
- 24 घंटे में जांच, नई एसओपी जारी…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। एमपी समेत पूरे देश में बंधुआ मजदूरी को लेकर नई गाइडलाइन (एसओपी) जारी की गई है। इसके बाद पीएचक्यू की सीआईडी विंग ने भोपाल-इंदौर के पुलिस कमिश्नरों के साथ सभी जिलों और जोनल रेल एसपी को निर्देश जारी कर बंधुआ मजदूरी पूरी तरह खत्म करने के लिए तत्काल एक्शन लेने को कहा गया है। निर्देश के मुताबिक अगर बंधुआ मजदूरी को लेकर कलेक्टर, एसडीएम या पुलिस के पास कोई भी व्यक्ति मौखिक या लिखित शिकायत लेकर पहुंचता है, तो उसी समय एफआईआर दर्ज कर शिकायतकर्ता को उसकी कॉपी दी जाएगी। इस दौरान पुलिस को ध्यान रखना होगा कि कार्रवाई या शिकायत करने वाले की पहचान किसी भी स्तर पर लीक न हो, ताकि पीडि़तों की जान या सुरक्षा को कोई खतरा न हो। पुलिस को अब हर हाल में ऐसी शिकायत पर चौबीस घंटे के भीतर छानबीन पूरी करके अपनी रिपोर्ट आला अफसरों को भी देनी होगी।
बनेगी स्पेशल टीम, पुलिस के साथ फोटोग्राफर सरकार-एनजीओ के प्रतिनिधि भी रहेंगे: पीएचक्यू ने साफ कर दिया है कि बंधुआ मजदूरी की शिकायत मिलते ही पुलिस अपने स्तर स्तर पर सीधा एक्शन लेने के बजाए एक स्पेशल टीम बनाएगी। कलेक्टर को इसकी जानकारी देते हुए स्पेशल टीम में जिला प्रशासन के राजस्व अधिकारी, श्रम अधिकारी, कम से कम दो महिला अधिकारी, फोटोग्राफर, गवाह, एनजीओ के प्रतिनिधि भी छापामार टीम में शामिल होंगे। अगर इस दौरान मजदूरों की जान को खतरा हो या सबूत मिटने का डर हो, तो ही पुलिस तुरंत कार्रवाई कर सकेगी। हर जिले के एसपी की ये जिम्मेदारी होगी कि शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर टीम मौके पर पहुंचकर बंधुआ मजदूरों को हर हाल में मुक्त कराएगी।
मौके पर ही सबूत जुटाने के साथ बिना वारंट गिरफ्तारी
नई एसओपी में ये साफ कर दिया है कि मजदूरों को छुड़ाते वक्त उनकी सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाए। इस दौरान टीम सबसे पहले बंधुआ मजदूरों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाएगी। छापे के 24 घंटे के भीतर ही पुलिस को मौके से फोन, डायरी, मोबाइल, यात्रा टिकट, बैंक के कागज, वेतन पर्ची, रजिस्टर, त्रष्टा अनुबंध, नकदी और ताले-चाबी चाबी जैसी चीजों के फोटो खींचकर उन्हें जब्त करना होगा, ताकि कोर्ट में पुख्ता सबूत पेश किए जा सकें। इसके साथ ही नई एसओपी के तहत बंधुआ मजदूरी कराने वाले आरोपियों के खिलाफ बीएनएसएस के तहत पुलिस को बिना वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार करने का पूरा अधिकार होगा।
आर्थिक मदद भी मिलेगी
नई एसओपी के तहत छुड़ाए गए मजदूरों को 48 घंटे के भीतर एक मुक्ति प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इस दौरान टीमें यह भी तय करेंगी कि जिन मजदूरों के पास कोई पहचान पत्र नहीं हैं, उनके लिए तुरंत पहचान पत्र बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही जिन मजदूरों का बैंक खाता है, उन्हें एक हफ्ते के भीतर आर्थिक सहायता भेजी जाएगी। पुलिस बंधुआ मजदूरों के बयान लेगी और इस दौरान अगर कोई और अपराध भी हुआ है, तो मजदूरों को छुड़ाने के 24 घंटे के भीतर आरोपी के खिलाफ अन्य धाराओं में भी एफआईआर दर्ज होगी। इसके बाद मजदूरों को उनके गांव वापस भेजने या दूसरी जगह शिफ्ट करने की जिम्मेदारी संबंधित जिले के पुलिस और प्रशासन की होगी।
तीन महीने के भीतर फैसला और सजा: इन मामलों में अब फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई होगी। मजिस्ट्रेट 3 महीने के भीतर सुनवाई कर ऐसे मामलों में फैसला सुनाएंगे। इसके अलावा श्रम विभाग के अफसरों को ये जिम्मेदारी सौंपी गई है कि बंधुआ मजदूरों का रुका हुआ वेतन और ओवरटाइम का पैसा मालिकों से वसूल कर उन्हें दिलाया जाएगा। आंकड़ों के मुताबिक 2025 में एमपी के गुना में 16, रायसेन में 18 (10) बच्चों समेत) को आजाद कराया गया था।
