
- परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा प्रकरण…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। सौ करोड़ से अधिक की संपत्ति के मालिक परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभशर्मा के भोपाल स्थित ठिकानों पर लोकायुक्त के छापों को डेढ़ साल से ज्यादा समय हो चुका है। प्रकरण में महीने भर बाद संज्ञान लेने वाले प्रवर्तन निदेशालय ने तीन महीने में चालान पेश कर दिया था। लेकिन नकदी, सोना-चांदी सहित कई संपत्तियों के दस्तावेज जब्त करने वाली भोपाल लोकायुक्त की टीम इस मामले में अब तक न्यायालय में आरोप पत्र पेश नहीं कर सकी है। लोकायुक्त प्रकरण में जमानत, ईड़ी में नहीं – सौरभ के ठिकानों पर लोकायुक्त की कार्रवाई को डेढ़ साल पूरे हो चुके हैं। लोकायुक्त टीम अब तक न्यायालय में आरोप पत्र पेश नहीं कर सकी है। जबकि महीनेभर बाद कार्रवाई करने वाली प्रवर्तन निदेशालय की टीम 8 अप्रैल 2025 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। खास बात यह है कि लोकायुक्त प्रकरण में तीनों ही आरोपी सौरभ, चेतन और शरद को आरोप पत्र में देरी के चलते भोपाल जिला न्यायालय से जमानत मिल चुकी है। लेकिन प्रवर्तन निदेशालय प्रकरण में तीनों आरोपियों की जमानत उच्च न्यायालय से भी निरस्त हो चुकी है। हालांकि परिजनों और कंपनियों को भोपाल जिला न्यायालय ने 50-50 लाख के मुचलके पर जमानत दे दी है।
ईडी की प्राथमिकी में परिजन-रिश्तेदार भी आरोपी
लोकायुक्त की कार्रवाई शुरू से ही संदेह के घेरे में रही। जिन ठिकानों पर लोकायुक्त की टीमें कार्रवाई कर रही थीं। उन्हीं ठिकानों से करोड़ों रुपये नकदी और सोना निकल जाने पर कार्रवाई पर सवाल खड़े हुए। दो दिन की कार्रवाई के बाद भी लोकायुक्त टीम आरोपी सौरभ और चेतन के ठिकानों से मिलीं अचल संपत्तियों की संख्या तक छुपाए रही। खास बात यह है कि लोकायुक्त टीम ने इस प्रकरण में केवल सौरभ, उसके दोस्त चेतन गौर और शरद जायसवाल को ही आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया था।
