
बिच्छू डॉट कॉम। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन तलाक जैसी प्रथाओं पर तीखी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा-निकाह, हलाला और तीन तलाक जैसे रस्म -रिवाजों के चक्रव्यूह में फंसा कर महिला के यौन शोषण की इजाजत नहीं दी जा सकती। यह हमारे समाज का वह काला पन्ना है, जो संवैधानिक मूल्यों, समानता और मानवीय गरिमा की अवधारणा से कोसों दूर है। ये कृत्य न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि ये समाज की सामूहिक अंतरात्मा को झकझोरने वाले हैं। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने पीडि़ता के पूर्व पति, चाचा, मौलाना समेत अन्य रिश्तेदारों की याचिका खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा-व्यक्तिगत कानूनों की आड़ में अपराधों का संरक्षण नहीं किया जा सकता। प्रथम दृष्टया यह मामला नाबालिग संग सोची समझी रणनीति के साथ सामूहिक रेप का है। इसकी गहन जांच जरूरी है। मामला अमरोहा के सैदनागली थाना क्षेत्र का है। एफआईआर के मुताबिक पीडि़ता का निकाह 2015 में तब हुआ था जब वह महज 15 वर्ष की थी। इसके बाद तीन तलाक, फिर निकाह हलाला और पुन: निकाह के चक्रव्यूह में फंसाकर उसका लगातार यौन शोषण किया गया।
