2027 तक हटेगा 12 लाख टन से ज्यादा लीगेसी वेस्ट

 लीगेसी वेस्ट
  • एमपी में कचरे के पहाड़ का होगा सफाया

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में वर्षों पुराने कचरे के ढेर आमजन के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं। राज्य सरकार ने तय किया है कि वर्ष 2027 तक कचरे के ढेर का शत-प्रतिशत निपटान किया जाएगा। प्रदेश के मुख्य सचिव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इसका हलफनामा भी दिया गया है।
30 से अधिक डंपिंग साइटों पर 12 लाख टन कचरा
दरअसल, प्रदेश में वर्षों पुराने लैंडफिल, खुले मैदानों पर बिना किसी वैज्ञानिक प्रबंधन के जमा हुए कचरे के पुराने ढेर हैं। प्रदेश की 30 से अधिक डंपिंग साइटों पर 12 लाख टन से ज्यादा कचरा इक_ा होने की जानकारी सामने आई है। सरकार का दावा है कि इसका थर्ड पार्टी सत्यापन भी कराया जा रहा है। वर्षों से लैंडफिल या अन्य स्थानों पर जमा हो गए कचरे से पर्यावरण पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और इसे प्रतिबंधित करने के लिए बायोरेमेडिएशन, जैव-खनन (बायोमाइनिंग), और स्थिरीकरण जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है। यह एक चुनौती है लेकिन इसे संसाधित करके भूमि को पुन: प्राप्त किया जा सकता है। ऐसे में राज्य सरकार ने तय किया कि अगले वर्ष तक शहरों से ऐसे कचरे ढेर साफ किए जाएंगे।
जून 2026 का लक्ष्य नहीं हो सका पूरा: बता दें, जून 2026 तक लीगेसी वेस्ट (वर्षों पुराने कचरे के ढेर) का अनिवार्य रूप से निपटान करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन यह संभव नहीं हो सका। इसके लिए बकायदा निकायों को यह भी घोषणा पत्र देने के निर्देश दिए गए थे कि उनके शहर में लीगेसी वेस्ट नहीं है। अब वर्ष 2027 के अंत तक कचरे के ढेर के निपटान का लक्ष्य रखा गया है।
एक ओर मप्र के शहर स्वच्छता के सिरमौर
मध्य प्रदेश के शहर स्वच्छता में देश में लगातार नंबर वन बने हुए है। आठ बार से इंदौर सबसे स्वच्छतम शहर बना हुआ है, दूसरे नंबर पर भोपाल है तो निकायों ने भी स्वच्छता में अपनी एक अलग जगह बनाई है। इन सबके बावजूद प्रदेश के शहरों में वर्षों से जमा कचरे का निपटान चुनौती बना हुआ है। यह कचरे का ढेर प्रदेश के स्वच्छता मिशन पर बट्टा लगा रहा है। ऐसे में लीगेसी वेस्ट प्रोजेक्ट को लेकर नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने समस्त आयुक्त एवं संभागीय संयुक्त संचालकों को निर्देशित किया है कि निकाय स्तर पर शत-प्रतिशत स्रोत पृथकीकरण एवं प्रतिदिन संग्रहित होने वाले कचरे का नियमित पूर्ण प्रसंस्करण हो। जिन नगरीय निकायों में लीगेसी वेस्ट डंपसाइट रेमेडिएशन का कार्य प्रगतिरत है। उनकी समीक्षा कर वर्ष 2027 तक कार्य पूर्ण करें।
बायोमाइनिंग और बायोरेमेडिएशन से हटेंगे कचरे के ढेर
पुराने कचरे के निपटान के लिए बायोरेमेडिएशन, बायोमाइनिंग और स्थिरीकरण जैसी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इन तकनीकों के जरिए पुराने कचरे को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर उपयोगी सामग्री को अलग किया जा सकता है और बची हुई सामग्री का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जाता है। सरकार का उद्देश्य केवल कचरे को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना नहीं, बल्कि डंपिंग साइट को वैज्ञानिक तरीके से साफ कर जमीन को दोबारा उपयोग के योग्य बनाना है। इससे पुराने कचरे से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने नगरीय निकायों को स्रोत स्तर पर कचरे का शत-प्रतिशत पृथकीकरण सुनिश्चित करने और रोजाना एकत्र होने वाले कचरे का नियमित रूप से पूरा प्रसंस्करण करने के निर्देश दिए हैं।

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