
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। इंदौर शाखा अपराध यानी क्राइम ब्रांच एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। लोकायुक्त की इंदौर यूनिट ने रिश्वतखोरी के एक मामले का खुलासा करते हुए क्राइम ब्रांच के तत्कालीन निरीक्षक, एक आरक्षक, एक प्राइवेट ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हडक़ंप मच गया है। मामला इंदौर शहर के तुलसी नगर की रहने वाली प्रीति हजारी का है। उनके बेटे प्रांजल हजारी को क्राइम ब्रांच की टीम ने एक शिकायत के सिलसिले में दफ्तर तलब किया था। प्रांजल के खिलाफ किसी मामले कार्रवाई में न करने और उन्हें सुरक्षित छोडऩे की एवज में तत्कालीन टीआई सुजीत श्रीवास्तव और अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा एक लाख बीस हजार रुपये की रिश्वत ली थी। लोकायुक्त पुलिस इस पूरे रैकेट की गहराई से छानबीन कर यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि केस में फंसाने की धमकी देकर कितने अन्य लोगों से अवैध वसूली की गई है।
शिकायत के साथ दे दिए भुगतान के सबूत
प्रांजल के परिजनों ने 20 मार्च को यूपीआई के जरिए दीपक पटेल नाम के एक व्यक्ति के खाते में 50,800 ट्रांसफर किए, जिसके बाद प्रांजल को छोड़ा गया। बाकी बचे 70 हजार अगले दिन नगद वसूले गए। इस व्यक्ति का खाता नंबर सुजीत श्रीवास्तव ने ही दिया था। प्रांजल ने क्राइम ब्रांच से लौटने के बाद हिम्मत दिखाई और लोकायुक्त एसपी डॉ. राजेश सहाय को तमाम तकनीकी सबूतों के साथ लिखित शिकायत दी। गंभीरता को देखते हुए जब सत्यापन कराया गया तो आरोप पूरी तरह सही पाए गए। लोकायुक्त पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को क्राइम ब्रांच के तत्कालीन इंस्पेक्टर सुजीत श्रीवास्तव, प्रायवेट ड्राइवर अभय सिंह, तत्कालीन आरक्षक विकास सेंधव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
