प्राइवेट सेक्टर से बिजली खरीदी अब कैबिनेट के बाद होगी

  • बड़े वित्तीय फैसलों में तय होगी जवाबदेही

गौरव चौहान
मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड ने बड़ा फैसला लेते हुए तय किया है कि अब भविष्य में होने वाले सभी नए दीर्घकालीन और मध्यकालीन बिजली खरीद समझौते और बिजली आपूर्ति समझौते राज्य सरकार की कैबिनेट मंजूरी के बाद ही लागू किए जाएंगे। अब तक ऐसे समझौतों को केवल कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मंजूरी से लागू कर दिया जाता था, लेकिन अब इन्हें कैबिनेट स्तर पर स्वीकृति दिलाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सरकार का मानना है कि बिजली खरीद से जुड़े समझौते लंबे समय तक वित्तीय प्रभाव डालते हैं, इसलिए इन पर उच्च स्तर पर फैसला होना जरूरी है।
घरों में सोलर पैनल के लिए ऋण देने में बैंक नहीं कर सकेंगे आनाकानी
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश में घरों में सोलर पैनल लगाने के लिए ऋण देने में बैंक अब आनाकानी नहीं कर सकेंगे। ऊर्जा विकास निगम बैंकों एवं वेंडरों के साथ विचार-विमर्श कर एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार कर रहा है, जिससे ऋण की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाया जा सके। एसओपी के तहत बैंक अगर ऋण के आवेदन निरस्त करते हैं तो इसका उन्हें कारण बताना होगा। वहीं लंबित प्रकरणों की भी वस्तु स्थिति स्पष्ट करनी होगी। ऊर्जा विकास निगम इन प्रकरणों की समय-समय पर मॉनिटरिंग कर समीक्षा भी करेगा। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश में अब तक 1,94,843 आवेदन एवं 1,23,562 संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। इनकी कुल क्षमता 461.93 मेगावाट है। इन स्थापनाओं के लिए अब तक 871 करोड़ रुपये का अनुदान भारत सरकार द्वारा दिया जा चुका है।
इससे यह होगा फायदा
सरकार का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में बिजली आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम साबित होगा। साथ ही इससे बिजली खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, बड़े वित्तीय फैसलों में जवाबदेही तय होगी, राज्य के हित और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्णय लिए जा सकेंगे। नई ऊर्जा परियोजनाओं पर सरकार और वित्त विभाग की बेहतर निगरानी रहेगी और भविष्य में बिजली आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा को अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिजली खरीद से जुड़ी सभी योजनाएं अधिक व्यवस्थित और राज्य की ऊर्जा नीति के अनुरूप लागू की जा सकेंगी।
जल्द भेजा जाएगा सीएम की मंजूरी के लिए सीएमओ और ऊर्जा विभाग के अपर
मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने बताया कि बोर्ड ने गहन विचार-विमर्श के बाद राज्य में वर्तमान ऊर्जा उपलब्धता और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि बोर्ड का यह प्रस्ताव पहले ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद नई नीति लागू कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश का ऊर्जा क्षेत्र वर्तमान में काफी मजबूत स्थिति में है और राज्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त क्षमता उपलब्ध है। प्रदेश में सौर, पवन, थर्मल और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से बिजली आपूर्ति की जा रही है।
1,795 छोटे-बड़े प्रदेश में वर्तमान में लागू
प्रदेश में फिलहाल करीब 1,795 छोटे-बड़े और दीर्घकालीन बिजली खरीद समझौते लागू है, जिनसे लगभग 26,012 मेगावाट बिजली की आपूर्ति हो रही है। इसी वजह से मध्य प्रदेश फिलहाल ऊर्जा सरप्लस राज्य माना जाता है। सरकार का कहना है कि अब नई तकनीकों जैसे बायोमास, सोलर बैटरी स्टोरेज, पंप हाइड्रो स्टोरेज और न्यूक्लियर एनर्जी से जुड़े प्रस्ताव तेजी से आ रहे हैं। ऐसे में इन परियोजनाओं पर निर्णय लेने से पहले वित्त विभाग और राज्य शासन की राय लेना जरूरी हो गया है।
बैठक में मिली शिकायतें
बैंकों के अधिकारियों एवं घरेलू क्षेत्रों में कार्यरत पंजीकृत वेंडरों के साथ मप्र ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड, भोपाल ने बैठक आयोजित की थी। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में घरेलू क्षेत्रों में लोन की प्रक्रिया से लगने वाले सौर संयंत्रों में आ रही समस्याओं का समाधान करना रहा। बैठक में बैंक द्वारा लोन न देने की शिकायतें भी मिलीं। ऊर्जा विकास निगम के एमडी अमन वीर सिंह बैंस ने निर्देश दिए हैं कि भारत सरकार की इस योजना में बैंक अधिक से अधिक ऋण उपलब्ध कराए, आनाकानी नहीं चलेगी। बैठक में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, यस बैंक, एचडीएफसी बैंक, मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक सहित कई अन्य बैंकों के अधिकारी एवं वेंडर उपस्थित रहे।

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