अब निर्माण विभागों के विवाद सुलझेंगे आसानी से

निर्माण विभागों

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र  सरकार ने ठेकेदारों और सरकारी विभागों (निर्माण विभाग) के बीच के विवादों को तेजी से सुलझाने के लिए मप्र मध्यस्थ अधिकरण संशोधन अधिनियम 2025 लागू कर दिया है, जिसकी अधिसूचना विधि एवं विधायी विभाग द्वारा जारी की गई है। अब बैंक गारंटी जब्ती व रिकवरी जैसे मामलों में स्टे देने का अधिकार हाईकोर्ट के बजाय अधिकरण के पास होगा। इससे अब निर्माण विभागों के विवाद आसानी से सुलझ जाएंगे। गौरतलब है कि निर्माण विभागों में योजनाएं-परियोजनाएं विभाग और ठेकेदारों के विवादों के कारण प्रभावित होती हैं।  मप्र मध्यस्थ अधिकरण को 2 साल के भीतर अनिवार्य रूप से फैसला सुनाना होगा। पुराने नियमों में विवादों के फैसले आने में कई साल लग जाते थे। विकास कार्य रुक जाते थे। अब अधिकरण को 2 साल के भीतर फैसला सुनाना होगा। असाधारण मामलों में 6 महीने की अतिरिक्त छूट मिलेगी। छूट ठोस कारण दर्ज करने के बाद मिलेगी। वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई को कानूनी मान्यता दे दी गई है। इससे दूर-दराज के ठेकेदारों और अधिकारियों का समय बचेगा। निर्माण कार्यों में शामिल सरकारी निकायों के बीच स्पष्टता बढ़ेगी। छोटे ठेकेदारों को बड़े अधिकरण से न्याय का रास्ता साफ होगा।
गौरतलब है कि मप्र में सरकारी विभागों, खासतौर पर निर्माण विभागों लोक निर्माण, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और ग्रामीण विकास में ठेकेदारों और सरकारी विभागों के बीच झगड़े लगातार सामने आते रहते हैं। ऐसे में काम प्रभावित न हो और विवाद जल्द समाप्त हो सके इसके लिए राज्य सरकार ने मप्र मध्यस्थ अधिकरण संशोधन अधिनियम 2025 लागू कर दिया है। विधि एवं विधायी विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। अधिनियम में किए गए नए प्रावधानों के अनुसार ठेकेदारों की बैंक गारंटी 50 करोड़ से 100 करोड़ रुपए तक होने पर स्टे देने का अधिकार हाईकोर्ट के पास था। नए संशोधन में यह अधिकार अब मध्यस्थ अधिकरण को दे दिया गया है। ठेकेदार की बैंक गारंटी जब्ती, रिकवरी के आदेश, या प्रॉपर्टी बेचने के आदेश पर स्टे देने का अधिकार भी हाईकोर्ट के पास था। अधिनियम में सेक्शन 17 ए और बी जोडकऱ यह अधिकार अधिकरण को दे दिया गया है। इससे हाईकोर्ट में जिन मामलों का निपटारा होता था, अब वह अधिकरण में हो सकेगा।
अधिकरण के पास होंगे बड़े अधिकार
 मप्र मध्यस्थ अधिकरण के पास बड़े अधिकार होंगे।  अधिकरण  में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी गठित की जाएगी। इस कमेटी में हाईकोर्ट के जज होंगे। उन्हें चीफ जस्टिस नामित करेंगे। दूसरे मेंबर चीफ सेक्रेटरी होंगे। उनके द्वारा नामित जीएडी या अन्य विभाग के अपर मुख्य सचिव भी हो सकते हैं। तीसरे मेंबर प्रिंसिपल सेक्रेटरी विधि होंगे। यह सर्च कमेटी हाईकोर्ट के रिटायर जज को अध्यक्ष बनाने की सिफारिश करेगी।

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