- शताब्दी वर्ष में हर गांव, हर घर तक पहुंच अभियान
- गौरव चौहान

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान हर गांव, हर घर तक पहुंच अभियान के तहत देश में अब तक 10 करोड़ से अधिक घरों और करीब 4 लाख गांवों में संवाद किया गया है। अगर मप्र की बात करें तो संघ के अनुसार पिछले एक वर्ष में 80 हजार स्वयंसेवकों ने घर-घर संपर्क अभियान चलाकर 27 लाख 46 हजार 780 परिवारों तक पहुंच बनाई, जबकि 15 हजार 890 गांवों में भी संगठन का संदेश पहुंचाया गया। गौरतलब है कि शताब्दी वर्ष में दो प्रकार के कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। इनमें एक संगठन विस्तार और दूसरा समाज की सज्जन शक्ति को सदभाव, समरसता के लिए संगठित करना है।
शताब्दी वर्ष के दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण चेतना, स्व एवं स्वदेशी के लिए गर्व, परिवार व्यवस्था के संरक्षण और नागरिकों को कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना हैं। इसके तहत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने शताब्दी वर्ष के दौरान मध्य भारत प्रांत में संगठनात्मक विस्तार को नई गति दी है। शताब्दी वर्ष में दो प्रकार के कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। इनमें एक संगठन विस्तार और दूसरा समाज की सज्जन शक्ति को सदभाव, समरसता के लिए संगठित करना है। भोपाल में आयोजित मध्य भारत प्रांत की दो दिवसीय समीक्षा बैठक में शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों का आकलन किया गया। बैठक में बताया गया कि संघ की पहुंच प्रदेश के 15 हजार से अधिक गांवों तक हो चुकी है और आगामी वर्षों में अधिकतम स्थानों पर नियमित शाखाएं प्रारंभ करने का लक्ष्य रखा गया है।
शाखाओं और सेवा कार्यों में बढ़ोतरी
संघ के आंकड़ों के अनुसार मध्य भारत प्रांत में पिछले एक वर्ष के दौरान करीब 300 नई शाखाएं शुरू हुई हैं। पिछले वर्ष जहां 3674 शाखाएं संचालित हो रही थीं, वहीं अब उनकी संख्या बढकऱ 3957 हो गई है। संगठन ने अगले वर्ष तक 5000 से अधिक शाखाएं संचालित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सेवा कार्यों के क्षेत्र में भी विस्तार दर्ज किया गया है। पिछले वर्ष प्रांत में 2448 सेवा प्रकल्प संचालित थे, जो बढकऱ 3100 हो गए हैं। इनमें 385 सेवा कार्य सीधे शाखाओं के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। प्रांत की 1013 सेवा बस्तियों में से 970 बस्तियां अब सेवा कार्यों से जुड़ चुकी हैं।
हिंदू सम्मेलनों में 52 लाख से अधिक की भागीदारी
शताब्दी वर्ष के दौरान मंडल और बस्ती स्तर पर बड़े पैमाने पर हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। संघ के अनुसार 1569 मंडलों और 759 बस्तियों में आयोजित कार्यक्रमों में 52 लाख 62 हजार 289 नागरिक शामिल हुए। इनमें 27 लाख 30 हजार 656 महिलाओं की सहभागिता दर्ज की गई, जिसे संगठन सामाजिक भागीदारी के बढ़ते दायरे के रूप में देख रहा है। यह सम्मेलन शहरी, ग्रामीण, जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में भी हुए हैं। इनमें समाज में सामाजिक समरसता, पर्यावरण चेतना, कुटुम्ब प्रबोधन, स्व का बोध तथा नागरिक कर्तव्यों की पालना के लिए पंच परिवर्तन के लिए आह्वान किया गया।
गांव और शहर दोनों पर फोकस
संघ का विस्तार केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा। शहरी क्षेत्रों में शाखाओं, मिलन और मंडली कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं तथा समाज के विभिन्न वर्गों को जोडऩे का प्रयास किया गया। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित शाखाओं के विस्तार और सामाजिक संपर्क पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठन सामाजिक समरसता, सेवा और जनसंपर्क से जुड़े कार्यक्रमों को और व्यापक बनाने की दिशा में काम कर रहा है। उनका मानना है कि घर-घर संपर्क अभियान, नई शाखाओं और सेवा गतिविधियों के माध्यम से संगठन की सामाजिक पहुंच लगातार बढ़ रही है, जिसका प्रभाव गांव से लेकर शहर तक दिखाई दे रहा है।
