मंत्रालय में नहीं लगी… बायोमेट्रिक हाजिरी

बायोमेट्रिक हाजिरी
  • सीएम के फरमान, तीन बार निर्देश, फिर भी तारीख तय नहीं

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। सरकारी दफ्तरों में समय पर पहुंचने और जवाबदेही तय करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पिछले आठ महीने में तीन बार बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने के निर्देश दे चुके हैं, लेकिन व्यवस्था की शुरुआत उस मंत्रालय में ही नहीं हो पाई जहां से प्रदेश का प्रशासन चलता है। अप्रैल से नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी चल रही है, मशीनों और जरूरी सामग्री की खरीदी की प्रक्रिया भी शुरू हुई, लेकिन करीब पांच महीने गुजरने के बाद भी कर्मचारियों की बायोमेट्रिक हाजिरी शुरू नहीं हो सकी। अब अधिकारियों का कहना है कि सिस्टम तैयार किया जा रहा है और करीब दो महीने में व्यवस्था शुरू हो सकती है। पहले चरण में मंत्रालय के साथ सतपुड़ा और विंध्याचल भवन को शामिल किया जाएगा।
    मुख्यमंत्री ने पहली बार 7 जनवरी को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में सरकारी कार्यालयों का काम सुबह 10 बजे से शुरू करने और बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने को कहा था। उन्होंने यहां तक कहा था कि समय पर आने की आदत नहीं सुधरी तो सप्ताह में छह दिन काम की व्यवस्था फिर लागू करने पर विचार किया जा सकता है। इसके बाद 15 मई को मुख्यमंत्री ने व्यवस्था की समीक्षा करते हुए प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने इसे समयबद्धता और जवाबदेही बढ़ाने का जरिया बताया और खुद कार्यालयों में उपस्थिति का निरीक्षण करने की बात कही। फिर 25 अगस्त की समीक्षा बैठक में मंत्रालय, विंध्याचल और सतपुड़ा भवन के साथ सभी जिलों के सरकारी कार्यालयों में भी बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने की बात कही गई। इसके बावजूद मंत्रालय में अभी तक नई व्यवस्था जमीन पर नहीं उतर पाई है।
    अप्रैल से तैयारी, पांच महीने बाद भी सिस्टम तैयार नहीं
    मंत्रालय में अप्रैल से बायोमेट्रिक अटेंडेंस शुरू करने की तैयारी थी। सामान्य प्रशासन विभाग ने मशीनों और अन्य सामग्री की खरीदी के लिए एमपीएसआईडीसी को वर्क ऑर्डर जारी करने का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन खरीदी और सिस्टम तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढऩे के बावजूद व्यवस्था लागू नहीं हो सकी। अधिकारियों के मुताबिक एमपीएसईडीसी सिस्टम तैयार कर रहा है और अब लगभग दो महीने में इसे शुरू किया जा सकता है। यानी जिस व्यवस्था को अप्रैल में शुरू करने की तैयारी थी, उसके लिए अब आगे भी करीब दो महीने का इंतजार करना पड़ सकता है।
    पहले रजिस्टर, फिर फेस अटेंडेंस… दोनों बेअसर
    मंत्रालय में कर्मचारियों की लेटलतीफी रोकने के लिए यह पहला प्रयोग नहीं है। इससे पहले भी दो व्यवस्थाएं लागू की जा चुकी हैं। जून 2024 में अटेंडेंस रजिस्टर में कर्मचारियों के हस्ताक्षर की व्यवस्था शुरू की गई थी। इसके बाद फरवरी 2025 में आधार बेस्ड फेस अटेंडेंस लागू की गई। लेकिन खबर के मुताबिक दोनों व्यवस्थाएं कर्मचारियों के समय पर कार्यालय पहुंचने की समस्या पर प्रभावी अंकुश नहीं लगा सकीं। अब तीसरी बार बायोमेट्रिक व्यवस्था से उम्मीद की जा रही है कि कर्मचारी की उपस्थिति सीधे दर्ज होगी और हाजिरी में पारदर्शिता आएगी।
    फाइव-डे वीक के बीच समय की पाबंदी बड़ा मुद्दा
    प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में वर्ष 2021 से फाइव-डे वीक लागू है। 8 अप्रैल 2021 के आदेश के बाद कार्यालयों का समय सुबह 10 से शाम 6 बजे किया गया था। रविवार के साथ शनिवार को भी अवकाश रहने लगा। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि पांच दिन के कार्य सप्ताह में कार्यालयों का कामकाज तय समय के अनुसार हो और कर्मचारियों की उपस्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड रहे। लेकिन मंत्रालय में ही बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू होने में लगातार हो रही देरी ने सरकार की टाइमिंग और जवाबदेही वाली नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
    अब मंत्रालय से होगी व्यवस्था की परीक्षा
    सरकार पहले मंत्रालय, सतपुड़ा और विंध्याचल भवन में बायोमेट्रिक सिस्टम लागू कर इसकी सफलता परखेगी। इसके बाद प्रदेश के अन्य सरकारी कार्यालयों में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मुख्यमंत्री तीन बार निर्देश दे चुके हैं, तो मंत्रालय में व्यवस्था लागू करने में पांच महीने से ज्यादा समय क्यों लग रहा है? सरकार जिस बायोमेट्रिक सिस्टम को पूरे प्रदेश में जवाबदेही बढ़ाने का जरिया बता रही है, उसकी पहली परीक्षा अब मंत्रालय में ही होगी।

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