ब्रिज कार्पोरेशन के इंजीनियरों को मिलेगा वरिष्ठता का लाभ

  • मप्र हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार की कवायद
  • गौरव चौहान
वरिष्ठता का लाभ

मप्र ब्रिज कार्पोरेशन से लोक निर्माण विभाग आए इंजीनियरों को वरिष्ठता का लाभ दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश पर प्रदेश सरकार 32 साल से पदोन्नति के पुराने गतिरोध को खत्म करने जा रही है। कोर्ट ने माना कि जब किसी संस्था का सरकार में संविलियन होता है, तो कर्मचारी की पूर्व में की गई सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने आदेश दिया कि विभाग 30 दिनों में वरिष्ठता सूची अपडेट करे। इन इंजीनियरों को पुरानी तारीख से नोशनल सीनियरिटी दी जाए। उन्हें वेतन वृद्धि और पदोन्नति का लाभ मिले। जो इंजीनियर केस चलने के दौरान रिटायर हो गए हैं, उनकी पेंशन और अन्य लाभों की गणना भी नई वरिष्ठता के आधार पर की जाए। इससे सहायक यंत्री, जो वर्षों से एक ही पद पर अटके थे, अब कार्यपालन यंत्री के पद पर पदोन्नत हो सकेंगे।
जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार मप्र ब्रिज कार्पोरेशन से मूल विभाग पीडब्ल्यूडी में संविलयन होकर आए इंजीनियरों को वरिष्ठता उनकी ज्वाइनिंग डेट से देने की तैयारी कर रही है। इसमें पशोपेश इस बात को लेकर है कि इन इंजीनियरों को वरिष्ठता दी गई, तो अब तक जो चीफ इंजीनियर और ईएनसी बने हैं, वे वरिष्ठता क्रम में उनसे नीचे आ जाएंगे। साथ ही ब्रिज कार्पोरेशन के जिन इंजीनियरों को यह फायदा मिलना है, उनमें से अधिकतर रिटायर हो गए हैं। इसलिए पेंशन में ही ज्वाइनिंग डेट से, जितने समय तक नौकरी की है, उतनी वरिष्ठता का निर्धारण कर पेंशन प्रकरणों का निपटारा कर दिया जाए। गौरतलब है कि 1992-93 में मप्र ब्रिज कार्पोरेशन में कार्यरत 400 इंजीनियर और सब इंजीनियरों का संविलियन पीडब्ल्यूडी में कर दिया गया। उस समय विभाग ने शर्त रखी थी कि इन इंजीनियरों की वरिष्ठता पीडब्ल्यूडी में कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से गिनी जाएगी। नुकसान यह हुआ कि जो इंजीनियर ब्रिज कार्पोरेशन में 1985 या 1988 88 से काम कर रहे थे, वे विभाग में आने के बाद अचानक अपने ही बैच के जूनियर इंजीनियरों से पीछे हो गए। इस विसंगति के कारण उनकी पदोन्नति रुक गई। कई इंजीनियर बिना उचित पद पाए ही रिटायर होने पर पहुंच गए। अब विभाग को 30 से 90 दिनों के भीतर नई ग्रेडेशन लिस्ट तैयार व अपडेट करनी होगी।
प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता
गौरतलब है कि मप्र हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि पूर्व में ब्रिज कार्पोरेशन के इंजीनियरों की वरिष्ठता उनके विभाग में आने की तारीख से नहीं, बल्कि ब्रिज कार्पोरेशन में उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से मानी जाए। इससे एई, सब इंजीनियर का 32 साल से पदोन्नति का पुराना गतिरोध खत्म हो जाएगा। ये इंजीनियर अपने बैच के उन साथियों के साथ कार्यपालन यंत्री और एसई की दौड़ में शामिल हो जाएंगे। विभाग में अक्सर जूनियरों को उच्च प्रभार दे दिया जाता था। वरिष्ठता सूची सुधरने से पुराने अनुभवी इंजीनियरों को जिम्मेदारी मिलेगी। इंजीनियरों ने अपने ही बैच के इंजीनियरों से जूनियर करार दिए जाने के विरोध में पहले ट्रिब्यूनल स्तर पर, फिर हाईकोर्ट में लंबी लड़ाई लड़ी।

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