सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली तो हाईकोर्ट ने सरकार को दी आखिरी मोहलत

  • 70 हजार शिक्षकों के सेवा लाभ का मामला निर्णायक दौर में

गौरव चौहान
मध्य प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों की संविलियन से पहले की सेवा को मान्यता देने का मामला अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका खारिज होने के बाद जबलपुर हाईकोर्ट ने भी सरकार को आदेश के पालन के लिए अंतिम चार सप्ताह का समय दिया है। इससे वर्षों से लंबित वरिष्ठता, वेतन निर्धारण, वेतनवृद्धि, पेंशन और एरियर जैसे सेवा लाभों को लेकर शिक्षकों की उम्मीद बढ़ी है। जबलपुर हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति दीपक खोट की एकलपीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को अदालत के पूर्व आदेश का पालन करने के लिए चार सप्ताह की मोहलत दी है। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। अब सरकार को इस अवधि में आदेश के अनुपालन की दिशा में कार्रवाई करनी होगी।
इस मामले में हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की एसएलपी खारिज कर दी। इसके बाद हाईकोर्ट में आदेश के पालन को लेकर अवमानना याचिका पर सुनवाई शुरू हुई। इसी सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह का अंतिम समय दिया है। शिक्षक संगठनों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट से चुनौती खारिज होने के बाद अब मामले में सरकार के सामने हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन करने का रास्ता बचता है। संगठनों का कहना है कि शिक्षकों को उनकी प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा लाभ दिए जाने की मांग लंबे समय से लंबित है।
2018 को कटऑफ मानने पर विवाद
मामले की शुरुआत संविलियन व्यवस्था में 2018 से पहले की शिक्षकीय सेवा को शामिल नहीं किए जाने से हुई थी। राजेश पांडेय सहित 497 अध्यापकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सरकारी निर्णय को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि उनकी सेवा अवधि की गणना संविलियन की तारीख से नहीं, बल्कि प्रथम नियुक्ति की तारीख से की जाए। शिक्षकों का पक्ष था कि पहले से की गई सेवा को नजरअंदाज करने से उनकी वरिष्ठता और दूसरे वित्तीय लाभ प्रभावित हो रहे हैं। इसी आधार पर प्रथम नियुक्ति से सेवा अवधि की गणना की मांग की गई थी।
आदेश लागू हुआ तो बदल सकता है वेतन और एरियर
प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा लाभ मिलने की स्थिति में शिक्षकों के वेतन निर्धारण पर भी असर पड़ सकता है। उपलब्ध दावे के मुताबिक, कुछ शिक्षकों के वेतन में हर महीने करीब 15 से 20 हजार रुपए तक का अंतर बन सकता है। वहीं, 1 जनवरी 2006 से छठवें वेतनमान की पात्रता मान्य होने पर पुराने वेतन का पुनर्निर्धारण और एरियर का भुगतान भी मुद्दे का हिस्सा बन सकता है। शिक्षक संगठनों के अनुमान के अनुसार, पात्रता के आधार पर प्रति शिक्षक करीब 7 से 8 लाख रुपए तक एरियर बन सकता है। हालांकि वास्तविक राशि प्रत्येक शिक्षक की नियुक्ति तिथि, सेवा रिकॉर्ड, वेतन निर्धारण और लागू नियमों के आधार पर अलग-अलग होगी।
सरकार के सामने अब अनुपालन की चुनौती
हाईकोर्ट की चार सप्ताह की मोहलत के बाद सरकार के सामने अब यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि वह अदालत के आदेश को किस तरह लागू करती है। हजारों शिक्षकों पर असर डालने वाले इस मामले में सेवा रिकॉर्ड, वरिष्ठता सूची और वेतन निर्धारण को नए सिरे से देखना पड़ सकता है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि मामला अब लंबी कानूनी प्रक्रिया से निकलकर आदेश के क्रियान्वयन के चरण में पहुंच गया है। उनका कहना है कि सरकार को अब बिना और देरी किए आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई करनी चाहिए।
600 से ज्यादा अनुकंपा नियुक्तियों पर भी राहत
इसी बीच स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से दिवंगत शिक्षकों और कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने की कार्रवाई भी चर्चा में है। शिक्षक संगठनों के अनुसार, दो दिनों के भीतर 600 से अधिक आश्रितों को नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं। संगठनों ने इसे लंबित मामलों के त्वरित निपटारे की दिशा में कदम बताते हुए सरकार और विभागीय अधिकारियों का आभार जताया है। अब 70 हजार शिक्षकों के सेवा लाभ से जुड़े मामले में अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। 21 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होने वाली सुनवाई में सरकार की ओर से आदेश के अनुपालन को लेकर की गई कार्रवाई की स्थिति सामने आ सकती है।

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