- मप्र में विकास की बयार…

गौरव चौहान
मप्र में सरकार का पूरा फोकस विकास पर है। विकास कार्यों को गति देने के लिए सरकार निरंतर कर्ज ले रही है। 2025 के जाने से पहले मोहन सरकार ने बाजार से 3500 करोड़ रुपए का नया कर्ज उठा लिया है। इसके बाद चालू वित्त वर्ष में मोहन सरकार द्वारा लिया गया कर्ज 53100 करोड़ तक पहुंच गया है। आरबीआई के जरिए तीन किस्तों में यह कर्ज लिया गया है । इसके पहले शीतकालीन सत्र की शुरुआत के दौरान सरकार ने बाजार से कर्ज लिया था। वित्त वर्ष की शुरुआत के पहले सरकार पर 4 लाख 21 हजार करोड़ रुपए का कर्ज था।
मोहन सरकार ने बाजार से 3500 करोड़ रुपए का जो नया कर्ज लिया है उसमें पहला कर्ज 1200 करोड़ रुपए का है जो 5 साल के लिए है और इसका ब्याज के साथ सरकार 31 दिसम्बर 2030 तक भुगतान करेगी। इस राशि से कृषि योजनाओं, सिंचाई और पावर प्रोजेक्ट्स, कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में काम होगा। दूसरा लोन 11 साल के लिए लिया जा रहा है। इस कर्ज की राशि भी 1200 करोड़ रुपए है जो 31 दिसम्बर 2036 तक के लिए है। तीसरा कर्ज 1100 करोड़ रुपए का है जो 23 साल की अवधि में ब्याज के साथ चुकता किया जाएगा। डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा बार-बार कर्ज लिए जाने को लेकर इसी माह स्पष्ट कर चुके हैं कि कर्ज नहीं यह निवेश है और यह कर्ज प्रदेश में विकास कार्यों, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की खातिर लिया जाता है और इसी में उसका उपयोग होता है।
कर्ज लेने की लिमिट अभी बाकी बता रही सरकार
सरकार ने अपनी रेवेन्यू को लेकर कहा है कि वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार 12487.78 करोड़ के रेवेन्यू सरप्लस में थी। इसमें आमदनी 234026.05 करोड़ और खर्च 221538.27 करोड़ रहा। इसके विपरीत वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदेश सरकार की रिवाइज्ड आमदनी 262009.01 करोड़ और खर्च 260983.10 करोड़ बताया है। इस तरह पिछले वित्त वर्ष में भी सरकार की आय 1025.91 करोड़ सरप्लस बताई गई है, जो भी कर्ज लिया जा रहा है वह लोन की लिमिट के भीतर है। एक साल के अंदर बार-बार हजारों करोड़ कर्ज लेकर मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार विपक्ष के निशाने पर है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि मध्य प्रदेश की वित्ती स्थिति खराब है और सरकार कर्ज पर कर्ज लिए जा रही है। स्थिति ऐसी हो गई है कि कर्ज चुकाने के लिए भी कर्ज लिए जा रहे हैं। सवाल ये है कि आखिर ये कर्ज कौन चुकाएगी? मध्य प्रदेश की जनता कर्ज के बोझ तले दब रही है।
मोहन सरकार ने कब-कब लिया कर्ज
इससे पहले सरकार ने दिसंबर की शुरूआत में आज तीन हजार करोड़ का कर्ज लिया। तीनों ही कर्ज आरबीआई के जरिए लिए गए। जिसके ब्याज का भुगतान हर छह माही में 3 जून और 3 दिसम्बर को किया जाएगा। वित्त विभाग द्वारा किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार पहला कर्ज एक हजार करोड़ रुपए का होगा, जिसका ब्याज के साथ भुगतान सरकार आठ साल में करेगी। इसके बाद दूसरा कर्ज भी एक हजार करोड़ रुपए का लिया जा रहा है, जिसकी अदायगी सरकार 13 साल में करेगी। तीसरा कर्ज भी एक हजार करोड़ रुपए का होगा, जिसका ब्याज के साथ भुगतान 23 साल की अवधि में सरकार करेगी। तीनों ही कर्ज की अदायगी ब्याज के रूप में जून और दिसम्बर में ही की जाएगी। वहीं 11 नवम्बर को किए गए ऑक्सन के बाद सरकार ने 12 नवम्बर को 1500-1500 करोड़ रुपए के दो कर्ज और 1000 करोड़ का एक अन्य कर्ज लिया था। यह कर्ज 16 साल, 22 साल और 19 साल की के लिए है, जिनका कूपन रेट पर ब्याज भुगतान सालभर में दो बार (छह-छह माह में) किया जाएगा। इसी तरह 28 अक्टूबर को 5200 करोड़ के कर्ज लिए गए थे। तब कर्ज की 2700 करोड़ की पहली राशि 21 साल, 2500 करोड़ की दूसरी राशि 22 साल के लिए ली गई थी।
– 11 नवम्बर को किए गए ऑक्सन के बाद सरकार ने 12 नवम्बर को 1500-1500 करोड़ रुपए के दो कर्ज और 1000 करोड़ का एक अन्य कर्ज लिया है। यह कर्ज 16 साल, 22 साल और 19 साल की के लिए है।
– 28 अक्टूबर को 5200 करोड़ के कर्ज लिए गए थे। तब कर्ज की 2700 करोड़ की पहली राशि 21 साल, 2500 करोड़ की दूसरी राशि 22 साल के लिए ली गई थी।
– 30 सितम्बर को 1500-1500 करोड़ के दो कर्ज लिए गए थे, जिसका भुगतान एक अक्टूबर को हुआ। यह कर्ज 20 साल और 23 साल की अवधि के लिए हैं। इसका भुगतान एक अक्टूबर को हुआ था।
– 23 सितम्बर को 1500-1500 करोड़ रुपए के दो कर्ज लिए गए हैं जो 18 साल और 21 साल की अवधि के हैं।
नौ सितम्बर को तीन कर्ज लिए गए थे जो 1500-1500 करोड़ तथा एक हजार करोड़ रुपए के थे। यह कर्ज 17 साल, 19 साल और 20 साल की अवधि के लिए हैं।
– 26 अगस्त को मोहन सरकार ने 2500 करोड़ और 2300 करोड़ रुपए के दो कर्ज लिए थे। यह लोन 20 साल और 18 साल की अवधि के लिए हैं।
इन तिथियों को भी लिया गया लोन
– 5 अगस्त को 3 कर्ज लिए थे, जिसका भुगतान छह अगस्त को हुआ। इसमें पहला कर्ज 18 साल के लिए 1600 करोड़ का था। दूसरा कर्ज 20 साल के लिए 1400 करोड़ और तीसरा कर्ज 23 साल के लिए 1000 करोड़ रुपए का था। इस तरह कुल 4000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया था।
– 30 जुलाई को 4300 करोड़ रुपए के दो कर्ज लिए। दोनों ही कर्ज 17 साल और 23 साल के लिए आरबीआई के माध्यम से लिए गए, जिसका भुगतान सालभर में दो बार कूपन रेट के जरिए ब्याज के रूप में किया जाएगा। ये दोनों ही कर्ज चालू वित्त वर्ष में लिए 7वें और 8वें कर्ज रहे हैं।
– 8 जुलाई को 2500 और 2300 करोड़ रुपए के दो कर्ज लिए थे। दोनों ही कर्ज 16 साल और 18 साल के लिए आरबीआई के माध्यम से लिए, जिसका भुगतान सालभर में दो बार कूपन रेट के जरिए ब्याज के रूप में किया जाएगा।
– आरबीआई के माध्यम से 2 लोन 4 जून को लिए। पहला लोन 16 साल के लिए 2000 करोड़ रुपए का था। सरकार ब्याज के साथ इसकी अदायगी 4 जून 2041 तक करेगी। दूसरा लोन 18 साल के लिए 2500 करोड़ रुपए का था। यह 4 जून 2043 तक ब्याज के साथ चुकाया जाएगा।
– सरकार ने चालू वित्त वर्ष का पहला कर्ज 7 मई को लिया था। इस दिन दो कर्ज ढाई-ढाई हजार करोड़ रुपए के लिए थे। मई में ढाई हजार करोड़ का पहला कर्ज 12 साल के लिए लिया था, जिसका ब्याज सात मई 2037 तक चुकाना है। इसी तरह ढाई हजार करोड़ रुपए का दूसरा कर्ज 7 मई को ही 14 साल के लिए लिया है, जिसकी भरपाई सात मई 2039 तक ब्याज के रूप में होगी।
