्रावधान किया गया है। जिसमें 5 एकड़ भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो सकेंगी। नीति के तहत 25 जिलों के 29 स्थानों पर भूमि पशुपालन एवं डेयरी विभाग को आवंटित की गई है। जबलपुर, रायसेन, दमोह, सागर, अशोकनगर, खरगोन और रीवा में गौशालाओं के लिए टेंडर हो चुके हैं, जिसका एग्रीमेंट 10 दिन के भीतर कर लिया जाएगा। खास बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया और दुबई से आकर लोगों ने टेंडर डाला है। इन गौशालाओं में 20000, 25000 और 30000 गौवंश एक जगह रखा जाएगा। जल्द ही हम 22 गौशालाओं के टेंडर जारी कर रहे हैं।
