पंचायतों को अब सिर्फ अनुदान नहीं, कमाई का भी देना होगा हिसाब

  • 23 हजार पंचायतों में 80 प्रतिशत बेसिक, 20 प्रतिशत परफॉर्मेंस ग्रांट

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश की करीब 23 हजार ग्राम पंचायतों के लिए अनुदान व्यवस्था अब सिर्फ राशि मिलने तक सीमित नहीं रहेगी। 16वें वित्त आयोग के तहत 2026-27 से 2030-31 के बीच पंचायतों को मिलने वाले अनुदान का एक हिस्सा उनकी कार्यप्रणाली और राजस्व जुटाने की क्षमता से जोड़ा गया है। अब पंचायतों को पहले 80 प्रतिशत बेसिक ग्रांट मिलेगी, जबकि शेष 20 प्रतिशत परफॉर्मेंस ग्रांट निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद जारी होगी। नए प्रावधानों का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पंचायतों को अपनी आय बढ़ाने पर भी ध्यान देना होगा। ग्राम पंचायतों को पिछले वित्त वर्ष की तुलना में अपनी आय में 2.5 प्रतिशत की वृद्धि करनी होगी। इसके साथ हर परिवार से औसतन कम से कम 1200 रुपए राजस्व संग्रह का लक्ष्य रखा गया है। परफॉर्मेंस ग्रांट हासिल करने के लिए पंचायतों को अपने वित्तीय प्रबंधन में भी सुधार करना होगा। पंचायतों के पिछले दो वित्त वर्षों का ऑडिट होना जरूरी होगा। साथ ही उनके बैंक खाते ऑनलाइन सर्टिफाइड होने चाहिए। 2026-27 की पहली किस्त के लिए एक और शर्त रखी गई है। पंचायतों के पास 14वें वित्त आयोग की कोई राशि खर्च होने से बची नहीं होनी चाहिए। यानी पुरानी राशि के उपयोग और लेखे-जोखे को पूरा किए बिना नए फंड का लाभ लेना आसान नहीं होगा।
बेसिक ग्रांट का आधा पैसा पानी और स्वच्छता पर
पंचायतों को मिलने वाली बेसिक ग्रांट का 50 प्रतिशत हिस्सा पेयजल, स्वच्छता और जल संरक्षण से जुड़े कार्यों पर खर्च करना होगा। शेष राशि पंचायतें निर्धारित नियमों के तहत अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार खर्च कर सकेंगी। पानी से जुड़े कार्यों में जल स्रोतों की सुरक्षा, टंकी और जल स्रोतों की फेसिंग, बोरवेल, हैंडपंप, पंप-मोटर, वाल्व की मरम्मत, पाइपलाइन, ओवरहेड टैंक की सफाई और आपातकालीन मेंटेनेंस शामिल हैं। स्कूल, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र और बस स्टैंड में नल कनेक्शन, जल परीक्षण किट, क्लोरीन डोजर, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन और नल-जल मित्र एवं ऑपरेटर का मानदेय भी इसी फंड से किया जा सकेगा। 16वें वित्त आयोग में पेयजल व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत ग्राम पंचायतों को ब्लीचिंग पाउडर और टेस्ट किट जैसी छोटी जरूरत की सामग्री खरीदने की जिम्मेदारी दी जाएगी। जनपद स्तर पर पंप, मोटर, वाल्व और स्पेयर पाट्र्स की व्यवस्था होगी, जबकि जिला स्तर पर बड़े उपकरण खरीदे जाएंगे।
अब ग्राम सभा तय करेगी विकास का प्लान: ‘सबकी योजना, सबका विकास’ के तहत ग्राम पंचायतों की विकास योजना ग्राम सभा में तैयार की जाएगी। ग्राम सभा से मंजूर योजना को ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इसी तरह जनपद और जिला पंचायतों की योजनाएं भी साधारण सभा में मंजूर कर ऑनलाइन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को भेजी जाएंगी। इससे पंचायतों के विकास कार्यों में स्थानीय जरूरतों और ग्राम सभा की भूमिका को अधिक महत्व मिलेगा।
जनपद पंचायतों के लिए भी प्रदर्शन की शर्त
परफॉर्मेंस आधारित व्यवस्था सिर्फ ग्राम पंचायतों तक सीमित नहीं है। जनपद पंचायतों को भी पात्रता के लिए अपने क्षेत्र की कम से कम 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को आयोग के निर्धारित मानक पूरे कराने होंगे। इससे जनपद पंचायतों पर भी अपने अधीन आने वाली ग्राम पंचायतों के वित्तीय प्रबंधन, राजस्व संग्रहण और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की निगरानी की जिम्मेदारी बढ़ेगी। 

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