
- किरायानामा से वर्क कॉन्ट्रैक्ट तक जांच के दायरे में
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। इंदौर में सामने आए करोड़ों रुपए के कथित स्टाम्प घोटाले के बाद अब पंजीयन विभाग की नजर केवल बिल्डरों और निजी संपत्तियों तक सीमित नहीं रहेगी। प्रदेशभर के सरकारी विभागों और संस्थानों में तैयार होने वाले दस्तावेज भी जांच के दायरे में आ गए हैं। पंजीयन विभाग ने ऐसे दस्तावेजों की पड़ताल शुरू कराने के निर्देश दिए हैं, जिन पर स्टाम्प शुल्क या पंजीयन की देनदारी बनती है। जिला पंजीयकों को अपने-अपने जिलों में सरकारी संस्थानों का निरीक्षण कर दस्तावेजों की जांच करने को कहा गया है। जांच में यह देखा जाएगा कि जिन अनुबंधों, किरायानामों, निर्माण समझौतों या संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों पर स्टाम्प शुल्क जमा होना चाहिए था, वहां नियमों का पालन हुआ या नहीं।
अभियान में सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा किराए पर लिए गए भवन, दुकान और अन्य परिसंपत्तियों के दस्तावेजों की भी जांच होगी। पंजीयन विभाग यह पता लगाएगा कि किराए की अवधि और दस्तावेज की प्रकृति के अनुसार आवश्यक स्टाम्प शुल्क जमा किया गया है या नहीं। खास तौर पर 11 महीने से अधिक अवधि वाले किरायानामों की जांच की जाएगी। विभाग के अनुसार ऐसी स्थिति में दस्तावेज पट्टा विलेख की श्रेणी में आ सकता है और उसका पंजीयन अनिवार्य हो सकता है। बैंकों, सरकारी संस्थानों और अन्य कार्यालयों द्वारा संचालन के लिए किराए पर लिए गए भवन भी जांच के दायरे में होंगे। इससे लंबे समय से चल रहे किराए के अनुबंधों में स्टाम्प शुल्क और पंजीयन की स्थिति सामने आ सकेगी।
सरकारी टेंडर भी अब जांच से नहीं बचेंगे
पंजीयन विभाग की जांच का दायरा केवल संपत्ति और किराए के दस्तावेजों तक सीमित नहीं है। सरकारी विभागों द्वारा टेंडर के जरिए कराए जाने वाले निर्माण और अन्य कार्यों के वर्क कॉन्ट्रैक्ट भी जांचे जाएंगे। इसके अलावा अचल संपत्ति की खरीद या निर्माण के लिए बैंक से लिए गए ऋण से संबंधित एग्रीमेंट की भी पड़ताल होगी। विभाग यह देखेगा कि संबंधित दस्तावेज पर नियमानुसार स्टाम्प शुल्क देय था या नहीं और यदि था तो उसका भुगतान किया गया या नहीं। जांच में स्टाम्प शुल्क कम जमा मिलने या अनिवार्य पंजीयन नहीं कराने की स्थिति में संबंधित पक्ष से शुल्क की वसूली की कार्रवाई की जा सकती है। जरूरत पडऩे पर जिला स्तर पर कलेक्टर को भी कार्रवाई के लिए सूचना भेजी जाएगी।
इन संस्थानों के रिकॉर्ड होंगे खंगाले
विशेष जांच अभियान में कई तरह के सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों को शामिल किया गया है। इनमें कृषि उपज मंडी, जिला उद्योग केंद्र, खनिज विभाग, गृह निर्माण मंडल, रोगी कल्याण समिति, बिजली कंपनियां, जल संसाधन विभाग, लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा शामिल हैं। इसके साथ ही बीमा कंपनियों, रेलवे स्टेशन और बैंक शाखाओं से जुड़े दस्तावेज भी जांचे जाएंगे। यानी अभियान का फोकस उन सभी संस्थानों पर है जहां संपत्ति, किराए, अनुबंध या अन्य ऐसे दस्तावेज तैयार होते हैं जिन पर स्टाम्प शुल्क की देनदारी बन सकती है।
इंदौर मामले के बाद विभाग ने बढ़ाई निगरानी
इंदौर में 5 जुलाई 2025 को सामने आए कथित 13.32 करोड़ रुपए के स्टाम्प ड्यूटी नुकसान के मामले ने पंजीयन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने पांच आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि डीएलएफ गार्डन सिटी की जमीन की रजिस्ट्री गाइडलाइन से कम दर पर कराए जाने से शासन को राजस्व नुकसान हुआ। इसी मामले के बाद अब विभाग ने स्टाम्प ड्यूटी की चोरी और कम वसूली की संभावनाओं को रोकने के लिए जांच का दायरा बढ़ाया है।
सरकार की नजर अब छिपे राजस्व पर
इस अभियान का सबसे बड़ा असर यह होगा कि अब स्टाम्प ड्यूटी की जांच केवल रजिस्ट्री कार्यालय में आने वाले दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहेगी। पंजीयन विभाग सरकारी कार्यालयों में जाकर उन दस्तावेजों को भी खंगालेगा, जो सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के दौरान तैयार होते हैं। यदि जांच में बड़ी संख्या में ऐसे दस्तावेज मिलते हैं जिन पर स्टाम्प शुल्क जमा नहीं हुआ है, तो सरकार को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। साथ ही विभागों और संस्थानों के लिए भी यह स्पष्ट संदेश है कि सरकारी प्रक्रिया के नाम पर स्टाम्प शुल्क और अनिवार्य पंजीयन के नियमों की अनदेखी अब आसानी से नहीं की जा सकेगी।
