
नगरीय निकायों में बिजली बिल के भुगतान का मामला अब शासन ने निकायों के पाले में डाल दिया है। पूर्व का बकाया और वर्तमान बिल निकायों को स्थानीय स्तर पर जुटाए गए राजस्व से जमा कराना होगा। इस संबंध में नगरीय प्रशासन विभाग का पत्र नगर निगम आयुक्त के साथ ही अन्य निकायों के प्रमुखों के पास आया है। जिसमें कहा गया है कि बिजली बिल भुगतान करने के बाद वितरण कंपनी से एनओसी लेकर विभाग को भेजी जाए। साथ ही कहा गया है कि जिन निकायों की पूरी राशि जमा होगी तो उनका चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि में कटौती नहीं की जाएगी। जिन निकायों की ओर से राशि जमा नहीं की जाएगी उनकी चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि रोक दी जाएगी। विभाग की ओर से जारी इस निर्देश ने नगरीय निकायों को मुश्किल में डाल दिया है, क्योंकि बिजली बिल बीते कई वर्षों से शासन के स्तर से ही जमा कराए जाते रहे हैं। जिसमें कुछ हिस्सा निकायों को मिलने वाले चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि के साथ ही शासन की ओर से दिए जाने वाले सहयोग का शामिल होता था। अब नगरीय निकायों को खुद के बजट से बिजली बिल भी जमा कराना होगा। नगर निगमों का बिजली बिल अधिक बकाया है, क्योंकि यहां बिजली की खपत भी सबसे अधिक होती है। रीवा नगर निगम में 3.14 करोड़ रुपए का बकाया है। वहीं सतना में 4.62 करोड़, सिंगरौली में 1.50 करोड़ जबकि ग्वालियर में सबसे अधिक 73.15 करोड़ रुपए बकाया है। इसी तरह भोपाल में 53 करोड़, इंदौर में 26.77 करोड़, सागर में 19.33 करोड़, जबलपुर का 5.79 करोड़ रुपए बिल बकाया है।
