
- एमपी में यूसीसी पर रार
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए सोमवार को प्रशासन अकादमी में राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की गई। राजनीतिक दलों के लिए बुलाई गई इस बैठक में भाजपा के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी और एसएस उप्पल ने भाग लिया। उन्होंने विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने के कानूनों में एकरूपता के साथ-साथ विवाह में पारदर्शिता लाने के सुझाव दिए। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस महत्वपूर्ण बैठक से पूरी तरह दूरी बनाए रखी और उनका कोई भी प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं हुआ।
भाजपा प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए अन्य महत्वपूर्ण सुझाव: विवाह की कानूनी आयु सभी धर्मों में पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष का पालन न करने पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान हो। सभी विवाहों में कानूनी रूप से पंजीकरण अनिवार्य हो। उत्तराधिकार और संपत्ति का अधिकार, लैंगिक समानता, पैतृक और स्व-अर्जित संपत्ति में बेटे और बेटी को बिल्कुल समान अधिकार देने का प्रावधान हो। पति/पत्नी के अधिकार, जीवन साथी की मृत्यु के बाद संपत्ति पर जीवित साथी के अधिकारों को सुरक्षित और एक समान प्रावधान हो। गोद लिए गए बच्चे को जैविक बच्चे के समान ही संपत्ति और परिवार में अधिकार हो। तलाक के बाद पत्नी, बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता के भरण-पोषण के लिए एक समान और न्यायसंगत नियम तय हों। विवाह पंजीकरण, तलाक के आवेदन, गोद लेने की प्रक्रिया और वसीयत को प्रमाणित करने के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल पोर्टल हो। विवाह के तुरंत बाद डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित सर्टिफिकेट जारी हो, जो सभी सरकारी और वित्तीय कार्यों में मान्य हो।
एनआरआई विवाहों पर सख्ती
राहुल कोठारी ने सुझाव दिया कि देशहित और बेटियों की सुरक्षा के लिए यह बेहद जरूरी है कि यदि कोई एनआरआई भारत में शादी करता है, तो उसका पंजीकरण और पासपोर्ट लिंकिंग सात दिनों के भीतर अनिवार्य हो, ताकि शादी करके विदेश भागने और पत्नियों को लावारिस छोडऩे के मामलों पर पूरी तरह रोक लग सके। शादी के बाद पति-पत्नी द्वारा खरीदी गई किसी भी संपत्ति पर, तलाक की स्थिति में दोनों का 50-50 प्रतिशत का समान अधिकार हो। विवाह, तलाक या गुजारे भत्ते से जुड़े पारिवारिक विवादों का निपटारा अधिकतम छह माह के भीतर करने के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक एवं फैमिली कोर्ट एवं मध्यस्थता केंद्र अनिवार्य हो।
