
- 90 दिन में होगा फैसला
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर भर्ती से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने एनएचएम और भोपाल जिला पंचायत के 41 संविदाकर्मियों को राहत दी है। कोर्ट ने इन अभ्यर्थियों के लिए 41 पद सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। साथ ही संविदाकर्मियों के पूर्व अनुभव को सुपरवाइजर पद के लिए समतुल्य माना जा सकता है या नहीं, इसका फैसला अब समतुल्यता समिति करेगी।
41 पद रहेंगे सुरक्षित
हाईकोर्ट ने मामले की जांच समतुल्यता समिति को सौंपते हुए निर्देश दिया है कि इन 41 पदों को फिलहाल सुरक्षित रखा जाए। समिति को यह तय करना होगा कि संबंधित संविदाकर्मियों द्वारा किया गया वास्तविक कार्य सुपरवाइजर पद के अनुभव के बराबर माना जा सकता है या नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि समिति केवल वेतन स्तर या पे-लेवल को आधार नहीं बनाएगी, बल्कि संविदाकर्मियों द्वारा किए गए वास्तविक कार्य की प्रकृति और जिम्मेदारियों का भी परीक्षण करेगी।
90 दिन में देना होगा कारण सहित फैसला
हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक समतुल्यता समिति को 90 दिनों के भीतर कारण सहित अंतिम निर्णय लेना होगा। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया में आगे की कार्रवाई समिति के निष्कर्ष के आधार पर की जाएगी। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया के तहत पहले से नियुक्त 158 उम्मीदवारों की नियुक्तियां रद्द करने से इनकार किया है। यानी मौजूदा नियुक्तियां फिलहाल प्रभावित नहीं होंगी। हालांकि, समतुल्यता समिति के निर्णय तक 41 पदों पर नई भर्ती या नियुक्ति पर रोक रहेगी। इससे संबंधित संविदाकर्मियों के लिए इन पदों पर दावा फिलहाल सुरक्षित रहेगा। अब पूरा मामला समतुल्यता समिति के निर्णय पर निर्भर करेगा। समिति संविदाकर्मियों के वास्तविक कार्य, जिम्मेदारियों और सुपरवाइजर पद की आवश्यकताओं के बीच समानता का परीक्षण करेगी। 90 दिनों के भीतर रिपोर्ट और कारण सहित निर्णय आने के बाद ही इन 41 पदों पर भर्ती को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
लेवल 4-5 के अनुभव पर उठा विवाद
मामला महिला एवं बाल विकास विभाग में लेवल-6 के सुपरवाइजर पदों पर भर्ती से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे पहले से विभागीय कार्यों से जुड़े संविदा पदों पर काम कर रहे हैं और भर्ती प्रक्रिया में उन्हें अनुभव का लाभ मिलना चाहिए। हालांकि, विभाग ने लेवल-4 और लेवल-5 पर कार्यरत संविदाकर्मियों के अनुभव को लेवल-6 के सुपरवाइजर पद के समतुल्य मानने से इनकार कर दिया था। अभ्यर्थियों ने दावा किया कि इसके बावजूद उन्होंने मेरिट सूची में उच्च अंक हासिल किए थे।
