अब पंचायतें करेंगी…एकल नल-जल योजनाओं का संचालन और संधारण

नल-जल योजना
  • मप्र पंचायत ग्रामीण नल जल योजना संचालन एवं प्रबंधन नीति को मंजूरी

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। जल जीवन मिशन के तहत अब ग्रामीण क्षेत्रों में एकल नल-जल योजनाओं का संचालन और संधारण ग्राम पंचायतें करेंगी। इस नई नीति के तहत, पंचायतें नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने, बिजली बिल भुगतान, पंपमैन/वाल्वमैन की नियुक्ति और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जल स्रोतों के संरक्षण के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगी, जिसका उद्देश्य योजना को टिकाऊ बनाना है। इसके लिए सरकार ने मप्र पंचायत (ग्रामीण नल जल योजना संचालन-संधारण एवं प्रबंधन नीति)-2026 को मंजूरी दे दी है। इसमें एकल नल-जल योजनाओं के संचालन एवं संधारण के संबंध में प्रावधान किए गए हैं। बता दें कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की डेडलाइन मार्च, 2024 रखी थी। चूंकि इस अवधि में अधिकतर राज्यों में जल जीवन मिशन का काम पूरा नहीं हो पाया। इस कारण केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 के रूप में पुनर्गठित कर देश में मिशन की अवधि दिसंबर, 2028 तक बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार, दिल्ली के निर्देश पर दस महीने की लंबी कवायद के बाद प्रदेश में एकल नल जल योजनाओं के संचालन एवं संधारण का मामला सुलझ गया है। गुजरात की तर्ज पर मप्र में भी जल जीवन मिशन के अंतर्गत एकल नल-जल योजनाओं के संचालन एव संधारण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की होगी। इसमें एकल नल-जल योजनाओं के संचालन एवं संधारण के संबंध में प्रावधान किए गए हैं। नई नीति के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक समिति गठित की जाएगी, जो एकल नल-जल योजनाओं की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने नई नीति को मंजूरी मिलने के बाद इसके क्रियान्वयन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। जल जीवन मिशन में दो तरह की योजनाओं (एकल और समूह नल-जल) पर काम चल रहा है। प्रदेश में एकल नल-जल योजनाओं की संख्या 28 हजार से ज्यादा है। एकल नल-जल योजनाओं का 97 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। अप्रैल तक एकल नल-जल योजनाओं का काम पूरा कर लिया जाएगा। समूह नल-जल योजनाओं की कुल संख्या 147 है। समूह नल-जल योजनाओं का करीब 68 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। समूह नल-जल योजनाओं का काम पूरा करने की डेडलाइन मार्च, 2027 निर्धारित है।
गुजरात के फॉमूूले को अपनाया जाएगा
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि पीएचई और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग इस दिशा में आगे की कार्रवाई कर रहे थे कि गत जनवरी में दिल्ली (जल शक्ति मंत्रालय) से निर्देश आ गए कि गुजरात की तर्ज पर मप्र में एकल नल-जल योजनाओं के संचालन एवं संधारण की पूरी जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंपी जाए, क्योंकि गुजरात में ग्राम पंचायतें इस काम को सफलतापूर्वक कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि भाजपा शासित अन्य राज्यों में भी ग्राम पंचायते ही एकल नल-जल योजनाओं के संचालन एवं संधारण का काम संभालेंगी। इसके बाद फरवरी में कैबिनेट ने मप्र पंचायत (ग्रामीण नल जल योजना संचालन संधारण एवं प्रबंधन नीति)-2026 को मंजूरी दे दी। दरअसल, जल जीवन मिशन की पॉलिसी में स्पष्ट प्रावधान है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद समूह नल-जल योजनाओं के संचालन एवं संधारण की जिम्मेदारी 10 साल तक संबंधित ठेकेदार की होगी, लेकिन एकल नल-जल योजनाओं के संचालन एवं संधारण को लेकर पॉलिसी में कोई प्रावधान नहीं है।
दो विभागों में फंसा था मामला
आधिकारिक जानकारी के अनुसार पिछले साल मई से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के शीर्ष अधिकारियों के बीच एकल नल-जल योजनाओं के संचालन एवं संधारण को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग चाहता था कि एकल नल-जल योजनाओं के संचालन एवं संधारण की पूरी जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंपी जाए, जबकि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एक अलग एजेंसी गठित कर उसे एकल नल-जल योजनाओं के मेंटेनेंस का काम सौंपने की बात कह रहा था। इसके बाद यह मामला मुख्य सचिव के पास पहुंचा। फिर दोनों विभागों के मंत्रियों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हुई, पर बात नहीं बनी। इसके बाद अगस्त, 2025 में यह मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास पहुंचा। उन्होंने मुख्य सचिव, दोनों विभागों के मंत्रियों और अफसरों के साथ बैठक कर इस संबंध में जरूरी निर्देश दिए।

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