- जनगणना ने रोकी पांच नए नगर निगम बनाने की राह
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश में पांच नगर पालिकाओं को नगर निगम बनाने की सरकार की तैयारी फिलहाल प्रशासनिक सीमाओं के फ्रीज होने से अटक गई है। विदिशा, गुना, शिवपुरी, छतरपुर और सिवनी को नगर निगम बनाने के लिए कलेक्टरों से प्रस्ताव मंगाकर विभागीय स्तर पर कवायद शुरू कर दी गई थी, लेकिन जनगणना की प्रक्रिया के चलते अब शहरी और ग्रामीण सीमाओं में बदलाव पर रोक है। ऐसे में 2027 के नगरीय निकाय चुनाव से पहले इन पांच शहरों को नगर निगम का दर्जा मिल पाएगा या नहीं, इस पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सरकार ने पिछले साल इन नगर पालिकाओं को नगर निगम में बदलने की दिशा में प्रक्रिया शुरू की थी। संबंधित जिलों के कलेक्टरों से नगर पालिकाओं की आबादी, क्षेत्रफल और आसपास के क्षेत्रों को शामिल करने सहित जरूरी जानकारी के साथ प्रस्ताव मांगे गए थे। कलेक्टरों ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज भी दिए। इसके बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर जरूरी तैयारियों की समीक्षा की थी।
चुनावी घोषणा के बाद तेज हुई थी कवायद
इन शहरों को नगर निगम बनाने की मांग लंबे समय से उठती रही है। विधानसभा चुनाव से पहले गुना, शिवपुरी, छतरपुर और सिवनी को नगर निगम बनाने की घोषणा की गई थी। इसके बाद सरकारी स्तर पर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। विदिशा को लेकर जनवरी 2025 में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने नगर निगम बनाने की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री ने भी विदिशा को नगर निगम बनाने के लिए सहमति दी थी। इसके बाद पांचों शहरों को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ी।
प्रशासनिक सीमाएं फ्रीज होने से लगा ब्रेक
नगर निगम बनाने की प्रक्रिया में सबसे बड़ी अड़चन जनगणना के कारण आई है। मध्य प्रदेश में जनगणना को देखते हुए 31 दिसंबर 2025 को प्रशासनिक सीमाएं फ्रीज कर दी गई थीं। इनमें जिले, तहसील, गांव और नगरीय सीमाएं शामिल हैं। जनगणना का पहला चरण मकान सूचीकरण और मकानों की गणना से संबंधित था, जो अप्रैल-मई 2026 में पूरा किया गया। वहीं जनगणना का दूसरा चरण फरवरी से मार्च 2027 तक प्रस्तावित है, जिसमें वास्तविक जनसंख्या गणना की जानी है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, इस अवधि में किसी क्षेत्र की सीमा बदलने पर जनगणना के आंकड़ों और प्रशासनिक सीमाओं के बीच विसंगति की स्थिति बन सकती है। इसी वजह से नगर पालिका की सीमा बढ़ाकर उसे नगर निगम में बदलने की प्रक्रिया रोक दी गई है।
2027 के चुनाव से पहले समय कम
सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि जनगणना पूरी होने के बाद सरकार इन पांच नगर पालिकाओं की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी कर पाएगी। जनगणना का दूसरा चरण मार्च 2027 तक चलना है, जबकि प्रदेश में जुलाई-अगस्त 2027 के दौरान नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव प्रस्तावित हैं। नगर निगम बनाने की प्रक्रिया केवल सरकारी घोषणा से पूरी नहीं होती। इसमें आबादी के मानदंड, सीमा विस्तार, आसपास की ग्राम पंचायतों को शामिल करना, ग्राम पंचायतों के संकल्प, दावे-आपत्तियां, कलेक्टर का संशोधित प्रस्ताव, विभागीय मंजूरी, कैबिनेट की स्वीकृति और राज्यपाल की अनुमति जैसी कई प्रक्रियाएं शामिल हैं। इस पूरी प्रक्रिया को देखते हुए जनगणना खत्म होने और चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बीच उपलब्ध समय सीमित रह जाएगा। इसलिए चुनाव से पहले पांचों शहरों को निगम का दर्जा देने की समयसीमा फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
निगम बनने पर बढ़ता है वित्तीय दायरा
नगर पालिका से नगर निगम बनने पर संबंधित शहर को मिलने वाले वित्तीय संसाधनों और प्रशासनिक स्वायत्तता में बदलाव आता है। विकास कार्यों के लिए उपलब्ध फंड का दायरा बढ़ता है और कई मामलों में राज्य शासन पर निर्भरता कम होती है। यही वजह है कि इन शहरों में लंबे समय से नगर निगम का दर्जा देने की मांग उठती रही है।
ऐसे पूरी होती है नगर निगम बनाने की प्रक्रिया
नगर पालिका को नगर निगम बनाने के लिए पहले कलेक्टर प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजते हैं। आबादी के निर्धारित मानदंड को पूरा करने के लिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को नगरीय सीमा में शामिल करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। संबंधित ग्राम पंचायतों में प्रस्ताव और संकल्प की कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन दावे-आपत्तियां आमंत्रित करता है। इसके बाद कलेक्टर संशोधित प्रस्ताव नगरीय विकास एवं आवास विभाग को भेजते हैं। विभागीय स्तर पर मंजूरी के बाद प्रस्ताव कैबिनेट के सामने जाता है। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद राज्यपाल की अनुमति और अंतत: नगर निगम गठन की अधिसूचना जारी होती है। यानी जनगणना के कारण अभी सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रुकी है, बल्कि पांच शहरों को नगर निगम बनाने की पूरी टाइमलाइन प्रभावित हुई है। अब निगाहें जनगणना पूरी होने के बाद सरकार की अगली कार्रवाई पर रहेंगी।
