
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
राजनीति में अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार की परिभाषा वक्त के साथ बदलती रहती है। मप्र भाजपा में इसका ताजा उदाहरण पन्ना के नेता संजय नगायच हैं, जिन्हें बीत डेढ़ दशक में भाजपा के तीन प्रदेशाध्यक्षों ने पार्टी विरोधी गतिविधियों, चुनाव में बगावत और अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निलंबित और निष्कासित किया था, अब मोहन यादव सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री के दर्जे से नवाजा गया है। वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष बनाए गए नगाइच ने बुधवार को जोश और जुलूस के साथ पदभार ग्रहण कर लिया। गौरतलब है कि नगायच पर पन्ना जिला सहकारिता बैंक में ऋण घोटाले से जुड़े एक मामले में ईओडब्ल्यू में भ्रष्टाचार का केस लंबित है, जिसकी अभियोजन स्वीकृति की फाइल सरकार के पास ही लंबित हैं। इतना ही नहीं भ्रष्टाचार समेत आईपीसी 420 और पीसी एक्ट के तीन अलग-अलग आपराधिक केस भी पन्ना जिले के तीन थानों पवई, अमानगंज, शाहनगर में दर्ज हैं। जिनमें पुलिस चालान की कार्यवाही लंबित हैं। अब भाजपा के अंदर ही इस बात को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर पार्टी की ऐसी क्या मजबूरी है, जिसके चलते संजय नगायच पर अचानक पार्टी इतनी मेहरबान हो गई है।
कब-कब हुई कार्रवाई
3 जनवरी 2009- भाजपा अध्यक्ष के रूप में नरेंद्र सिंह तोमर ने वर्ष 2008 के विस चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के विरोध में काम करने पर पार्टी से निलंबित किया था। 6 जुलाई 2015- भाजपा के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष (दिवंगत) नंदकुमार चौहान ने 2013 के विस चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने व अन्य कारणों से नगायच को नोटिस के बाद पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किया था।
