ग्रीन पावर बैंकिंग पर सरकार का शिकंजा

  • 30 प्रतिशत सीमा, 8 प्रतिशत बिजली कटेगी
  • तीन महीने में इस्तेमाल नहीं की तो बैंक की बिजली होगी लैप्स

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस के तहत बिजली बैंक करने वाले उद्योगों और अन्य पात्र उपभोक्ताओं के लिए बैंकिंग व्यवस्था अब पहले से ज्यादा सीमित और लागत आधारित हो गई है। नई व्यवस्था में उपभोक्ता एक महीने में अपनी डिस्कॉम से हुई वास्तविक बिजली खपत के अधिकतम 30 प्रतिशत तक ही सरप्लस बिजली बैंक कर सकेगा। इसके अलावा बैंक की गई बिजली में से 8 प्रतिशत ऊर्जा बैंकिंग चार्ज के रूप में काटी जाएगी। यानी बैंकिंग सुविधा का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता को अपनी सरप्लस बिजली का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। नई व्यवस्था में बैंकिंग का चक्र तीन महीने का होगा। जिस महीने बिजली बैंक की गई, उसे हृ महीना माना जाएगा। इसके बाद अगले दो महीने यानी एन+1 और एन+2 में बैंक की गई बिजली वापस ली जा सकेगी। इसके बाद बची ऊर्जा लैप्स हो जाएगी। मसलन, जुलाई में बैंक की गई बिजली अगस्त और सितंबर में इस्तेमाल की जा सकती है। 30 सितंबर के बाद बची ऊर्जा खत्म मानी जाएगी। हालांकि उपभोक्ता वित्तीय वर्ष में एक बार बैंकिंग साइकल बढ़ाने का अनुरोध कर सकता है। इसके लिए एन+2 महीने की समाप्ति के तीन दिन के भीतर आवेदन करना होगा और संबंधित लाइसेंसधारी की तकनीकी मंजूरी भी आवश्यक होगी।
एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी की नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव बैंकिंग की सीमा को लेकर है। यदि किसी उपभोक्ता की वास्तविक मासिक खपत 10 लाख यूनिट है तो वह अधिकतम 3 लाख यूनिट तक ही बिजली बैंक कर सकेगा। इससे ज्यादा सरप्लस बिजली उपलब्ध होने पर भी अतिरिक्त ऊर्जा बैंकिंग में शामिल नहीं की जाएगी। बैंकिंग चार्ज राशि में नहीं, बल्कि ऊर्जा की मात्रा में लिया जाएगा। उदाहरण के लिए किसी उपभोक्ता के पास 1000 यूनिट बिजली बैंक करने की पात्रता है तो उसमें से 8 प्रतिशत यानी 80 यूनिट बैंकिंग चार्ज के रूप में कट जाएगी। उपभोक्ता के इस्तेमाल के लिए सिर्फ 920 यूनिट उपलब्ध रहेंगी। बैंकिंग की गणना प्रत्येक 15 मिनट के टाइम ब्लॉक में होगी। जनरेटर से ग्रिड में डाली गई बिजली में लागू ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लॉस तथा उपभोक्ता की वास्तविक खपत घटाने के बाद बची ऊर्जा को सरप्लस माना जाएगा। हालांकि पूरे महीने की बैंकिंग ऊर्जा निर्धारित 30 प्रतिशत सीमा से अधिक नहीं हो सकेगी। सीमा पार होने पर अलग-अलग 15 मिनट के टाइम ब्लॉक की बैंकिंग ऊर्जा को अनुपात के आधार पर कम किया जाएगा।
बैंक की बिजली वापस लेना भी पड़ सकता है महंगा
नई व्यवस्था में उपभोक्ता के लिए एक और वित्तीय जोखिम बैंक की गई बिजली को वापस लेने के समय सामने आ सकता है। यदि डिस्कॉम या संबंधित इकाई को बैंक की ऊर्जा लौटाने के लिए अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ती है और उस बिजली की वास्तविक ऊर्जा लागत बैंकिंग के समय निर्धारित बिजली की वैल्यू से ज्यादा होती है, तो दोनों के बीच का अंतर अतिरिक्त पावर खरीद लागत के रूप में उपभोक्ता से वसूला जा सकता है। वहीं यदि अतिरिक्त बिजली खरीदने की वास्तविक लागत बैंकिंग के समय तय वैल्यू से कम या उसके बराबर रहती है तो अतिरिक्त शुल्क शून्य रहेगा।
पीक टाइम की बिजली इस्तेमाल करने में ज्यादा विकल्प
बैंकिंग में टाइम ऑफ डे व्यवस्था का भी असर रहेगा। पीक समय में बैंक की गई बिजली का इस्तेमाल पीक और ऑफ-पीक दोनों अवधि में किया जा सकेगा। लेकिन ऑफ-पीक समय में बैंक की गई बिजली का इस्तेमाल केवल ऑफ-पीक अवधि में ही किया जा सकेगा। इसका मतलब है कि उपभोक्ता अपनी बैंक की गई बिजली को हर समय अपनी सुविधा के अनुसार इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।
उपभोक्ताओं के सामने तीन बड़ी चुनौतियां
नई बैंकिंग व्यवस्था में ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं के लिए तीन प्रमुख वित्तीय जोखिम सामने आते हैं-पहला, बैंक की गई ऊर्जा में से 8 प्रतिशत ऊर्जा चार्ज के रूप में कट जाएगी। दूसरा, तीन महीने की समय सीमा में इस्तेमाल नहीं होने पर बची ऊर्जा लैप्स हो जाएगी। तीसरा, बिजली वापस लेने के समय अतिरिक्त पावर खरीद लागत बढऩे पर उसका अंतर भी उपभोक्ता को देना पड़ सकता है। इसके अलावा 30 प्रतिशत की सीमा के कारण ज्यादा उत्पादन वाले महीनों में उपलब्ध पूरी सरप्लस बिजली बैंक नहीं की जा सकेगी।
पुरानी बैंकिंग बिजली पहले होगी एडजस्ट: यदि किसी उपभोक्ता के पास एक साथ कई बैंकिंग साइकल की बिजली उपलब्ध है तो पहले पुराने बैंकिंग साइकल की ऊर्जा का समायोजन किया जाएगा। इससे पुरानी बिजली के लैप्स होने का जोखिम कम होगा। डिस्कॉम को प्रत्येक बैंकिंग महीने के बाद तीन कार्यदिवस के भीतर उपभोक्ता को 15-15 मिनट के टाइम ब्लॉक के हिसाब से बैंक की गई बिजली का पूरा विवरण देना होगा। इसमें पीक और ऑफ-पीक ऊर्जा की जानकारी भी शामिल होगी। कुल मिलाकर नई व्यवस्था में ग्रीन पावर बैंकिंग की सुविधा जारी है।

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