डीपीसी के बाद भी प्रमोशन आदेश अटके

  • रिटायरमेंट की तारीख नजदीक देख कर्मचारियों की बढ़ी चिंता

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम।  मध्यप्रदेश में विभागीय पदोन्नति समितियों (डीपीसी) की बैठकें होने के बावजूद कई विभागों में प्रमोशन आदेश जारी नहीं हो पा रहे हैं। डीपीसी को हुए पखवाड़े से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अधिकारी-कर्मचारी अब भी पदोन्नति आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सबसे ज्यादा चिंता उन कर्मचारियों की है, जिनकी सेवानिवृत्ति इसी महीने होनी है। उन्हें आशंका है कि आदेश में देरी के कारण वे पदोन्नति के लाभ से वंचित हो सकते हैं। सरकार की ओर से डीपीसी के तत्काल बाद पदोन्नति आदेश जारी करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद राज्य से लेकर जिला स्तर तक कई विभागों में प्रक्रिया अटकी हुई है। आयुष, आबकारी, नर्मदा घाटी, पशुपालन सहित कई विभागों में डीपीसी होने के बाद भी आदेश जारी नहीं हुए हैं।
पदोन्नति का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब डीपीसी में पात्र अधिकारियों-कर्मचारियों के नाम तय हो चुके हैं तो आदेश जारी करने में इतना समय क्यों लग रहा है? वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, चिकित्सा शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, खनिज, जनजातीय कार्य, आर्थिक एवं सांख्यिकी और गृह विभाग में भी डीपीसी के बाद पदोन्नति आदेश लंबित होने की बात सामने आ रही है। कर्मचारियों का कहना है कि डीपीसी और पदोन्नति आदेश के बीच अनिश्चित अंतराल होने से पूरी प्रक्रिया प्रभावित होती है। कई बार कर्मचारी वर्षों तक पदोन्नति की प्रतीक्षा करते हैं और जब प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो आदेश जारी होने में ही देरी हो जाती है।
रिटायरमेंट वाले कर्मचारियों की सबसे ज्यादा चिंता
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू उन कर्मचारियों से जुड़ा है, जिनकी सेवानिवृत्ति इसी महीने होनी है। पदोन्नति आदेश समय पर जारी नहीं होने पर उन्हें आशंका है कि वे सेवा अवधि में मिलने वाले पदोन्नति लाभ से वंचित हो सकते हैं। पिछले महीने भी कुछ कर्मचारी बिना पदोन्नति आदेश के ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अब अगस्त में रिटायर होने वाले कर्मचारियों को डर है कि कहीं उनके साथ भी यही स्थिति न दोहराई जाए। कर्मचारियों का कहना है कि पदोन्नति की प्रक्रिया में देरी का सीधा असर उनकी सेवा संबंधी लाभ और करियर रिकॉर्ड पर पड़ता है, इसलिए डीपीसी के बाद आदेश जारी करने की समय-सीमा तय होना जरूरी है।
जुलाई की देरी से बढ़ी अगस्त की चिंता
पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों के अनुसार जुलाई की शुरुआत में कई विभागों में डीपीसी हुई थी, लेकिन इसके बाद भी आदेश जारी होने में देरी हुई। अब अगस्त में भी वही स्थिति बने रहने की आशंका है। कर्मचारियों को चिंता है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी फाइलों को अलग-अलग स्तर पर आगे बढ़ाने में समय लेते रहे तो पूरा महीना निकल सकता है और कई कर्मचारी पदोन्नति के इंतजार में ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
डीपीसी के बाद देरी पर जवाबदेही तय हो
पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे अधिकारी-कर्मचारियों का कहना है कि सरकार यदि इस प्रक्रिया की नियमित समीक्षा करे तो यह भी सामने आ सकता है कि किन विभागों में आदेश जारी करने में अनावश्यक देरी हो रही है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। फिलहाल डीपीसी पूरी होने के बावजूद आदेश का इंतजार कर रहे कर्मचारियों की निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर हैं। खासकर सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों के लिए पदोन्नति का हर बीतता दिन अब महत्वपूर्ण हो गया है।

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