- प्रणव बजाज

बोले विश्वास: सरकारों में मुझे सुनने की औकात नहीं
रायसेन जिले में आयोजित भोजपुर उत्सव में कवि सम्मेलन में कविता पाठ करने आए कुमार विश्वास के निशाने पर सरकारें रहीं। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि मैं सरकारी कार्यक्रम नहीं करता, क्योंकि सरकारों की औकात नहीं कि वे मुझे व सच सुन सकें। इस दौरान माईक की आवाज कम आने पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि माइक सरकारी है और सरकार जितनी चाहती है, उतनी ही आवाज है। इसके टेंडर में कुछ हुआ होगा। विश्वास ने कहा मुझे भले ही पैसे कम मिलें, लेकिन मैं भोपाल, धार, विदिशा जाना चाहता हूं। इसकी वजह है वहां के श्रोताओं का बहुत अच्छा होना। उन्होंने इस सरकारी कार्यकम में आने पर सफाई देते हुए कहा कि राजाओं के राजा और देवताओं के देवता आज सुन रहे हैं। मंत्री नहीं आए, विधायक नहीं आए तो कोई बात नहीं है। महाराजा भोज के कार्यालय में खड़ा हूं। राजा से कवियों की पटती नहीं है। लेकिन राजा भोज उन्हें मना लाया करते थे। उन्होंने कहा कि भोजपुर के विधायक और संस्कृति मंत्रालय के साथ ही गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने फोन कर आने का आग्रह किया था। इसके अलावा उन्हें विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग के दर्शन करने का मौका मिलेगा। इसकी वजह से ही वे यहां आए हैं।
नए डीजीपी का यह भी अनोखा संयोग
सूबे के नए डीजीपी बनने वाले सुधीर सक्सेना ऐसे प्रदेश के पहले डीजीपी हैं, जिनकी बेटी सोनाक्षी सक्सेना भी आईपीएस अफसर है। उनका आईपीएस में चयन 2019 में हुआ था। उन्होंने भी मप्र कैडर चुना और वर्तमान में प्रशिक्षु अधिकारी हैं। बेटा कौस्तुभ सक्सेना आइआइटीएन है। यह भी महज संयोग ही है कि मौजूदा प्रदेश के मुख्य सचिव इकबाल सिंह का बेटा अमनबीर सिंह भी आईएएस है , उसका कैडर भी मप्र है और वह वर्तमान में बैतूल जिले में बतौर कलेक्टर पदस्थ हैं। सक्सेना ग्वालियर के रहने वाले हैं उनकी पहली पदस्थापना जबलपुर में बतौर सीएसपी के रूप में 1989 में हुई थी। वे प्रदेश के छिंदवाड़ा , जबलपुर के अलावा रतलाम में एसपी रह चुके हैं। इसके अलावा वे पूर्व में ओएसडी टू सीएम भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे सीबीआई में भी सेवा दे चुके हैं।
वसूली करने के मामले में नपे एक एसीपी और दो टीआई
व्यापारियों से अवैध वसूली करने वाले एक एसीपी सहित पुलिस के तीन अफसरों पर आखिर तबादले की गाज गिर ही गई है। इनमें दो थाना प्रभारी भी शामिल हैं। उनके खिलाफ शिकायतों की गंभीरता इससे ही समझी जा सकती है कि उन्हें बगैर तबादला आदेश सीधे पुलिस मुख्यालय के लिए कार्यमुक्त कर दिया गया है। इनमें एसीपी कोतवाली हरीशचंद्र मोटवानी, थाना प्रभारी कोतवाली अशोक पाटीदार और लसूड़िया थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल शामिल हैं। यह तीनों ही अफसर उन मामलों में भी कार्रवाई कर रहे थे, जिसके अधिकार जिला प्रशासन और खाद्य अमले को है। उनकी शिकायत व्यापारियों द्वारा पहले मंत्री तुलसी सिलावट और उसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दौरे के दौरान भी की गई थी। लसूड़िया इंदौर का टाप थाना माना जाता है। मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद डीजीपी विवेक जौहरी द्वारा इंदौर पुलिस के अफसरों से जानकारी लेकर उन्हें पीएचक्यू के लिए कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए थे। बताते हैं कि खाद्य विभाग के अमले पर अतिक्रमण से आईएएस लाबी भी पुलिस अफसरों से नाखुश थी। यह बात अलग है कि निलंबन की जगह महज उनका तबादला ही किया गया है।
केंद्र से बिना ब्याज का 10 हजार करोड़ का कर्ज लेने की तैयारी
मध्यप्रदेश के विकास के लिए केंद्र सरकार की नई स्कीम में राज्य शासन दस हजार करोड़ रुपए का बिना ब्याज का कर्ज लेने की तैयारी कर रही है। यह बात अलग है कि प्रदेश को केन्द्र कितनी राशि देगा अभी तय नही है। इसके लिए वित्त विभाग ने प्रमुख विभागों से विकास की बड़ी परियोजनाओं के आइडिया भेजने को कहा है। यह राशि केंद्र सरकार से 50 साल के लिए बिना ब्याज के मांगी जाएगी। राज्य की डिमांड के बाद केंद्र सरकार तय करेगी कि कितना कर्ज प्रदेश को दिया जाए। राज्य सरकार प्रमुख शहरों में अधोसंरचना पर इसे खर्च करेगा। इस राशि से ज्यादातर ऐसे मेगा प्रोजेक्ट पूरे किए जाएंगे, जो काम जनता के बीच दिखेंगे। गौरतलब है कि केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री सीतारमण ने इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी योजनाओं के लिए राज्यों को एक लाख करोड़ का कर्ज बिना ब्याज के 50 साल की अवधि के लिए देने का ऐलान किया था। इसमें अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विकास से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट मंजूर होंगे।
