फिर चर्चाओं में छिंदवाड़ा का विकास मॉडल

नाथ भी चुनौती को स्वीकारते आ रहे हैं नजर

 छिंदवाड़ा


गौरव चौहान/बिच्छू डॉट कॉम।

बीते चार दशकों में छिंदवाड़ा को अपना अजेय गढ़ बना चुके कमलनाथ का विकास मॉडल एक बार फिर चर्चाओं में है। दरअसल इसी विकास की वजह से कमलनाथ और उनका परिवार लगातार चुनाव जीतता आ रहा है। फिर चाहे उनकी पत्नी हो या फिर बेटा। यही नहीं वे जिस पर हाथ रख देते हैं, वह भी विधानसभा का चुनाव आसानी से जीत जाता है। यही वजह है कि बीते चालीस सालों के इस सूखे को समाप्त करने के लिए भाजपा को अपने दूसरे सबसे बड़े चेहरे केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस क्षेत्र में उतारना पड़ा है। शाह द्वारा इस क्षेत्र का प्रभार लेते ही प्रदेश की समूची भाजपा जो अब तक छिंदवाड़ा के मामले में बैकफुट पर दिखती थी, वह अब आक्रामक नजर आने लगी है।
उधर, इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ और सांसद नकुल नाथ को अब भी अपने कामकाज पर भरोसा है। इसकी वजह है उनके द्वारा अपने इलाके में कराए गए विकास काम। अगर छिंदवाड़ा शहर की बात की जाए तो वहां पर चमचमाती सड़कें, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, फुटवियर डिजाइन, ड्राइविंग सेंटर, गारमेंट व कंप्यूटर इंस्टीट्यूट जैसे संस्थानों में प्रशिक्षण देकर नौकरी के हिसाब से युवाओं को तैयार किया जाता है। यहां पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे गांवों से आते हैं। यही नहीं शहर में आते ही किसी देश के बड़े महानगर की अनुभूति होने लगती है। चौड़ी सड़कों के बीच साफ सफाई व अतिक्रमण से दूर फुटपाथ दिल्ली मुंबई के पॉश इलाका नजर आता है। यह बात अलग है कि शाह के दौरे के तत्काल बाद कमलनाथ और उनके सांसद बेटे नकुलनाथ ने भाजपा को अप्रभावी बनाए रखने के लिए क्षे्रत्र का दौरा करना तय कर लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक दिवसीय प्रवास के ठीक पहले 19 से 22 मार्च तक वे जिले में ही रहे। उन्होंने कार्यकर्ताओं की बैठक ली। उन्होंने सौंसर विधानसभा क्षेत्र में बड़ी सभा भी की। अब 30 मार्च को नकुल नाथ छिंदवाड़ा पहुंचेंगे और आंचल कुंड में दादाजी के दरबार भी जाएंगे। शाह ने भी आदिवासियों के इस तीर्थ स्थल पर जाकर आदिवासियों को साधने के लिए  माथा टेका था। दरअसल अब प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में महज सात माह का ही समय रह गया है। ऐसे में भाजपा ने कमल नाथ को उन्हीं के गढ़ में घेरने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। इसी वजह से केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को इस संसदीय सीट का प्रभार सौंपा गया है। गृह मंत्री अमित शाह सीधे तौर पर इस सीट को जीतने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा लगातार छिंदवाड़ा का दौरा कर रहे हैं।
यह है विकास का मॉडल
 छिंदवाड़ा के पास विकास का अपना मुकम्मल मॉडल है। जिसका श्रेय कमलनाथ को दिया जाता है। इस शहर में कमलनाथ ने ना केवल सड़कों का जाल बिछाया बल्कि शहर को एक एजुकेशन हब के तौर पर भी विकसित किया।कहा जाता है कि कमलनाथ ने जिस भी मंत्रालय को संभाला उससे छिंदवाड़ा को कोई न कोई सौगात जरूर मिली है। अब  छिंदवाड़ा से तीन राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं और वहां से दिल्ली के लिए सीधी रेल सेवा भी है। यही नहीं, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेज के अलावा फुटवेयर डिजाइन सेंटर, नॉलेज सिटी, 6 केंद्रीय विद्यालय, एक नवोदय स्कूल समेत एटीडीसी, सीआईआई और एनआईआईटी जैसे बड़े स्किल सेंटर्स हैं। उद्योगों की बात करें तो हिंदुस्तान यूनिलीवर, ब्रिटानिया, रेमंड, भंसाली समेत कई निजी कंपनियों ने जिले में उद्योग लगाए हैं। यस बैंक, स्टैण्डर्ड चार्टर्ड बैंक जैसे राष्ट्रीकृत बैंक छिंदवाड़ा में मौजूद हैं। कमलनाथ की सबसे ख़ास बात यह भी है कि उनका कार्यालय और घर 24 घंटे कार्यकर्ताओं के लिए खुला रहता है। महज 22 साल की उम्र में कांग्रेस का हाथ थामने वाले कमलनाथ नौ बार सांसद रह चुके है। वो 34 साल की उम्र में छिंदवाड़ा से जीत कर पहली बार लोकसभा पहुंचे थे। छिंदवाड़ा की जनता में कमलनाथ की गहरी पैठ मानी जाती है। यहां की जनता के लिए वो दशकों से मुख्यमंत्री जैसे ही हैं। कमलनाथ एक आंधी  है, छिंदवाड़ा का गांधी है, जैसे नारे उनकी लोकप्रियता को दर्शाते है। छिंदवाड़ा के विकास मॉडल की तारीफ वहां की जनता के साथ कमलनाथ के विरोधी भी करते हैं। कमलनाथ और छिंदवाड़ा एक दूसरे के पर्याय माने जाते हैं। गौरतलब है कि लोकसभा में कमलनाथ छिंदवाड़ा की नौ बार नुमाइंदगी कर चुके हैं। जिससे साफ जाहिर होता है कि उनकी छिंदवाड़ा के लोगों के बीच कितनी गहरी पैठ है। छिंदवाड़ा का आज जो भी नाम है उसका एक बड़ा कारण कमलनाथ को माना जा सकता हैं। आज से 30 साल पहले तक छिंदवाड़ा महज जिला मुख्यालय के रूप में ही जाना जाता था लेकिन 1980 के बाद जब से कमलनाथ ने यहां की कमान संभाली लगातार विकास करता हुआ छिंदवाड़ा देश के नक्शे में अपना अलग स्थान बना चुका है।
कांग्रेस भी मैदानी स्तर पर सक्रिय
उधर, कांग्रेस ने भी अपने इस सुरक्षित गढ़ को और मजबूत करने के लिए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। कांग्रेस कमलनाथ और नकुलनाथ के भरोसे ही मैदान में है। कांग्रेस ने यहां किसी अन्य बड़े नेता का कार्यक्रम अभी तक नहीं बनाया है। इसकी कोई योजना है, यह भी अभी सामने नहीं आया है। जो रणनीति दिख रही है, उसके मुताबिक कांग्रेस नेताओं का फोकस बड़ी रैली या सभाओं पर नहीं, बल्कि तहसील और ग्राम पंचायत स्तर तक सभा करने पर है। छिंदवाड़ा कांग्रेस का मजबूत गढ़ है, यहां लोकसभा सहित सातों विधायक और महापौर कांग्रेस के है।
कांग्रेस को मिल गया घेरने का मौका
दरअसल लगातार प्रदेश के तमाम बड़े नेताओं के अलावा मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक छिंदवाड़ा के दौरों पर कांग्रेस नेता सरकार की किसी बड़ी योजना नहीं देने पर सवाल खड़े कर हमलावर होने लगे हैं। इस मामले में जुन्नारदेव के कांग्रेस विधायक सुनील उइके का कहना है कि भाजपा के केंद्र और राज्य स्तर के नेता लगातार दौरे कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने जिले को कोई सौगात नहीं दी। कमल नाथ पर जुबानी हमले किए जा रहे हैं, लेकिन इससे कांग्रेस को और फायदा ही हो रहा है।
विपक्ष भी करता है तारीफ
भाजपा की पूर्व राज्यसभा सदस्य और अनुसूचित जनजाति आयोग की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अनुसुइया उइके ने कमलनाथ के छिंदवाड़ा मॉडल की तारीफ करते हुए कहा था कि बतौर अनुसूचित जनजाति आयोग की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मैंने भारत में 29 राज्यों का दौरा किया है, लेकिन मुझे छिंदवाड़ा सबसे ज्यादा पसंद है। भले ही है कि हमारी विचारधाराएं (बीजेपी और कांग्रेस की) अलग हैं, लेकिन मैं देश में व्यवस्थित विकास के एक आदर्श मॉडल के रूप में छिंदवाड़ा जिले को बदलने के लिए मैं व्यक्तिगत तौर पर और लोगों की ओर से सांसद कमल नाथ जी को बधाई देती हूं।

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