तीसरी सीट की बाजी कांग्रेस की एकजुटता पर टिकी

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  • मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव बना सियासी परीक्षा

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव से पहले संख्या का गणित सबसे निर्णायक कारक बनकर सामने आया है। 230 सदस्यीय विधानसभा में एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरुरत है। यही गणित अब पूरी राजनीतिक बिसात को नियंत्रित कर रहा है। भारतीय जनता पार्टी 160 से अधिक विधायकों के दम पर दो सीटें सुरक्षित मानकर चल रही है। असली मुकाबला तीसरी सीट को लेकर है, जहां कागजी आंकड़ों के बावजूद कांग्रेस की स्थिति उतनी मजबूत नहीं दिख रही। दरअसल, कांग्रेस के पास भले 65 विधायक हों, लेकिन व्यावहारिक स्थिति में यह संख्या कम होती दिख रही है। बीना विधायक निर्मला सप्रे पर दलबदल कानून के तहत मामला लंबित है, जबकि विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा उच्चतम से राहत मिलने के बावजूद मतदान नहीं कर पाएंगे। ऐसे में कांग्रेस का प्रभावी आंकड़ा करीब 63 तक सिमटता नजर आ रहा है यानी जरूरी 58 वोटों से केवल 5 का अंतर है जो दिखने में छोटा, लेकिन सियासत में बेहद बड़ा जोखिम है। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही पांच वोट हैं। यदि कुछ विधायक अनुपस्थित रहते हैं या क्रॉस वोटिंग होती है, तो यह मामूली अंतर भी पूरी बाजी पलट सकता है। हालिया राजनीतिक घटनाएं, कुछ विधायकों की वैचारिक गतिविधियां, गैर कांग्रेसी संगठनों से जुड़े मंचों पर उपस्थिति और संगठनात्मक असंतोष, इस खतरे को और गंभीर बनाते हैं। भाजपा दो सीटें जीतने के बाद भी तीसरी सीट पर नजर गढ़ाए हुए है। उसके पास करीब 47 अतिरिक्त वोट बचते हैं, जिससे उसे तीसरी सीट के लिए महज 11 बोटों की जरुरत होगी।
उम्मीदवारी में मीनाक्षी नटराजन आगे
कांग्रेस खेमे में उम्मीदवार चयन को लेकर भी हलचल तेज है। राहुल गांधी कैंप से जुड़ी पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी लगभग तय मानी जा रही है। उनकी दिल्ली में सक्रियता और वरिष्ठ नेताओं से लगातार संपर्क यह संकेत दे रहे हैं कि पार्टी इस बार महिला चेहरे पर दांव लगा सकती है।
कातिलाल भूरिया का नाम चर्चा में
आदिवासी नेतृत्व को लेकर कांतिलाल भूरिया का नाम चर्चा में है, लेकिन पारिवारिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस किसी स्थानीय और संतुलित चेहरे पर ही दांव लगाने की रणनीति में दिख रही है। उधर, भाजपा ने अपने पते नहीं खोले हैं। दो सीटें तो उसकी हैं ही। कहा जा है कि वह तीसरा उम्मीदवार उतारेगी जब की जीत के राह निश्चित होगी।

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