हर मंत्री की तैयार… होगी जमीनी रिपोर्ट

  • चिंतन शिविर में योजनाओं से लेकर संकल्प पत्र तक की होगी समीक्षा
  • गौरव चौहान
जमीनी रिपोर्ट

मध्यप्रदेश में 2027 के नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों से पहले सरकार अब अपनी पूरी मशीनरी को चुनावी मोड में लाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सितंबर में मंत्रियों के साथ प्रस्तावित चिंतन शिविर में सिर्फ सरकार के ढाई साल के कामकाज की समीक्षा नहीं करेंगे, बल्कि मंत्रियों की सक्रियता, विभागों की उपलब्धियों और जमीनी स्तर पर योजनाओं के असर का भी आकलन किया जाएगा। इस समीक्षा के आधार पर तैयार होने वाली रिपोर्ट आगे सरकार और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। सूत्रों के मुताबिक चिंतन शिविर के बाद मंत्रिपरिषद में फेरबदल की संभावनाएं भी बन सकती हैं। यानी इस बार मंत्रियों का मूल्यांकन केवल विभागीय कामकाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले चुनावों के लिहाज से उनकी राजनीतिक और प्रशासनिक उपयोगिता भी देखी जाएगी। चिंतन शिविर से पहले राज्य शासन ने जिलों से सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों की रिपोर्ट तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। संभागायुक्तों, कलेक्टरों और जिला पंचायतों के सीईओ से अपने-अपने क्षेत्रों में योजनाओं की प्रगति और विकास कार्यों की स्थिति की जानकारी जुटाने को कहा गया है। इन रिपोर्टों के जरिए यह देखा जाएगा कि सरकार की योजनाएं कागज से निकलकर जमीन पर कितनी पहुंची हैं और उनका जनता पर कितना प्रभाव पड़ा है। इसके साथ ही संबंधित मंत्रियों की अपने प्रभार वाले जिलों में सक्रियता को भी कसौटी पर रखा जा सकता है।
कमजोर जिलों में प्रशासनिक बदलाव संभव
चिंतन शिविर का एक बड़ा हिस्सा मैदानी प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा पर भी केंद्रित रह सकता है। ऐसे संभाग और जिले चिन्हित किए जाएंगे जहां सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों के अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं। सरकार यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इसके पीछे प्रशासनिक कमजोरी है, अधिकारियों की कार्यप्रणाली है या योजनाओं के क्रियान्वयन में कोई दूसरी समस्या है। जरूरत महसूस होने पर संबंधित जिलों और संभागों में प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले भी किए जा सकते हैं। मंत्रालय स्तर पर भी वरिष्ठ अधिकारियों के पास मौजूद अतिरिक्त विभागों का बोझ कम करने पर विचार संभव है। हालांकि इस स्तर के प्रशासनिक बदलावों पर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के बीच अलग से चर्चा होने की संभावना है।
संकल्प पत्र बनेगा समीक्षा का मुख्य आधार
विधानसभा चुनाव में भाजपा द्वारा जारी किए गए संकल्प पत्र को भी चिंतन शिविर में प्रमुख आधार बनाया जाएगा। ढाई साल में कितने संकल्प पूरे हुए, कितनों पर काम चल रहा है और कौन से वादे अभी तक शुरू नहीं हो सके हैं—इसका हिसाब तैयार किया जाएगा। खास तौर पर किसान, आदिवासी और युवा वर्ग के लिए शुरू की गई योजनाओं के परिणामों पर फोकस रहेगा। जिन संकल्पों पर काम शुरू नहीं हो पाया है, उनके लिए समयसीमा और क्रियान्वयन का रोडमैप तैयार किया जा सकता है।
चुनावी जिम्मेदारी भी तय होगी
2027 में पहले नगरीय निकाय और उसके बाद त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संभावित हैं। सरकार इन चुनावों को विधानसभा चुनाव से पहले अपने कामकाज की बड़ी परीक्षा के रूप में देख रही है। संभावना है कि मंत्रिपरिषद में बदलाव के बाद मंत्रियों के जिलों के प्रभार भी नए सिरे से तय किए जाएं। प्रभारी मंत्रियों को उनके जिलों में निकाय और पंचायत चुनाव की राजनीतिक जिम्मेदारी भी दी जा सकती है। सरकार की कोशिश अक्टूबर तक इस पूरी प्रशासनिक और राजनीतिक जमावट को पूरा करने की होगी।
संगठन की रिपोर्ट भी होगी अहम
चिंतन शिविर से पहले मुख्यमंत्री भाजपा संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर सकते हैं। इसमें प्रत्येक जिले से संगठन स्तर पर तैयार की जा रही रिपोर्ट पर चर्चा होगी। सरकार और संगठन यह देखेंगे कि जनता के बीच सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों की स्वीकार्यता कैसी है। सहकारिता से जुड़े चुनावों के साथ जल उपभोक्ता संस्थाओं और मंडी चुनावों को लेकर भी संगठन के साथ रणनीति पर चर्चा हो सकती है।
निगम-मंडलों में खाली पद भी भरने की तैयारी
राजनीतिक नियुक्तियों का मुद्दा भी सरकार के एजेंडे में रहेगा। निगम-मंडल, प्राधिकरण और आयोगों में जहां नियुक्तियां हो चुकी हैं, वहां उनके प्रदर्शन और राजनीतिक उपयोगिता की समीक्षा की जा सकती है। वहीं लंबे समय से खाली पड़े पदों पर नियुक्तियों को लेकर भी फैसला संभव है। कुल मिलाकर सितंबर का चिंतन शिविर सरकार के ढाई साल के कामकाज की समीक्षा से ज्यादा 2027 के चुनावों की तैयारी का शुरुआती बड़ा पड़ाव माना जा रहा है। इसमें मंत्री, प्रशासन और संगठन—तीनों की भूमिका की समीक्षा के बाद अक्टूबर तक नई राजनीतिक-प्रशासनिक जमावट सामने आने की संभावना है।

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