प्रवासन पर भारत का दृष्टिकोण समग्र और व्यावहारिक: कीर्ति वर्धन सिंह

कीर्ति वर्धन सिंह

न्यूयॉर्क। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में कहा कि वह प्रवासन के लिए एक समावेशी, मानवीय और भविष्य के लिए तैयार ढांचा बनाने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा, अनियमित प्रवासन और मानव तस्करी जैसी समस्याओं से भी निपट रहा है। केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने न्यूयॉर्क में गुरुवार को ग्लोबल कॉम्पैक्ट फॉर माइग्रेशन (जीसीएम) के दूसरे अंतरराष्ट्रीय प्रवासन समीक्षा मंच (आईएमआरएफ) की पूर्ण बैठक को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, प्रवासन असल में लोगों, उनकी आकांक्षाओं, उनकी मेहनत और समाज में उनके योगदान के बारे में है। उन्होंने कहा, हम एक ऐसा ढांचा बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जो समावेशी, मानवीय और भविष्य के लिए हो। साथ ही अनियमित प्रवासन, मानव तस्करी और सामाजिक सुरक्षा की कमियों जैसी चुनौतियों का भी समाधान करे। सिंह ने बताया कि भारत प्रवासन को एक ‘समग्र और व्यावहारिक’ ढांचे (फ्रेमवर्क) के जरिये प्रबंधित करता है, जिसमें प्रवासियों की सुरक्षा, प्रवासन प्रक्रिया के हर चरण की निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है।

उन्होंने कहा, भारत दुनिया के सबसे बड़े और सक्रिय प्रवासी समुदायों में से एक का घर है, जिसमें 3.4 करोड़ से अधिक लोग शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा, भारत वैश्विक धन प्रेषण (रेमिटेंस) प्राप्त करने वाला प्रमुख देश है, यह देखता है कि प्रवासन जीवन, समुदायों और राष्ट्रों को कैसे बदल सकता है। भारत ने अब तक 23 देशों के साथ व्यापक द्विपक्षीय आवागमन समझौते और समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं और वह कई अन्य देशों के साथ भी ऐसे समझौते करने की दिशा में काम कर रहा है। इसका मकसद सुरक्षित और नियमित प्रवासन के लिए टिकाऊ मार्ग बनाना है, जिससे प्रवासियों का कल्याण सुनिश्चित हो सके।

मंत्री ने विदेश में रह रहे भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए भारत की ओर से डिजिटल और तकनीकी के क्षेत्र में उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ‘मदद’ शिकायत निवारण पोर्टल और प्रवासी संसाधन केंद्रों के जरिये कांसुलर सुरक्षा को मजबूत किया गया है। इसके अलावा, पासपोर्ट सेवा ऑनलाइन पोर्टल के जरिये देश और विदेश में भारतीय नागरिकों को समय पर और आसान सेवाएं मिल रही हैं। भारतीय समुदाय कल्याण कोष 2009 से भारतीय नागरिकों को आपात सहायता, कानूनी मदद और स्वदेश वापसी जैसी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने कहा, हमने कौशल विकास और यात्रा से पहले दिए जाने वाले प्रशिक्षण को मजबूत किया है, ताकि प्रवासियों को उनके अधिकारों और मेजबान देश की संस्कृति की जानकारी मिल सके।

Related Articles