- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सांगठनिक ढांचे में हो सकता है बदलाव

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस ) की स्थापना के 100 साल हो गए हैं। अब संघ अपने सांगठनिक ढांचे में बदलाव पर विचार कर रहा है। संघ में इस तरह के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है। जानकारी के अनुसार, प्रांत प्रचारकों की जगह अब राज्य प्रचारक बनाने का प्रस्ताव है। ये राज्य की इकाई के हिसाब से ही होंगे। जैसे अभी संघ के हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड जैसे राज्यों में तो एक ही प्रांत प्रचारक हैं जो एक तरह से पूरे राज्य के ही प्रचारक हैं। लेकिन जो बड़े राज्य हैं उनमें एक राज्य में ही कई प्रांत प्रचारक हैं। जैसे राजस्थान में 3 प्रांत प्रचारक, यूपी में 6 प्रांत प्रचारक हैं। बदलाव के बाद सभी राज्यों में राज्य प्रचारक होंगे और पूरे यूपी में भी एक राज्य प्रचारक। अभी बड़े राज्यों में कामकाज के हिसाब से ज्यादा प्रांत प्रचारक बनाए गए हैं। जब राज्य प्रचारक हो जाएंगे तो साथ ही संभाग प्रचारक का पद भी बनाया जाएगा, ये एक संभाग यानी कमिश्नरी के प्रचारक होंगे। ये विभाग प्रचारक और राज्य प्रचारक के बीच की इकाई होंगे।
मध्यप्रदेश में भी संघ की व्यवस्था में परिवर्तन होने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत अब मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ अलग-अलग होंगे और प्रांत प्रचारक का पद समाप्त किया जाएगा और इसके स्थान पर संभागीय प्रचारक की नई प्रणाली लागू की जा सकती है। इस बदलाव को संघ की दीर्घकालिक सामाजिक और संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसका मकसद संघ कार्य और प्रभावी बनाना है। सूत्रों के मुताबिक मार्च 2026 में होने वाली संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में बदलाव के प्रस्ताव पर बात होगी और प्रतिनिधि सभा में ही फाइनल फैसला लिया जाएगा। ये प्रतिनिधि सभा हरियाणा के समालखा में होगी।
ढांचे में तीन तरह के बदलाव का प्रस्ताव
सांगठनिक ढांचे में तीन तरह के बदलाव का प्रस्ताव है। अभी संघ ने पूरे देश को काम के लिहाज से 11 क्षेत्रों में बांटा है लेकिन इसे 11 से 9 करने का प्रस्ताव है। अभी संघ के प्रांत प्रचारक राज्य की सरकारी परिभाषा के हिसाब से बने प्रांत के आधार पर नहीं होते हैं, ये भी संघ के कामकाज की सुविधा के हिसाब से बनाए गए हैं। लेकिन अब प्रांत प्रचारकों की जगह राज्य प्रचारक बनाने का प्रस्ताव है। संघ से जुड़े सूत्रों ने बताया कि संघ के काम का विस्तार हो रहा है और उसी हिसाब से संगठन का ढांचा बनाने का प्रस्ताव है। इससे काम का विकेंद्रीकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संघ ने समाज जागरण सहित पंच परिवर्तन का जो काम तय किया है उसे ठीक से संचालित करने के लिए संगठन के ढांचे में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है।
इसी महीने होनी है महत्वपूर्ण बैठक
मप्र में संघ की नई व्यवस्था को लेकर जनवरी के मध्य तक एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी प्रदेश स्तर पर नए स्वरूप पर चर्चा करेंगे। संघ के ढांचे में परिवर्तन नागपुर में बनी कार्ययोजना पर हो रहा है। वर्तमान में मध्यप्रदेश संघ की दृष्टि से तीन प्रांतों-मध्य प्रांत, मालवा प्रांत और महाकौशल प्रांत में विभाजित है, वहीं छत्तीसगढ़ अभी एक प्रांत है, इसकी संगठनात्मक व्यवस्था अब राज्य के रूप में होगी। वहीं मप्र में तीनों प्रांतों में अलग-अलग प्रांत प्रचारक कार्यरत हैं। प्रस्तावित बदलाव के बाद प्रांत प्रचारक का पद समाप्त कर एक प्रदेश प्रचारक का नया पद सृजित किया जाएगा। इसके नीचे संभागीय प्रचारक नियुक्त किए जाएंगे। नई व्यवस्था के अनुसार, संभागीय प्रचारक होंगे, इन्हें विभाग प्रचारक कहा जाएगा। जिला प्रचारक की संरचना पूर्व की तरह बनी रहेगी। यानी जिला स्वयंसेवकों की कार्यप्रणाली में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन निर्णय और समन्वय की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
सोशल मीडिया पर बढ़ेगी संघ की सक्रियता
जानकारी के अनुसार संगठनात्मक ढांचे में बदलाव के साथ-साथ संघ अपनी कार्यशैली में भी आशिक परिवर्तन करने जा रहा है। अब तक संघ की पहचान एक ऐसे संगठन के रूप में रही है, जो बिना शोर-शराबे के चुपचाप समाज में काम करता है, लेकिन बदलते समय के साथ संघ अब अपने कार्यों को अधिक स्पष्ट रूप से समाज के सामने लाने की तैयारी में है। इसी कड़ी में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत देशभर का दौरा कर रहे हैं। वे विभिन्न मंचों से संघ के सामाजिक योगदान, सेवा कार्यों और अब तक के संघर्षों को जनता के सामने रख रहे हैं। इसके साथ ही संघ सोशल मीडिया पर भी सक्रिय होने की योजना बना रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संघ द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के लिए किए जा रहे कार्यों को जनसमूह तक पहुंचाया जाएगा। संघ के जानकारों का कहना है कि यह बदलाव प्रचार नहीं, बल्कि पारदर्शिता और संवाद बढ़ाने की दिशा में कदम है।
