जो रिटायर होने वाले हैं वे देंगे ट्रेनिंग

ट्रेनिंग
  • विभाग के अहम पदों पर बैठे अफसर भी भेजे जा रहे बेंगलुरु

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। कृषि विभाग की ओर से अधिकारियों को प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग के लिए बेंगलुरु भेजने की तैयारी है, लेकिन प्रशिक्षण के लिए चुनी गई सूची को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। वजह यह है कि सूची में विभाग के कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर रहे अधिकारी शामिल हैं, जबकि कुछ अधिकारियों का रिटायरमेंट भी नजदीक है। तीन दिवसीय आवासीय ट्रेनिंग नवंबर के पहले पखवाड़े तक अलग-अलग बैच में होगी। विभाग ने अपर संचालक से लेकर स्टेट कोआर्डिनेटर स्तर तक के अधिकारियों के 15-15 के पांच बैच तैयार किए हैं। हालांकि, विभागीय सूत्रों के अनुसार कुल 58 अधिकारी ट्रेनिंग में शामिल होंगे। ट्रेनिंग में प्राकृतिक खेती के साथ योग और ध्यान का प्रशिक्षण भी दिए जाने की जानकारी है।
ट्रेनिंग की सूची में ऐसे अधिकारी भी शामिल हैं, जो संचालनालय में स्थापना, बजट, योजना, विभागीय जांच, लिटिगेशन, आरटीआई और सूचना जैसे महत्वपूर्ण काम संभाल रहे हैं। इनमें अपर संचालक डीएल कोरी, उप संचालक अजय परियानी, सहायक संचालक दिलावर सिंह कौरव, डॉ. मनीषा जायसवाल, एसएल इवने और दुष्यंत कुमार धाकड़ के नाम शामिल हैं। डॉ. मनीषा जायसवाल बजट और योजना, एसएल इवने विभागीय जांच तथा दुष्यंत कुमार धाकड़ कानूनी मामलों से जुड़े काम देख रहे हैं। इसी तरह 25 से 27 सितंबर वाले बैच में स्थापना से जुड़े उप संचालक सरनाम सिंह और सहायक संचालक एसके सोने, आरटीआई देख रहे उप संचालक त्रिभुवन भारती तथा सूचना से जुड़े उप संचालक एचपी भारती का नाम है।
रिटायरमेंट नजदीक होने पर भी ट्रेनिंग
सूची में सहायक संचालक सविता श्रीवास्तव का नाम भी है, जिनका रिटायरमेंट 30 सितंबर को होना है। वे 16 से 18 सितंबर वाले पहले बैच में शामिल हैं। वहीं अपर संचालक जीपी प्रजापति 31 दिसंबर को रिटायर होंगे और 25 से 27 सितंबर वाले बैच में शामिल हैं। यानी कुछ अधिकारियों के मामले में प्रशिक्षण और सेवानिवृत्ति के बीच का अंतर काफी कम है। यही वजह है कि प्रशिक्षण के उद्देश्य और अधिकारियों के चयन को लेकर विभाग के भीतर सवाल उठ रहे हैं। आरोप यह भी है कि प्राकृतिक या जैविक खेती से सीधे जुड़े अधिकारियों के बजाय संचालनालय के प्रशासनिक काम संभालने वाले अफसरों को सूची में प्राथमिकता दी गई है।
एक बैच पर साढ़े चार लाख तक खर्च
बेंगलुरु के श्रीश्री इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेस एंड टेक्नोलॉजी ने 30 जुलाई को प्रशिक्षण का प्रस्ताव दिया था। प्रस्ताव में सिंगल एसी रूम के लिए प्रतिदिन 30 हजार, डबल शेयरिंग के लिए 25 हजार और थ्री-शेयरिंग के लिए 15 हजार रुपए तक का खर्च बताया गया है। एक बैच पर करीब 4 से 4.5 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसके अलावा अधिकारियों का टीए-डीए अलग होगा। सचिव स्तर से सहमति मिलने के बाद अधिकारियों को प्रशिक्षण के लिए भेजने का निर्णय लिया गया। ऐसे में अब चर्चा इस बात की भी है कि प्रशिक्षण पर होने वाले खर्च के मुकाबले इसका विभागीय कामकाज और प्राकृतिक खेती के विस्तार में कितना प्रत्यक्ष उपयोग होगा।
पहले भी बाहर भेजे जाते रहे हैं अधिकारी
कृषि विभाग में अधिकारियों को प्रशिक्षण के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेश भेजे जाने की परंपरा रही है। विभागीय अधिकारियों को पहले जोधपुर, अंडमान, ऊटी और जापान जैसे स्थानों पर भी प्रशिक्षण के लिए भेजा जा चुका है। इस बार बेंगलुरु के संस्थान में प्राकृतिक खेती के साथ योग और ध्यान का प्रशिक्षण भी प्रस्तावित है। सूत्रों का दावा है कि प्रशिक्षण की सूची में कुछ अधिकारी ऐसे हैं, जो पहले भी विभागीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं। हालांकि, विभाग का कहना है कि चयन केवल संचालनालय तक सीमित नहीं है और जिलों से भी अधिकारियों को शामिल किया गया है। कृषि संचालक उमाशंकर भार्गव के अनुसार, हमने सिर्फ विभाग के अधिकारी नहीं, जिलों से भी लोग लिए हैं। मुझे जहां तक जानकारी है, सभी अफसरों के रिटायरमेंट में एक साल बचा है।

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