खरीफ की 81 प्रतिशत बोवनी पूरी

खरीफ
  • किसानों का नगदी फसलों पर जोर

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। नगदी फसलें राज्य के किसानों की पहली पसंद बनी हुई हैं। खरीफ फसल बुवाई के अंतिम चरण में उड़द और कपास जहां लक्ष्य को पार कर चुके हैं। वहीं दूसरी ओर मक्का और सोयाबीन का दबदबा किसानों के बीच कायम है। 150.45 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले राज्य में अब तक 122.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है। लक्षित क्षेत्र का यह आंकड़ा 81.4 प्रतिशत है। मप्र कृषि विभाग के आंकड़ों की माने तो 22 जुलाई तक राज्य में किसानों ने उड़द और कपास की बोनी में ज्यादा रुचि दिखाई है। जिससे लक्षित रकबे से उड़द 116 प्रतिशत और कपास की बोवनी 101 प्रतिशत अधिक हुई है। हालांकि मूंगे की बुवाई में कैमी दिखाई देती है। राज्य को सोया प्रदेश में सुसार करने वाली फसल सोयाबीन पिछले वर्ष हुई बोनी 5.1.01 लाख हैक्टेयर के लगभग बराबर है। इस वर्ष यह 54,09 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध 51.40 लाख हेक्टेयर में बोई जा चुकी है। इधर मक्का भी 27.53 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 25.61 लाख हेक्टेयर में बोया जा चुका है। जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 24.61 लाख हेक्टेयर बुवाई हुई थी।
असंतुलित वर्षा से प्रभावित हुई धान की बुवाई
मप्र असंतुलित वर्षा का असर धान की बुवाई पर दिखा है। लक्ष्य के विपरीत यहां सिर्फ 49 प्रतिशत ही बुवाई हो पाई है। इस वर्ष 39.63 लाख हेक्टेयर के विपरीत 19.54 हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई हो सकी है। जबकि इस अवधि में पिछले वर्ष 27.39 हेक्टेयर क्षेत्र में किसान बुवाई कर चुके थे।
बढ़ा रकबा, खरीफ में अग्रणी स्थान बनाएगा राज्य
वर्षा सामान्य बनी रहती है तो मध्य प्रदेश एक बार फिर देश के प्रमुख खरीफ उत्पादक राज्यों में अग्रणी स्थान बनाए रख सकता है। वजह यह भी है कि पिछले साल की तुलना में रकबे में करीब 19 प्रतिशत वृद्धि हुई है। पिछले साल बुवाई क्षेत्रफल 128.18 लाख हेक्टेयर था।
फसल विविधीकरण की ओर किसान
बुवाई के रूझान को लेकर भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष कमल सिंह आंजना का कहना है कि राज्य का किसान फसल विविधीकरण की ओर धीरे-धीरे बढ़ रहा है, विशेषकर मक्का, अरहर और कपास की ओर किसानों ने रुझान दिखाया है। यह बात जरूर है कि मक्का किसानों की नई पसंद बनकर उभर रही है, जिसका कारण बेहतर बाजार, उद्योगों की मांग और अपेक्षाकृत स्थिर कीमतें हैं।

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