
बिच्छू डॉट कॉम। नेपाल में कुदरत के भीषण विनाश और मौत के भयावह आंकड़ों के बीच आस्था और उम्मीद को नई जिंदगी देने वाले दो बड़े चमत्कार सामने आए हैं। जहां एक तरफ 1,300 से अधिक मौतों और 5,000 से ज्यादा लापता लोगों के बीच हर तरफ मायूसी छाई है। वहीं 11 दिनों तक मौत को मात देकर मलबे और अंधेरी सुरंगों से जिंदगियों का सही-सलामत बाहर आना किसी दैवीय कृपा से कम नहीं माना जा रहा है। नुवाकोट की रहने वाली 64 वर्षीय चंद्रिका श्रेष्ठ अपने ही ढहे हुए घर के मलबे के नीचे 11 दिनों तक दबी रहीं। खाने-पानी के बिना इतने लंबे समय तक मलबे में दबे रहने के बावजूद जब शनिवार को रेस्क्यू टीम ने उन्हें बेहोशी की हालत में बाहर निकाला, तो उनकी धडक़नें चल रही थीं। चंद्रिका को तुरंत एयरलिफ्ट कर काठमांडू के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दूसरा चमत्कार नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की उस सुरंग में हुआ, जहां मौत का सन्नाटा पसरा था। टनल में फंसे एक चीनी कर्मचारी को नेपाली सेना ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सुरंग से बाहर आए कर्मी के चेहरे पर मुस्कान देखी गई।
