
- मप्र सरकार ने केंद्र की मंजूरी में होने वाली देरी से बदली रणनीति
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। औद्योगिक रूप से पिछड़े जिलों में छोटे उद्योगों और कारीगरों को आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराने के लिए मध्य प्रदेश सरकार अब कॉमन फेसिलिटी सेंटर (सीएफसी) के विकास में निजी निवेश को जोड़ेगी। एमएसएमई विभाग इसके लिए अलग सीएफसी पॉलिसी तैयार कर रहा है। नीति के तहत निजी निवेशकों को सेंटर विकसित करने के लिए सब्सिडी और आकर्षक इंसेंटिव दिए जाएंगे। सरकार की योजना ऐसे जिलों में उद्योगों की जरूरत के मुताबिक अत्याधुनिक मशीनरी और मूलभूत सुविधाओं से लैस सीएफसी विकसित करने की है। इसके बाद संबंधित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए इन सेंटरों के आसपास रियायती दरों पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। नई नीति को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) से पहले लाने की तैयारी है। जीआईएस में सीएफसी के लिए निवेश भी जुटाया जा सकेगा।
फिलहाल सीएफसी के कई प्रस्ताव केंद्र सरकार की मदद से विकसित किए जा रहे हैं। इसके लिए केंद्र की माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज-क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम (एमएसई-सीडीपी) के तहत प्रस्ताव भेजे जाते हैं। अधिकारियों के अनुसार, केंद्र से प्रस्तावों की मंजूरी में समय लगने के कारण राज्य सरकार ने अब अपनी नीति के जरिए निजी निवेश को सीधे जोडऩे की तैयारी की है। नई व्यवस्था में ज्यादा संख्या में सीएफसी विकसित करने वाले निवेशकों को प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया जाएगा। इससे छोटे उद्यमियों को महंगी मशीनरी में अलग से निवेश करने की जरूरत कम होगी और वे सीएफसी की साझा सुविधा का उपयोग कर सकेंगे।
आलीराजपुर में 30 करोड़ का सेंटर
फिलहाल केंद्र से केवल आलीराजपुर के सीएफसी को मंजूरी मिली है। यहां पलंग, अलमारी सहित अन्य उत्पाद बनाने वाली 60 से अधिक छोटी इकाइयां संचालित हैं। करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले सीएफसी में आधुनिक रोबोटिक प्लांट विकसित किया जा रहा है। मशीनों से उत्पादन के बड़े हिस्से का काम होने के बाद कारीगर अपनी इकाइयों में उत्पादों की असेंबलिंग कर सकेंगे। बैतूल और आसपास के क्षेत्रों में गुड़ उत्पादन से जुड़ी छोटी इकाइयों के लिए सीएफसी का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। इसके जरिए छोटी इकाइयों को सुविधा देने के साथ पर्यावरण सुधार में भी मदद मिलने की उम्मीद है। विदिशा में कृषि उपकरण बनाने वाली पारंपरिक छोटी इकाइयों के लिए भी आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराने सीएफसी का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी इसकी मंजूरी नहीं मिली है।
13 जिलों में औद्योगिक पार्क की तैयारी
एमएसएमई विभाग 13 जिलों में औद्योगिक क्षेत्र और सीएफसी विकसित करने के प्रस्ताव पर भी काम कर रहा है। स्टीयरिंग कमेटी इन प्रस्तावों को मंजूरी दे चुकी है। केंद्र की अनुमति मिलने के बाद इन पर काम शुरू होगा। प्रस्ताव के तहत नए औद्योगिक क्षेत्र, फ्लैटेड इंडस्ट्री और सीएफसी विकसित किए जाने हैं। इनमें मंदसौर के पानपुर, जबलपुर के भटौली और रिछई, भिंड के लहारपुरा, निवाड़ी के देवेन्द्रपुरा असाटी जंगल, नीमच के सगराना फेज-2, टीकमगढ़ के धरमपुरा, दतिया के गंधारी, उज्जैन के बंधका, दमोह के मरुताल, सागर के बीना, अनूपपुर के कदमटोल, राजगढ़ के तारागंज और भोपाल में प्रिसिजन कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग सीएफसी के प्रस्ताव शामिल हैं।
एक सेंटर, कई इकाइयों को मशीनरी की सुविधा
सीएफसी में छोटे उद्यमियों और कारीगरों को ऐसी अत्याधुनिक और रोबोटिक मशीनों की सुविधा मिल सकेगी, जिन्हें हर छोटी इकाई के लिए अलग से खरीदना मुश्किल होता है। मशीनों से उत्पादन और फिनिशिंग का बड़ा हिस्सा होने के बाद उद्यमी अपनी इकाई में शेष काम और असेंबलिंग कर सकेंगे। सीएफसी का संचालन स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) के माध्यम से होगा और उद्यमी तय न्यूनतम शुल्क देकर साझा मशीनरी का उपयोग कर सकेंगे।
