
- आयुष्मान भारत योजना में भुगतान के लिए स्टाफ की संख्या का खेल
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। आयुष्मान भारत योजना में मरीजों के इलाज के नाम पर अस्पतालों में स्टाफ और सुविधाओं की उपलब्धता का सत्यापन कितना अहम है, इसका एक मामला राजधानी में सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की जांच में करोंद स्थित सृष्टि हॉस्पिटल के रिकॉर्ड में दर्ज डॉक्टरों और वास्तविक उपलब्ध स्टाफ की संख्या में बड़ा अंतर सामने आया। जांच एजेंसी के अनुसार अस्पताल ने आयुष्मान पोर्टल पर 45 डॉक्टर और स्टाफ की प्रविष्टियां दर्ज की थीं, जबकि मौके पर करीब 15 डॉक्टर ही उपलब्ध पाए गए।
ईओडब्ल्यू ने अस्पताल संचालक राजकुमार सूर्यवंशी और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4), 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। एजेंसी अब यह जांच कर रही है कि आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल को कितनी राशि का भुगतान हुआ और उसमें से कितनी राशि नियमों के विपरीत प्राप्त की गई।
संख्या बढ़ाने के लिए नाम दोहराए
जांच में सामने आया कि पोर्टल पर दर्ज 45 प्रविष्टियों में कई डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के नाम एक से अधिक बार दर्ज किए गए थे। आरोप है कि कुछ नामों को चार-चार बार दोहराकर अस्पताल में आवश्यक स्टाफ की संख्या पूरी दिखाई गई। खास बात यह रही कि इन 45 प्रविष्टियों में दर्ज मोबाइल नंबर अस्पताल संचालक का ही बताया गया है। इससे जांच एजेंसी के सामने यह सवाल खड़ा हुआ कि क्या आयुष्मान योजना के लिए निर्धारित मानव संसाधन संबंधी शर्तों को पूरा दिखाने के लिए कागजों पर अतिरिक्त स्टाफ खड़ा किया गया था।
709 मरीजों का रिकॉर्ड, लेकिन दस्तावेज नहीं
आयुष्मान के रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2025 में अस्पताल में 709 मरीजों के इलाज दर्ज हैं। जांच के दौरान ईओडब्ल्यू ने अस्पताल प्रबंधन से डॉक्टरों के नियुक्ति-पत्र, वेतन भुगतान, उपस्थिति रजिस्टर, पैथोलॉजी संचालन की अनुमति और मरीजों की उपचार संबंधी फाइलें मांगीं। एजेंसी के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन इनसे संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। जांच में स्टाफ की वास्तविक उपलब्धता और पोर्टल पर दर्ज जानकारी के बीच अंतर मिलने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया। अब एजेंसी मरीजों के उपचार रिकॉर्ड और शासन से हुए भुगतान की भी पड़ताल कर रही है।
जिस पैथोलॉजिस्ट का नाम दर्ज, उसने काम से किया इनकार
जांच में पैथोलॉजी से जुड़ी एक और गंभीर बात सामने आई। अस्पताल के पोर्टल रिकॉर्ड में एक महिला पैथोलॉजिस्ट का नाम चार स्थानों पर दर्ज था। पूछताछ में संबंधित डॉक्टर ने बताया कि उन्होंने कभी सृष्टि हॉस्पिटल में काम नहीं किया और न ही अस्पताल को अपने दस्तावेज अथवा नाम इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। बताया गया कि डॉक्टर ने अस्पताल से अपना नाम हटाने के लिए भी कहा था, लेकिन इसके बावजूद उनका नाम रिकॉर्ड में बना रहा।
दूसरे डॉक्टर के नाम से रिपोर्ट जारी करने का आरोप
ईओडब्ल्यू की जांच में अस्पताल की पैथोलॉजी रिपोर्टों पर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि डिपार्टमेंट ऑफ पैथोलॉजी के नाम से ऐसी रिपोर्टें जारी की गईं, जिन पर एमडी पैथोलॉजिस्ट का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर और सील का इस्तेमाल किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार संबंधित डॉक्टर से रिपोर्टों पर किए गए हस्ताक्षरों के बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने इन हस्ताक्षरों को अपना मानने से इनकार किया। उनका कहना था कि रिपोर्टों पर मौजूद हस्ताक्षर उनके वास्तविक हस्ताक्षरों से अलग हैं।
अब भुगतान और नेटवर्क की जांच
एफआईआर दर्ज होने के बाद ईओडब्ल्यू अब यह पता लगा रही है कि अस्पताल ने आयुष्मान योजना में कितने मरीजों के उपचार का दावा किया, शासन से कितनी राशि प्राप्त की और इनमें से कितने दावे वास्तविक उपचार एवं उपलब्ध सुविधाओं से जुड़े थे। साथ ही फर्जी स्टाफ और रिपोर्ट तैयार करने में अस्पताल के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित फर्जीवाड़े से शासन को वास्तविक आर्थिक नुकसान कितना हुआ।
